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IS का 'ऑपरेशन 7 कलश' ध्वस्त, देश को दहलाने की थी साजिश

Sun, 24 Jan 2016 09:02 AM IST
Updated Sun, 24 Jan 2016 09:02 AM IST
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isis was planning about operation seven kalash

लखनऊ, कुशीनगर समेत देश के अलग-अलग शहरों में आईएसआईएस के 14 संदिग्धों के पकड़े जाने के बाद खुफिया एजेंसियों ने आतंकियों के आजमगढ़ माड्यूल्स की पड़ताल नए सिरे से शुरू की है। आजमगढ़ निवासी बड़ा साजिद समेत फरार दो आतंकियों के आईएसआईएस से जुड़े होने की आशंका है। पता चला है कि पूर्वांचल समेत कई जिलों के युवाओं से संपर्क कर उन्हें आईएसआईएस से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसके मद्देनजर खुफिया एजेंसियां बेहद सतर्क हैं। उनके निर्देश पर नेपाल सीमा पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है। खास तौर पर आजमगढ़ और गोरखपुर से नेपाल जाने वाले लोगों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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आजमगढ़ के पांच फरार आंतकी शहनवाज, मिर्जा शादाब बेग, आरिज खान, मो. खालिद और वकास पर एनआईए ने 10-10 लाख का इनाम घोषित किया है। बड़ा साजिद के आईएसआईएस से जुड़े होने की खबरें पहले से आती रही हैं। बीते नवंबर में सीरिया में उसके मारे जाने की खबर आई थी लेकिन उसके घरवालों ने इसे सिरे से खारिज किया था। शुक्रवार को देश भर से आईएसआईएस के संदिग्ध आतंकियों के पकड़े जाने के बाद से खुफिया एजेंसियों ने बड़ा साजिद समेत अन्य फरार आतंकियों की पड़ताल नए सिरे से शुरू की है। पता चला है कि बड़ा साजिद के अलावा आजमगढ़ का एक अन्य आतंकी भी आईएसआईएस से जुड़ गया है। एजेंसियां पूर्वांचल में उसके संपर्कों को खंगाल रही है। यह भी पता चला है कि ये दोनों आतंकी पूर्वांचल समेत अन्य जिलों के युवाओं को गुमराह कर उन्हें सीरिया बुलाने के प्रयास में हैं।
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बटला हाउस कांड का आरोपी रहा है बड़ा साजिद
आजमगढ़ के संजरपुर का रहने वाला बड़ा साजिद पूर्व में इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा था। बड़ा साजिद पर दिल्ली के बटला हाउस एनकाउंटर में शामिल होने का आरोप है। उसका छोटा भाई छोटा साजिद 2008 में बटला हाउस कांड में मारा गया था। सूत्रों का कहना है कि बड़ा साजिद फर्जी पासपोर्ट पर पहले नेपाल भाग गया, फिर वहां से दुबई होते हुए पाकिस्तान और फिर सीरिया पहुंचा। वह काफी दिनों तक आईएम के आतंकी रियाज भटकल के संपर्क में भी था। आईएम ने उसे उत्तरी भारत में आतंकी घटनाएं करने के लिए कमांडर बनाया था। नंवबर में आईएसआईएस द्वारा छेड़े गए युद्ध की जानकारी देने वाले कुछ ट्विटर हैंडल के जरिये भारतीय खुफिया एजेंसियों को साजिद के सीरिया में मारे जाने की जानकारी मिली थी।
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पहले भी मिले थे सुराग
आईबी और यूपी एटीएस की संयुक्त टीम ने गोरखपुर से बीते साल 26 मार्च को आतंकी ओवेस मुर्तजा और अब्दुल वलीद को गिरफ्तार किया था। उनके पास से एके 47 और पिस्टल बरामद हुई थी। दोनों ने पुलिस की पूछताछ में बताया था कि वह आईएम के रियाज भटकल के कहने पर यूपी में आतंकी धमाके करने वाले थे। उनकी कॉल डिटेल खंगालने पर पता चला कि आतंकियों की बात भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में लगातार हो रही थी। दोनों आतंकी रहने वाले कराची के थे लेकिन उन्हें प्रशिक्षण अफगानिस्तान में दिया गया था। पूछताछ के आधार पर ही आजमगढ़ के फरार आतंकी शहनवाज, साजिद और मिर्जा शादाब बेग के अफगानिस्तान में छिपे होने की आशंका जताई गई थी।

