तो क्या सन 1949 तक जिंदा थे नेताजी सुभाषचंद्र बोस?
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का राज अब और भी गहराता जा रहा है। पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने इस शुक्रवार नेताजी से संबंधित जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कही है।
ये फाइलें मंगलवार को कोलकाता के राइटर्स बिल्डिंग डिजिटलाइजेशन के लिए पहुंची। लेकिन इन फाइलों में मौजूद कुछ डॉक्यूमेंट नेताजी की प्लेन क्रैश की वजह से हुई मौत की बात पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं।
यह भी संभव है कि इन फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद 1945 में ताइपेई के विमान दुर्घटना में मौत हुई या नहीं हुई, इस पर फिर से बहस ताजा हो जाए।
ये मानना था अमेरिका का
इन फाइलों के मुताबिक ब्रिटेन और अमेरिका की इंटेलीजेंस एजेंसियों का यह कहना था कि 1948-49 के दौरान नेताजी जिन्दा थे और दक्षिण पूर्व एशिया में कम्युनिस्ट विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
सूत्रों के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग के आह्यू हियन कुआन ने अमिय को एक पत्र लिखा था। उन्होंने 1948 में नेताजी के भतीजे अमिय नाथ बोस को भी यही जानकारी दी थी।
लेकिन यह पत्र नेताजी के भतीजे तक पहुंचने से पहले एल्गिन रोड स्थिन पोस्ट ऑफिस पर इंटेलीजेंस के हाथ लग गया। जिसमें लिखा था कि 'मुझे खेद है कि मैं वह समाचार नहीं ढूंढ़ पा रहा हूं जिसमें नेताजी के चीन में होने की खबर है, लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि वो अभी भी जिन्दा हैं।'
सही समय का कर रहे थे इंतजार!
इन फाइलों की कुल संख्या लगभग 64 के करीब है जो 1937 से 1947 के वर्षकाल के हैं। इनमें से कई फाइलों में 300 पन्ने तक है, जिनमें कुछ हाथों से भी लिखे हुए हैं।
इन फाइलों में नेता जी और उनके बड़े भाई शरत चंद्र बोस की निजी बातचीत भी शामिल है। नेताजी के भाषणों को ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसियां विश्लेषित करती थी, इन फाइलों में ये विश्लेषण भी शामिल हैं।
इन फाइलों के मुताबिक ब्रिटिश और अमेरिकन इंटेलिजेंस एजेंसियों का मानना था कि नेताजी वो किसी ट्रेनिंग के तहत रुस के में हैं ताकि वे भी माओ या टीटो की तरह उभर सकने में सक्षम हों।
ब्रिटिश सरकार इस बारे में भी काफी चिंतित थी कि नेताजी जिंदा हैं और सही समय का इंतजार कर रहे हैं वहीं सुरक्षा एजेंसियां नेताजी की मौत को पुष्ट करने में असफल रहीं। सरकारी अधिकारी के मुताबिक ब्रिटेन का मानना था कि नेताजी चीन अथवा रुस की ओर भाग गए हैं।