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इशरत जहां: राजेंद्र कुमार के खुफिया इनपुट पर उठे सवाल
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
Updated Sun, 14 Jul 2013 10:49 AM IST
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इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर मामले में फंसे आईबी के संयुक्त निदेशक राजेंद्र कुमार की गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश के खुफिया इनपुट पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
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इशरत फर्जी एनकाउंटर के साथ सादिक जमाल मुठभेड़ की जांच कर रही सीबीआई को ऐसे पुख्ता सुराग मिले हैं जिनसे राजेंद्र का यह इनपुट किसी खास मकसद के दिया गया प्रतीत हो रहा है।
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उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों की मानें तो सादिक के फर्जी एनकाउंटर के तार अंडरवर्ल्ड से जुड़े हैं।
राजेंद्र कुमार ने ही गुजरात की आईबी शाखा की अगुवाई के दौरान अक्तूबर 2002 को खुफिया जानकारी दी थी कि सादिक जमाल लश्कर-ए-ताइबा का आतंकवादी है और मुख्यमंत्री मोदी की हत्या के लिए तैयार बैठा है।
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सीबीआई के मुताबिक यही इनपुट 3 जनवरी 2003 को सादिक की कथित हत्या का कारण बना।
गौरतलब है कि इसके एक साल बाद राजेंद्र कुमार ने इशरत जहां और उसके तीन साथियों के बारे में भी ठीक इसी तरह की खुफिया जानकारी दी थी।
उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों ने बताया कि सादिक 19 दिसंबर 2002 को अपनी गिरफ्तारी से करीब पांच महीने पहले दुबई से नौकरी कर वापस आया था। वह दुबई में अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के खास छोटा शकील के रिश्तेदार के यहां काम करता था।
इस मामले में दायर चार्जशीट में सीबीआई ने कहा है कि वहां सादिक का सलीम चिकलूंन नाम के दाउद के गुर्गे से झगड़ा हो गया था।
सूत्रों के मुताबिक यह बात भी सामने आई कि सादिक उस परिवार की किसी महिला से अभद्र व्यवहार किया था। सीबीआई ने इस बात को रिकॉर्ड नहीं किया है। उस झगड़े की सुलह सफाई के बाद सादिक भारत वापस आ गया।
सूत्रों के मुताबिक उस झगड़े के बाद से ही दाउद के लोगों ने सादिक को मारने का फैसला कर लिया था। दुबई की सख्त कानून की वजह से उसे दुबई में छोड़ दिया गया। सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि इस घटना से राजेंद्र की खुफिया जानकारी का किस हद तक संबंध है।
सीबीआई को दर्ज कराए गए बयान में गुजरात पुलिस और महाराष्ट्र स्टेट आईबी के चार अधिकारियों ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कहा है कि सादिक के बारे में राजेंद्र का इनपुट गलत था।
महाराष्ट्र आईबी के अधिकारी अभय गोपीनाथन ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा है कि राजेंद्र के इनपुट पर मुंबई पुलिस के चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट ने सादिक को मुंबई के अंधेरी पश्चिम से गिरफ्तार किया था।
आईबी के कई अधिकारियों ने सादिक से पूछताछ की और इस नतीजे पर पंहुचे कि सादिक का किसी वीवीआईपी को मारने का कोई इरादा नहीं है।
यह जानकारी आईबी के दिल्ली मुख्यालय भी भेजी गई, लेकिन राजेंद्र ने 3 जनवरी 2003 को गुजरात पुलिस के डीएसपी तरुण बरोट को मुंबई भेज कर सादिक को गांधीनगर बुलवा लिया।
गोपीनाथन के मुताबिक दस दिनों बाद उसने टीवी पर देखा कि गुजरात पुलिस ने सादिक का एनकाउंटर कर दिया।