घर वालों को रिजवान पर हो गया था शक

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उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के कसया से शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए लेखपाल के बेटे रिजवान ने खुफिया एजेंसियों की पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। वह पिछले एक साल से सीरिया के आईएसआईएस आतंकी यूसुफ के संपर्क में था। दोनों की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई थी।

बाद में ई-मेल और वाट्सएप पर बातचीत होने लगी। पिछले कुछ दिनों से वह हैदराबाद, पुणे, बंगलूरू में था। पता चला है कि आईएसआईएस भारत के कुछ लोगों को अपने साथ जोड़कर देश में जनवरी में ही सात स्थानों पर धमाका करना चाहता था। ऑपरेशन का नाम ‘सात कलश’ रखा गया था।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने इसे डिकोड कर भारत को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद पूरी तैयारी के साथ शुक्रवार को देश भर से 14 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया।

कुशीनगर के कसया थाना क्षेत्र के सिसवा मैथिया निवासी लेखपाल निजामुद्दीन का बेटा रिजवान करीब एक साल से यूसुफ के संपर्क में था। यूसुफ उसे जिहाद के लिए भड़काता था। धीरे-धीरे रिजवान उसके बहकावे में आ गया। बाद में वह आईएसआईएस की ओर से लड़ने के लिए तैयार हो गया।

करीब दो महीने पूर्व ही रिजवान गोवा गया था। यहां उसे एक आतंकी ने खर्चे के लिए एक लाख रुपये दिए थे। उसके लिए होटल में कमरा भी बुक कराया गया था। यूसुफ के कहने पर ही रिजवान हैदराबाद में उसके सबसे करीब बताए जाने वाले आतंकी इकलाख से मिला था। इकलाख के जरिए ही उसे ऑपरेशन ‘सात कलश’ की जानकारी मिली थी। यूसुफ भारत में गिरफ्तार किए गए सभी 14 संदिग्धों के संपर्क में था। रिजवान को यूपी एटीएस और एनआईए ने शुक्रवार को गिरफ्तार किया था। उसे पूछताछ के लिए मुंबई ले जाया गया है।

रिजवान की गतिविधियां देख घरवालों को उस पर शक हो गया था। रिजवान पिछले कुछ दिनों से पुणे में था। वह पुणे से आने को तैयार नहीं था। घरवालों ने झूठ बोलकर बुलाया था। घर के एक सदस्य की तबीयत खराब होने की जानकारी के बाद वह घर लौटा था।

यूपी में नेटवर्क बना रहा आईएस

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दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन आईएस उत्तर प्रदेश में भी अपना नेटवर्क तैयार कर रहा है। सोशल साइट को ‘हथियार’ बनाकर नौजवानों को बरगलाया जा रहा है। उत्तराखंड से हुईं संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद इसका खुलासा हुआ है। खुफिया एजेंसियों को जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक कई नौजवान दुर्दांत आतंकी संगठन के संपर्क में हैं।
 
एनआईए और एटीएस की टीम ने कुछ दिन पहले हरिद्वार के रुड़की में छापामारी कर संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया था। इनसे पूछताछ में खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि यह संदिग्ध उत्तराखंड में वारदात करने की फिराक में थे। यहां से मिली जानकारी के बाद टीमों ने देश में कई जगह दबिश दी। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दस जिलों में आईएस के नेटवर्क को खंगालने के लिए कहा है।

इसके अलावा एटीएस की टीम वेस्ट यूपी के जिलों में लगातार ‘आपरेशन सर्च’ चला रही है। क्योंकि रुड़की में पकड़े गए संदिग्ध वेस्ट यूपी के जिलों से होते हुए वहां तक पहुंचे थे। यहां रहकर संदिग्ध अपना नेटवर्क तैयार कर रहे थे। कुछ लोग उनके संपर्क में थे। जिनके जरिये वह युवकों को अपने साथ शामिल करने की तैयारी कर रहे थे।

