ऐसी होगी बीजेपी के भावी कोर ग्रुप की तस्वीर?
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मतगणना शुरू होने और नतीजे आने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की गतिविधियां बढ़ गई हैं।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने बुधवार शाम गुजरात के गांधीनगर जाकर लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के साथ मैराथन बैठक की।
मोदी के साथ बैठक के बाद पार्टी राजनाथ ने संवाददाताओं को बताया कि पार्टी की बैठक में विचार-विमर्श के बाद वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर फ़ैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर केंद्र में अगली सरकार मोदी के नेतृत्व में ही बनेगी।
साथ ही उन्होंने कहा है कि वह 17 मई को पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाने वाले हैं, जिसमें शामिल होने मोदी दिल्ली पहुंचेंगे।
बैठकों का दौर जारी
इसके पहले गडकरी पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मिले थे। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी से भी गडकरी की मुलाक़ात हुई है।
बुधवार को सुषमा स्वराज के भोपाल रवाना होने से पहले राजनाथ ने उनके निवास स्थान पर उनसे मुलाक़ात की। पूरे मीडिया में ख़बरें हैं कि गडकरी ने पार्टी के इन वरिष्ठ नेताओं को आने वाले समय और सरकार में उनके भविष्य को लेकर आश्वस्त किया।
पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से पार्टी नेता सक्रिय रहे हैं, उसे विश्लेषक आने वाले समय में भाजपा के कोर ग्रुप की तस्वीर के तौर पर देख रहे हैं।
बनाई जा रही रणनीति
राजनाथ इस समय पार्टी के अध्यक्ष हैं। गडकरी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष हैं और इस समय पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच संदेश वाहक की भूमिका निभाते नज़र आ रहे हैं। वहीं जेटली को मोदी का विश्वस्त और मुख्य रणनीतिकार माना जाता है।
राजनाथ सिंह ने कई केंद्रीय नेताओं के विरोध को दरकिनार करते हुए नरेंद्र मोदी को पहले चुनाव समिति का प्रभारी और फिर प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था।
उसके बाद से वह हर मौक़े पर मोदी के साथ खड़े नज़र आए हैं। नितिन गडकरी आरएसएस के विश्वस्त माने जाते हैं और उसी के हस्तक्षेप पर उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
भविष्य पर सवाल
इन दोनों के अलावा अरुण जेटली भी मोदी के नज़दीक़ी माने जाते हैं। अमृतसर में जेटली के चुनाव लड़ने के दौरान भाजपा के सहयोगी अकाली दल ने उन्हें मोदी सरकार में वित्त मंत्री बनाए जाने की चर्चा भी शुरू कर दी थी।
इस भावी कोर ग्रुप का एक और सदस्य अमित शाह को माना जा रहा है। उन्हें मोदी का दाहिना हाथ माना जाता है। वह फिलहाल भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी हैं। उत्तर प्रदेश की ज़िम्मेदारी संभालने के बाद वह लगातार वहाँ बने रहे।
उत्तर प्रदेश में भाजपा ने उनके ही नेतृत्व में चुनाव लड़ा है। टीवी चैनलों पर दिखाए गए एग्ज़िट पोल के नतीजों में भाजपा को उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड सीटें मिलने की बात कही गई है। अगर ऐसा हो जाता है तो निश्चित तौर पर पार्टी में अमित शाह का क़द बढ़ जाएगा।
मोदी बारह मई से ही गांधीनगर में जमे हुए हैं। वह वहीं पर नेताओं से मिल रहे हैं और लगातार बैठकें कर रहे हैं।
भावी रणनीति पर चर्चा
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही भाजपा नेताओं ने सरकार बनाने की क़वायद तेज़ कर दी है। राजग के संभावित साथियों से मेल-मुलाक़ात का दौर तेज़ हो गया है।
वहीं मीडिया के कुछ हलकों में तो नई बनने वाली कैबिनेट की तस्वीर भी दिखाई जाने लगी है। यहां तक बताया जा रहा है कि किस नेता को कौन सा विभाग मिलेगा।
लगातार मीडिया में जारी इन चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने संवाददाताओं से कहा कि वह 'लंबे समय से राजनीति में हैं लेकिन सरकार बनाने की इतनी जल्दी कभी नहीं देखी, जितनी की भाजपा नेता कर रहे हैं'।
इस बीच बुधवार को आए एनडीटीवी के एग्ज़िट पोल के मुताबिक़ भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को 279 सीटें, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए को 103 सीटें और अन्य दलों को 161 सीटें मिलने के आसार हैं।