आतंक की ऐसी कहानी पहले कभी नहीं सुनी होगी!
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आईएसआईएस के आतंकी किस तरह बच्चों को आत्मघाती हमलावर बना रहे हैं इस बात का खुलासा किया है उनकी कैद से छूटे एक नाबालिग लड़के ने।
उसने जो कहानी सुनाई है वह किसी का भी दिल दहला देने के लिए काफी है। इस खबर के सामने आने के बाद से इस लड़के के साहस की हर ओर तारीफ हो रही है।
उसैद नाम के इस लड़के ने बताया है कि आतंकवादी जबरदस्ती बच्चों को आत्मघाती हमलावर बना रहे हैं। उसने बताया कि इंकार करने पर तुरंत मारने की धमकी दी जाती है।
14 साल के उसैद ने बताया है कि ब्रेनवाश से यदि काम नहीं चलता तो कहा जाता है कि या तो अभी मरो वरना फिदाईन बन जाओ।
बचाई मासूम लोगों की जान
न्यू यॉर्क टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक 14 साल के उसैद बरहो को फरमान सुनाया गया था एक मस्जिद में धमाका करने का। जब तक वह इन आतंकियों के चंगुल में नहीं फंसा था तब तक वह फुटबॉल खेलता था, जैकी चैन की फिल्में देखता था और नैंसी के गाने सुनता था।
लेकिन सीरिया के रहने वाले इस लड़के की किस्मत में कुछ और ही लिखा था। आतंकी उसे और उसके साथी लड़कों को अपने साथ ले गए। सभी जानते थे कि इंकार का मतलब क्या है इसलिए किसी ने कोई विरोध भी नहीं किया।
उसे कहा गया कि वो या तो फिदाईन बन जाए और जन्नत में जाए अन्यथा उसे तुरंत गोली मार दी जाएगी। उसने फिदाईन बनना मंजूर किया लेकिन उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।
उसने जो प्लान बनाया उसने उसकी तो जान बचा ही ली साथ ही कई मासूम लोगों को भी जानें बच गईं। उसने आत्मघाती हमलावर बनना इसलिए मंजूर किया ताकि वह उनके चंगुल से आजाद हो सके।
उसैद ने किया ये काम और बच गया
आईएस के आतंकियों ने उसे वह जैकेट पहनाई जिसमें विस्फोटक लगा था। उसे बस एक बटन दबाना था और इराक की शिया मस्जिद में धमाका हो जाता, बर्बादी का मंजर चारों ओर होता।
लेकिन उसैद मरना नहीं चाहता था, वह तो डॉक्टर बनना चाहता था। उसने मस्जिद के पास खड़े सुरक्षाकर्मियों को इशारे से अपनी बात समझाई और मदद मांगी।
इसके बाद इराक के सैनिक हरकत में आए और सावधानी से उसके जिस्म से वह जैकेट अलग की। इससे ना सिर्फ उसैद की जान बची बल्कि वहां मौजूद बाकी लोग भी बच गए।
उसने बताया है कि आईएस के पास ऐसे तमाम लड़के हैं जिनको बरगलाया जा रहा है और ब्रेन वॉश किया जा रहा है। इन लड़कों को जिहाद के नाम पर मरने के लिए तैयार किया जा रहा है।