इतना ही नहीं वह आईएस के आकाओं को भी पल पल की जानकारी पहुंचा रहे थे। खुफिया एजेंसियों को ये भी कहा गया है कि वह वेस्ट यूपी में उन लोगों पर भी निगाह रखें जो पहले आतंकियों से रिश्तों के शक में पकड़े जा चुके थे। मुरादाबाद मंडल के संभल जिले से दो आतंकी कुछ दिन पहले ही पकड़े गए थे। जबकि बिजनौर से फरार हुए आतंकियों का आज तक सुराग नहीं लग पाया है।

उत्तर प्रदेश के जनपदों से लापता करीब पचास ऐसे नौजवान हैं जो खुफिया एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने हैं। यह आज कहां हैं किसी को खबर नहीं है। इनमें कई तो ऐसे हैं जो पिछले पंद्रह साल से अपने घर नहीं आए हैं। परिवार वाले भी कुछ बता नहीं पा रहे हैं। इनके बारे में भी खुफिया एजेंसियां रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।

स्लीपर सेल को एक्टिव करने की फिराक में आतंकी संगठन

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आतंकी संगठन आईएस के फैल रहे नेटवर्क और सहारनपुर में उनकी सक्रियता से इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह आतंकी संगठन स्लीपर सेल को एक्टिव करने की फिराक में हैं। आतंकी संगठन जैश-ए मोहम्मद और इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी पहले भी यहां शरण ले चुके हैं। जिले में आतंकियों के स्लीपर मॉड्यूल कई बार सामने आ चुका है। यही कारण है कि देवबंद में संदिग्धों की हुई मीटिंग की खबर के बाद खुफिया इकाइयां आतंकी कनेक्शन और स्लीपिंग माड्यूल को लेकर बेहद अलर्ट हो गई हैं।

सहारनपुर का नाम हमेशा ही आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के कारण चर्चा में रहा है। जैश-ए मोहम्मद के चीफ को छुड़ाने की आतंकी हरकत रही हो या एक साल पहले इंडियन मुजाहिद्दीन के स्लीपर सेल से संपर्क साधने का अभियान। इनमें सहारनपुर की संलिप्तता हमेशा ही सामने आई है। ज्यादातर घटनाओं में सहारनपुर को आतंकियों ने हमेशा ही शरणस्थली के रूप में प्रयोग किया है। ऐसे में देवबंद में आतंकी सक्रियता ने बार स्लीपर सेल की संभावनाओं को बल दे दिया।

करीब डेढ़ साल पहले आईएम के आतंकी शेख एजाज सईद को दिल्ली पुलिस ने सहारनपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। उस वक्त दावा किया गया था कि दो संदिग्ध आतंकी देवबंद में छिपे हैं। दिल्ली पुलिस इससे पहले भी देवबंद इलाके से सुभान और उसके बेटे को गिरफ्तार करने का दावा कर चुकी थी। उसके दावों को इसलिए भी दम मिला था कि क्योंकि सहारनपुर में आतंकी सक्रियता कई साल पहले से रही थी।
 
आपको बता दें कि सहारनपुर का नाम उस वक्त आतंकी गतिविधियों में उजागर हुआ था, जब जैश-ए मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर को छुड़ाने की कोशिश में छह विदेशी नागरिकों का अपहरण कर उन्हें यहां बंधक बनाया गया था। नवंबर के 1994 में गाजियाबाद पुलिस के हत्थे चढ़े आतंकी अहमद सईद शेख उर्फ रोहित शर्मा ने इसकी जानकारी दी थी। पुलिस ने खाताखेड़ी इलाके में मुठभेड़ कर विदेशी नागरिकों को छुड़ाया था।

सहारनपुर में अब भी आतंकियों के स्लीपर सेल की आशंका बनी हुई। एक साल पहले आईएम के आतंकी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सहारनपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया और दावा किया था कि वह स्लीपर सेल से संपर्क साधने निकला था। इसके अलावा देवबंद इलाके से भी कई संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी का दावा दिल्ली पुलिस ने किया  है। ऐसे में इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि सहारनपुर में आतंकियों का स्लीपर सेल है।

