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जसवंत के तल्ख सुर, कांग्रेस जैसा हो जाएगा भाजपा का हश्र

Mon, 24 Mar 2014 09:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/जयपुर
अमर उजाला ब्यूरो/जयपुर Updated Mon, 24 Mar 2014 09:00 AM IST
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Is politics a sale, me and my son is not salable

एनडीए सरकार में केन्द्रीय मंत्री सहित कई बड़े पदों पर रह चुके जसवंत सिंह को उनकी इच्छानुसार बाड़मेर लोकसभा सीट से टिकट नहीं मिला, जिससे भाजपा की राजनीति गर्मा गई है। जसवंत सिंह के समर्थकों ने उनके नाम से नामाकंन फॉर्म ले लिया है।

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इससे उनके निर्दलीय चुनाव लडऩे की अटकलें जोर पकड़ती जा रही हैं। ऐसे माहौल के बीच वे शनिवार को जोधपुर पहुंचे। उन्होंने कहा कि 24 मार्च तक वे बाड़मेर पहुंचकर आगे की रणनीति के बारे में तय करेंगे।
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अमर उजाला ने इस मौके पर उनसे बातचीत की, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुखी मन से बात कर रहा हूं...

'जो कुछ मन में था, उन्हें भाजपा अध्यक्ष को बता दिया'

Is politics a sale, me and my son is not salable

प्रश्‍नः भाजपा के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद आपकी इच्छानुसार बाड़मेर सीट से आपको टिकट नहीं मिला। ये सब कैसे...?

उत्‍तरः भाजपा अब पहले वाली भाजपा नहीं रही है। बीजेपी में स्वार्थ भरे विचारों का अतिक्रमण हो चुका है। मेरी बड़ी इच्छा थी कि मैं बाड़मेर से लोकसभा चुनाव लड़ूं। इस इच्छा को मैंने जाहिर भी कर दिया था, लेकिन मुझे टिकट नहीं मिला। मन दुखी है और आपसे दुखी मन से ही बात कर रहा हूं।

प्रश्‍नः आपकी भाजपा आलाकमान या मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से कोई शिकायतें?

उत्‍तरः शिकायतों के बारे में क्या कहूं, जो कुछ मन में था, उन्हें भाजपा अध्यक्ष राजनाथ जी को जाहिर कर चुका हूं। राजनाथ सिंह को फोन कर अपनी नाराजगी जताई थी और टिकट वितरण पर पुनर्विचार की मांग की थी, लेकिन उन्होंने साफ बोला था कि अब कोई विचार नहीं होगा। वसुंधरा राजे से परिचित हुए तीस वर्ष हो गए। उन्होंने मुझे कोई कष्ट नहीं दिया। जब टिकट देने से पहले ही उन्होंने मुझसे कोई बात नहीं की, तो मैं अब उनसे क्या बहस करूं।

'ऐसे-ऐसे, कैसे-कैसे हो गए'

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प्रश्‍नः जो होना था, वो हो गया। अब आपके मन में क्या विचार आ रहे हैं?

उत्‍तरः
एक कवि सम्मेलम में रोचक बात कही गई थी, वही आपको सुना देता हूं...
'ऐसे-ऐसे, कैसे-कैसे हो गए, कैसे-कैसे, ऐसे-ऐसे हो गए....'
अब आपने इन पक्तियों से मेरे मन की पीड़ा भी जान ली होगी और मेरे विचारों के बारे में भी आपने जान लिया होगा।

प्रश्‍नः अब आगे क्या...?
उत्‍तरः अब जोधपुर से कल बाड़मेर के लिए निकलूंगा। वहां पहुंचकर विचार करूंगा। जनभावनाओं को समझूंगा, तब फैसला करूंगा।
हां, 24 को आमसभा के बाद जरूर कुछ तय कर लूंगा और आप लोगों को जानकारी भी दूंगा।

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'भाजपा का हाल कांग्रेस जैसा न हो जाए'

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प्रश्नः कहीं आप इस सीट से निर्दलीय खड़े न हो जाएं, यह सोचकर भाजपा आपको कोई उचित पद देने या फिर आपके पुत्र मानवेन्द्र सिंह को मंत्री बनाने जैसे प्रलोभन दे रही है।

उत्तरः इस बात का मुझे खेद है कि अब राजनीति में हर चीज सौदेबाजी हो गई है। मैं और मेरा बेटा बिकाऊ नहीं हैं। देश में ऐसे सौदे करके कांग्रेस का बुरा हाल हो चुका है। अब भाजपा भी इसी राह पर चलने लगी है। ऐसे विचारों के साथ चलकर कहीं भविष्य में भाजपा का हाल कांग्रेस जैसा न हो जाए।

प्रश्‍नः बाड़मेर सीट से टिकट पानेवाले कर्नल सोनाराम कह रहे हैं कि वे व्यक्तिगत तौर पर आपसे मिलेंगे और मना लेंगे?

उत्‍तरः आज तक तो कर्नल सोनाराम ने मुझसे सम्पर्क नहीं किया। अब वे क्या बात करेंगे। उनकी यह बात अतिश्योक्ति लगती है।

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