खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों पर है आईएस की नजर
अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय मुसलमानों को शामिल करने की मुहिम में लगा है।
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मुस्लिम जनसंख्या वाले भारत से नगण्य बहाली से चिंतित आईएस के गुर्गे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, कुवैत और यमन जैसे देशों में सालों से रह रहे भारतीयों को इस्लाम को मजबूत करने के नाम पर रिझा रहे हैं।
इसी झांसे में आई हैदराबाद की महिला अफशा जबीन को वापस भेजने के बाद यूएई ने चार और भारतीयों को प्रत्यर्पित किया है।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को भारत पहुंचे ये चारों मुस्लिम युवक केरल के कोझीकोड और तिरुवनंतपुरम के रहने वाले हैं।
सूत्रों ने बताया कि वहां चार और मुस्लिम युवकों की पहचान की गई है जो आईएस की तरफ आकर्षित हैं। दरअसल ये आठों युवक सीरिया में मौजूद एक उत्तर भारतीय और एक बांग्लादेशी के संपर्क में थे।
यूएई ने केरल के चार और युवकों का किया प्रत्यर्पण
हालांकि उस बांग्लादेशी की कुछ दिनों पहले मौत हो गई है। आईएस की विश्वव्यापी गतिविधि पर नजर रख रही एजेंसी के अधिकारी ने बताया कि भारत के मुफ्ती और उलेमाओं की ओर से आईएस को गैर इस्लामिक करार दिए जाने के बाद उसके गुर्गे विदेशों में 10 -15 साल से रह रहे मुस्लिम भारतीयों की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि इसकी काट की कोशिश में उलेमाओं के आईएस के गैर इस्लामिक करार दिए जाने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का हिस्सा बनाया जाएगा।
मोदी इस महीने के आखिरी हफ्ते में अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक यूरोप से आईएस में सबसे ज्यादा भर्ती हो रही है। इस वजह से यूरोप के कई देशों के लिए यह चिंता का बड़ा विषय बना हुआ है।