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इस्राइल ने तेल-गैस करार के लिए भारत को दिया न्योता

Thu, 12 Feb 2015 04:10 PM IST
Updated Thu, 12 Feb 2015 04:10 PM IST
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Israel invite India for oil&gas deal

इस्राइल ने भारत की दो सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को अपने यहां खोजे गए नए गैस क्षेत्रों में निवेश और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के लिए दीर्घ अवधि के करार के लिए आमंत्रित किया है।

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इस्राइल से यह न्योता पाने वाली कंपनियां ओएनजीसी की विदेशी इकाई ओवीएल और गेल हैं। इस्राइल का यह आमंत्रण एक ओर जहां इन सरकारी कंपनियों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल सकता है।
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वहीं दूसरी ओर इस्राइल की तरफ कदम बढ़ाने पर तेल उत्पादक अरब देशों से भारत के संबंधों पर इसका प्रतिकूल असर भी देखने को मिल सकता है। इस्राइल की इस पेशकश की ओर कदम बढ़ाने को लेकर मोदी सरकार ने फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है।
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इसकी वजह यह है कि सरकार इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि ऐसा करना भारत को सबसे ज्यादा तेल व गैस की आपूर्ति करने वाले सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देशों को नाराज कर सकता है।

पसोपेश में है भारत का पेट्रोलियम मंत्रालय

Israel invite India for oil&gas deal

अरब, ईराक और कुवैत जैसे देशों के इस्राइल से रिश्ते खुशगवार न होने के चलते ऐसा होने की काफी हद तक संभावना है। सरकार की यह आशंका बेवजह भी नहीं है।

सरकार को ऐसा एक झटका फरवरी 2012 में लगा था, जब कुवैत ने इस्राइली कंपनियों से कारोबार के चलते इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) पर प्रतिबंध लगा दिया था।

हालांकि यह प्रतिबंध ज्यादा लंबे समय तक नहीं चला और फिलहाल आईओसी कुवैत से तेल और गैस दोनों चीजों का ही आयात कर रही है।

विदेश मंत्रालय इस बात को लेकर खासी पसोपेश में है कि इस्राइल के साथ संबंध किस तरह इस ढंग से आगे बढ़ाया जाए कि इसका बुरा असर अरब देशों के साथ भारत के रिश्तों पर न पड़ने पाए, जैसा कि 2012 में हुआ था।

इस्राइल से कारोबार बढ़ाने के पक्षधर हैं मोदी

Israel invite India for oil&gas deal

साल 2012 में विदेश मंत्रालय को पेट्रोलियम मंत्रालय को यह सलाह देनी पड़ी थी कि वह इस्राइल को अपने सालाना आयोजन पेट्रोटेक 2012 में शामिल करने से बचे।

इस्राइल को लेकर विदेश मंत्रालय का रवैया अतीत में खासा अस्पष्ट रहा है, पर मोदी सरकार के दौर में इसमें बदलाव के संकेत हैं। इसकी वजह इस्राइल से सहयोग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सकारात्मक रुख है।

मोदी न केवल तेल-गैस, बल्कि इस्राइल के साथ अन्य प्रकार के कारोबार को बढ़ाने के भी पक्षधर हैं। यही वजह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय को इस बारे में पत्र लिखा है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय से इस्राइल की तेल-गैस परियोजना में ओवीएल और गेल इंडिया की भागीदारी और एलएनजी के आयात को लेकर अपना नजरिया स्पष्ट करने को कहा है।

दीर्घकालिक होगा यह करार

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इस्राइल ने ओवीएल और गेल को गहरे समुद्र में स्थित दो गैस क्षेत्रों से भारी मात्रा में एलएनजी के आयात के लिए दीर्घकालिक करार करने के लिए आमंत्रित किया है।

अमेरिका की ओर से किए गए भूगर्भीय सर्वेक्षण के मुताबिक भूमध्य सागर स्थित इन क्षेत्रों में 3,455 बीसीएम प्राकृतिक गैस और 1.7 अरब बैरल तेल मौजूद है।

साल 2010 में खोजा गया यह भंडार पिछले दशक में खोजा गया तेल व गैस का सबसे बड़ा भंडार है। इससे गैस का उत्पादन 2017 तक शुरू हो जाने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि गेल फिलहाल इस्राइल के साथ तेल-गैस के किसी भी तरह के कारोबार में संलग्न नहीं है। कुछ साल पहले वह इस्राइल के समुद्री क्षेत्र में तेल व गैस की खोज में शामिल हुई थी, पर उपरोक्त रणनीतिक व कूटनीतिक जटिलताओं के चलते इस दिशा में कदम आगे नहीं बढ़ाए जा सके थे।

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