IS सरगना मौत के मुहाने पर, बुरी तरह है जख्मी
अपनी बर्बर करतूतों के लिए कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) का सरगना अबू बकर अल बगदादी के हवाई हमलों में गंभीर रूप से जख्मी होने की खबरें हैं।
पश्चिमी इराक में अमेरिका की अगुवाई वाले गठबंधन के हवाई हमलों में गंभीर रूप से घायल बगदादी के बचने की उम्मीद बेहद कम बताई जा रही है।
इससे पहले नवंबर और दिसंबर में भी बगदादी के जख्मी होने की अफवाहें उड़ी थीं, मगर वे खबरें इस बार की तरह उतनी सटीक नहीं बताई गई थीं।
ब्रिटिश अखबार गार्जियन के हवाले से एक सूत्र ने दावा किया कि बगदादी पहली बार जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। वह इतना बुरी तरह जख्मी है कि उसके ठीक होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
हालांकि उसकी गैर मौजूदगी के बावजूद उसका संगठन दिन-ब-दिन इराक और सीरिया के बडे़ हिस्से पर अपना कब्जा जमाता जा रहा है।
बचने की उम्मीद कम
सूत्र के मुताबिक बगदादी की हालत इतनी खराब है कि उसके बचने की उम्मीद कम ही है। जिस वजह से आईएस के शीर्ष कमांडरों की बैठक बुलाई गई है।
कहा जा रहा है कि बगदादी की मौत की आशंका को देखते हुए आतंकी कमांडर अपनी इस बैठक में अपना नया सरगना चुन सकते हैं।
एक पश्चिमी राजनयिक और एक इराकी सलाहकार ने भी 18 मार्च को सीरिया सीमा के पास इराक के निनेवेह जिले के अल बाज में 18 मार्च को हुए हवाई हमलों की पुष्टि की।
राजनयिक ने बताया कि जिस वक्त उम्म अल राउस और अल करान गांव के बीच हवाई हमला हुआ, उसी समय वहां से तीन कारों का काफिला वहां से गुजर रहा था।
यह हमला आईएस के स्थानीय कमांडर को समझकर किया गया था, मगर हकीकत यह थी कि उन तीन कारों में से एक में बगदादी भी था। वहीं इराकी अधिकारी हिशाम अल हाशमी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बगदादी भी उस हमले में जख्मी हो गया था।
सिर पर है एक करोड़ डॉलर का इनाम
1971 में इराक के समारा में जन्मा
अबू बकर अल बगदादी पीएचडी है। बगदादी का झुकाव शुरू से ही जिहाद की ओर रहा।
2011 में अमेरिका ने बगदादी के सिर पर एक करोड़ डॉलर (करीब 60 करोड़
रुपये) के इनाम का ऐलान किया था।
अल बाज को बगदादी ने बनाया था ठिकाना
बगदादी आईएस के कब्जे वाले मजबूत गढ़ मोसुल से करीब 200 मील की दूरी पर अल बाज में काफी समय बिताता रहा है। क्योंकि वह जानता है कि अमेरिका को यहां उसके सटीक ठिकाने की भनक तक नहीं लगने पाएगी।
अल बाज एक सुन्नी बहुल इलाका है। तानाशाह सद्दाम हुसैन के जमाने से यह इलाका राज्य के सीधे नियंत्रण से काफी दूर रहा है। 2004 से यह आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।
आईएस से पहले अल कायदा के आतंकी इस इलाके का इस्तेमाल अमेरिकी निगरानी से बचने के लिए धड़ल्ले से करते रहे हैं। यहां के ज्यादातर लोग सीरियाई सीमा पर तस्करी का भी काम करते हैं।