स्मृति के मंत्रालय में अफसरों की 'भगदड़', कुछ तो है गड़बड़
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मोदी सरकार में 11 महीनों से मानव संसाधन विकास मंत्रालय संभाल रही स्मृति ईरानी के कामकाज आमतौर पर उंगली उठती रही है। वे गोवा के स्टोर की गड़बड़ी पकड़ने में तो कामयाब रहीं लेकिन अपने कामकाज की गड़बड़ी आज तक नहीं पकड़ पा रही हैं।
स्मृति ईरानी के मातहत एक और संयुक्त सचिव ने गुरुवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय छोड़ दिया। पिछले 11 महीनों में मानव संसाधन विकास मंत्रालय छोड़ने वालीं वह पांचवी सचिव स्तर की अधिकारी हैं। मोदी सरकार के किसी और मंत्रालय में अधिकारियों के छोड़ने की दर ऐसी नहीं है, जैसी की मानव संसाधन विकास मंत्रालय की है।
संयुक्त सचिव (माध्यमिक शिक्षा) राधा एस चौहान मानव संसाधन विकास मंत्रालय छोड़कर आधार कार्ड पर काम कर रहे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण में शामिल हो गई हैं।
मंत्रालय में खुश नहीं थीं राधा एस चौहान
मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राधा एस चौहान का पांच साल कार्यकाल पूरा भी नहीं हो पाया था। उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी ने अपनी इच्छा से मंत्रालय छोड़ा।
हालांकि इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संभवतः वह मंत्रालय में कई कारणों से खुश नहीं थी। उन्हें राज्य स्तर के एक मानव संसाधन विकास मंत्री के लिए शास्त्री भवन में आवंटित अपना कमरा छोड़ना पड़़ा था। वह इससे भी काफी नाखुश थी।
हालांकि चौहान से मंत्रालय से छोड़ने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। चौहान से पहले संयुक्त सचिव स्तर के तीन और अधिकारी वीना ईश, जगमोहन राजू, प्रवीण प्रकाश मंत्रालय से तबादला ले चुके हैं।
स्मृति के मंत्रालय में कुछ तो गड़बड़ है!
ईश और राजू का तबादला अन्य राज्यों के कैडर में किया गया, जबकि प्रकाश को वैंकैया नायडू के शहरी विकास मंत्रालय में भेजा गया। माना जा रहा है कि मंत्रालय के अधिकांश तबादले रूटीन किस्म के थे, हालांकि इकोनॉमिक टाइम्स का कहना है कि दो ऐसे मामले रहे, जिनसे लगा कि मंत्रालय में कुछ गड़बड़ है।
पिछले महीने मंत्रालय ने नागेश सिंह को 'सरेंडर' कर स्टेट कैडर में वापस भेज दिया। नागेश इकोनॉमिक सर्विस के अधिकारी थे। अमरजीत सिन्हा से तकनीकी शिक्षा का प्रभार वापस ले लिया गया। उन्हें सांख्यिकी विभाग में भेज दिया गया, जो उनके पुराने विभाग से दोयम स्तर की जिम्मेदारी थी।
नागेश सिंह को क्यों स्टेट कैडर में वापस भेजा गया, ये तो पता नहीं चला, हालांकि सिन्हा के मामले में कहा जा रहा है कि उनके और ईरानी के बीच में कई संस्थानों के प्रमुखों की नियुक्ति पर मतभेद थे।
यूं ही छोड़ते रहे अधिकारी तो वादों का क्या होगा?
ईकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, नागेश सिंह को बरकरार रखने के लिए स्कूली शिक्षा सचिव वृंदा स्वरूप ने कैबिनेट सचिव अजीत सेठ और प्रधानमंत्री कार्यालय में मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्रा से भी मुलाकात की थी। उन्होंने सिंह तबादले पर लिखित आपत्ति जताई थी।
यूपीए सरकार में गृह सचिव रह चुके वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जीके पिल्लई कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय में अधिकारियों को तेजी से तबादला सामान्य नहीं है। ऐसे तबादलों से मंत्रालय का कामकाज भी प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी किसी भी मंत्रालय के कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। एक मंत्रालय में वह पांच साल तक रहता है और उसके कामकाज से बखूबी वाकिफ होता है। उसे हटाकर आप किसी और को लाते हैं तो 6 महीने उसे अपना कामकाज समझने में लग जाता है।