शक्तिशाली देशों के बीच हितों का टकराव जारी
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पेरिस में आईएस हमले के बाद छिड़ी जवाबी कार्रवाई में फ्रांस ने सीरिया में तीसरे दिन भी हवाई हमले जारी रखे और परमाणु हथियारों से लदा जहाजी बेड़ा फारस की खाड़ी से रवाना कर दिया। हाल ही में रूसी विमान को मार गिराने की पुष्टि होते ही मास्को ने भी सीरिया पर हवाई हमले बोल दिए हैं। फ्रांस की कार्रवाई को ब्रिटेन ने भी समर्थन दिया है। उधर, सीरिया में रूसी हमलों पर विरोध जताने वाला अमेरिका भी फिलहाल अपने देश में होने वाले हमलों की खुफिया रिपोर्ट को लेकर आशंकित है। सभी देश आईएस से निबटने की बात कर रहे हैं लेकिन हितों का टकराव उन्हें रोक भी रहा है।
ऐसे जमीं आईएस की जड़ें
1971 से सीरिया में राष्ट्रपति बशर-अल-असद सत्तारूढ़ हैं।
1963 से देश में चल रहा है असद की बाथ पार्टी का शासन।
2011 में अरब क्रांति शुरू, असद से पद त्याग की मांग।
2011 में ही सीरियाई सेना ने विद्रोहियों पर गोलियां चलाईं।
2013 के बाद 65 फीसदी भूमि पर कट्टरपंथियों का शासन।
कैसे आतंकियों के पनपने की हुई शुरुआत?
आतंकी गुटों का संघर्ष
जिब्हतुन्नुस्रा गुट- पश्चिमोत्तर में कार्यरत गुट, सामूहिक रूप से सिर कलम करने में माहिर, तुर्की और सऊदी अरब देते हैं सैन्य प्रशिक्षण।
फ्री सीरियन आर्मी- आर्मी को रूस ने मदद का प्रस्ताव दिया, जिसे ठुकरा दिया गया, गुट को अमेरिका व पश्चिमी देशों का समर्थन।
आईएसआईएल- विदेश समर्थित आतंकवादी गुट है जो बेरहमी से कत्ल करने में दक्ष है, यह गुट स्थानीय कुर्द लोगों से संघर्षरत है।
तकफीरी गुट- कुबानी शहर के कुछ जवानों ने आईएसआईएल से संघर्ष करने के लिए यह गुट बनाया, क्रूरतम हत्याओं में महारत है।
सफेद कफन- उत्तरी सीरिया में सक्रिय इस गुट के आतंकी अन्य गुटों के लड़ाकों को मारकर सफेद कफन में लपेट देते हैं।
सीरिया पर बंटी दुनिया
- राष्ट्रपति के समर्थन में रूस कर रहा है सीरियाई विद्रोहियों पर हमले।
- असद के विरोधियों का पक्ष में खड़ा है अमेरिका और यूरोपीय संघ।
- अरब संघ ने सीरिया को संघ से निकालकर विद्रोहियों को जगह दी।
- असद को समर्थन देते हुए ईरान देता है अरबों डॉलर की सहायता।
- यूरोपीय संघ असद पर बंटा, स्पेन पक्ष में, ब्रिटेन-फ्रांस विरोध में।
सीरियाई बच्चे बुरी तरह प्रभावित
42.90 लाख बच्चे बेघर हुए।
11 में से हर तीसरा बच्चा हत्या का शिकार।
20 लाख बच्चे हैं कुपोषण का शिकार।
75 फीसदी बच्चे अनाथ हो चुके हैं।
07 हजार बच्चे हुए मौत का शिकार।
महाशक्तियों की स्थिति
रूस- सीरिया में अपने हितों की सुरक्षा के लिए असद सरकार को वैश्विक विरोध के बावजूद हथियार देना जारी रखा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी असद के खिलाफ प्रस्ताव को रूस ने रोक दिया। रूस ने पिछले माह असद सरकार के विरोधियों पर बमबारी भी की।
अमेरिका- सीरिया में बड़े पैमाने पर हिंसा के लिए अमेरिका असद सरकार को जिम्मेदार मानता है। अमेरिका यहां के मुख्य विपक्षी गठबंधन को समर्थन देता है और उदार विद्रोहियों को सीमित संख्या में हथियार देता है। अमेरिका असद से गद्दी छोड़ने की मांग कर रहा है।
सऊदी अरब- सुन्नी बहुल इस खाड़ी देश का स्पष्ट कहना है कि किसी भी समाधान में राष्ट्रपति असद हिस्सा नहीं ले सकते हैं और उन्हें तुरंत सत्ता से हटा देना चाहिए। सऊदी अरब सीरिया के कट्टरपंथी संगठनों को सैन्य व आर्थिक मदद भी देता है।
तुर्की- तुर्की सरकार मानती है कि ऐसे तानाशाह को सहन करना असंभव है जिसकी वजह से साढ़े तीन लाख लोगों की मौत हुई है। हाल ही में तुर्की ने अपने एयर बेस को सीरिया के खिलाफ बमबारी के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत दी है।
ईरान- सीरियाई राष्ट्रपति असद और उनकी सरकार को बनाए रखने के लिए ईरान अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। वह असद सरकार को रियायती दरों पर हथियार, सैन्य सलाह, पैसा और तेल भी मुहैया करा रहा है।