ये होता है स्लीपर सेल
स्लीपर सेल अपने मूल प्रदेश या प्रांत में विशेष प्रशिक्षण पाए गुप्त एजेंट होता है। हथियार, आधुनिक संचार उपकरण और अन्य साजो सामान से लैस रहने वाले एजेंट को देश या प्रदेश की संस्कृति या समुदाय में खुद को खपाने की जिम्मेदारी देकर भेजा जाता है। दहशत फैलाने के साथ ही आतंकी संगठन ऐसे ही स्लीपर सेल से खुफिया जानकारी भी प्राप्त करते हैं।

आरपी सिंह यादव, एसएसपी ने बताया कि दिल्ली पुलिस के खुलासे के बाद हमने वहां संपर्क साधा है। हम वहां से इनपुट लेकर स्थानीय स्तर पर छानबीन कर रहे हैं। संदिग्धों पर हमारी नजर है। खुफिया इकाइयों को सक्रिय कर दिया गया है और उसी आधार पर हमारी एक्सपर्ट टीमें काम कर रही है।

खतरनाक इरादों वाले युवाओं की खोज शुरू

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आईएस (इस्लामिक स्टेट) के रुड़की मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद से आतंकी गतिविधियों में बेहद संवेदनशील माने जाने वाली इस जिले में खुफिया विभाग की सभी टीमें अलर्ट कर दी गई हैं। शहर से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर रुड़की में पकड़े गए आतंकियों के खुलासों के बाद पुलिस प्रशासन से लेकर खुफिया तंत्र के कान खड़े हो गए हैं।
 
गिरफ्तार किए गए आतंकियों मोहम्मद मेराज, अखलाकुर्रहमान, ओसामा और मोहम्मद अजीमुद्दीन शाह की ओर से खुलासा किया गया है कि सहारनपुर जिले के देवबंद से लेकर गोरखपुर और मुंबई तक में कई युवा न केवल आईएस से जुड़ने को बेताब थे बल्कि सीरिया में भर्ती और संगठन में सक्रिय करने के लिए उनकी देवबंद में मीटिंग भी हो चुकी थी। उन्हें सीरिया तक ले जाने के लिए पासपोर्ट और धन से लेकर यहां से वहां तक जाने के अन्य इंतजाम किए जा चुके थे। दो आतंकियों को उत्तराखंड में इस काम के लिए धन भिजवाने तक की बातें सामने आई हैं।

संपर्क में आला अफसर और खुफिया टीमें
गिरफ्तार आतंकियों के खुलासे के आधार पर जितनी जानकारी अब तक सामने आई हैं। उनके आधार पर आईएस से प्रभावित या उनके संपर्क में रहे युवाओं के बारे में खुलासा ये आतंकी ही आगे कर सकते हैं। आला अफसरों से लेकर खुफिया विभाग की टीमें तक रुड़की से दिल्ली तक संपर्क में हैं।

पूरी जानकारी मिलने पर तेज होगा अभियान
क्राइम बांच प्रभारी संजय पांडेय मानते हैं कि रुड़की में पकड़े गए आतंकियों के बाद से ही पूरे जिले में अलर्ट किया जा चुका है। आईएस मॉड्यूल से जुड़े देवबंदी नेटवर्क को भी देखा जा रहा है। पूरी जानकारी मिलने पर ही आईएस से प्रभावित या संपर्क में रहने वाले युवाओं की खोजबीन तेज हो सकेगी।

डीआईजी कर चुके हैं मंडल में अलर्ट
डीआईजी अशोक कुमार राघव मंडल के तीनों जिलों में अफसरों से खुफिया तंत्र को अलर्ट रहने के निर्देश दे चुके हैं। उन्होंने यहां तक चेताया है कि सोशल साइटों पर भी निगरानी रखकर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं। इसके अलावा आतंकी या अन्य किसी भी संदिग्ध गतिविधियों और लंबे समय से लापता युवाओं और अन्य लोगों को चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं।

संदिग्धों की दें सूचना:एसएसपी
आईएस से प्रभावित या उसके संपर्क में आने वाले युवाओं के बारे में अभी अधिकृत रूप से तो सूचनाएं नहीं मिली हैं लेकिन रुड़की में गिरफ्तार आतंकियों के जरिये हो रहे खुलासों और किसी भी रूप से खतरनाक इरादे रखने वाले लोगों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। पुलिस की जनता से अपील है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु और व्यक्ति की जानकारी पुलिस को दें।

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