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रेलवे के निजीकरण पर क्या आधा सच बोल रहे हैं मोदी?

Thu, 25 Dec 2014 07:18 PM IST
Updated Thu, 25 Dec 2014 07:18 PM IST
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Is Narendra Modi telling a lie on Privatisation

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे के निजीकरण से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। वाराणसी के डीजल रेलवे कारखाने (डीरेका) में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए मोदी ने कहा कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा, हालांकि बाहर से पैसा आएगा जो रेलवे की सेहत सुधारेगा, फिर वो चाहे डॉलर हो या येन। मोदी ने ऐसा बोलकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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रेलवे अपनी हालात सुधारने के लिए निवेश की योजनाओं का खाका तैयार कर रहा है, जिसमें देशी और विदेशी पैसा रेलवे के खजाने में आएगा। केंद्र सरकार ने एफडीआई और पीपीपी मॉडल के जरिए रेलवे का कायाकल्प करने की तैयारी कर रखी है। ऐसे में मोदी के बयान से सवाल यह उठता है कि क्या वह निजीकरण के मसले पर झूठ बोल रहे हैं।
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अगर मोदी की बात मान भी लेते हैं कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा, लेकिन मोदी जिस विदेशी पैसे के डॉलर और येन के जरिए आने की बात कर रहे हैं वो किस मद में आएगा यह अभी भी पूरी तरह से साफ नहीं है। ऐसे में जब रेलवे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी जा चुकी है तब निजीकरण न लाने की बात करना थोड़ा बेइमानी लगता है।

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रेलवे यूनिवर्सिटी और रोजगार की बात भी नहीं जमी

Is Narendra Modi telling a lie on Privatisation

मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र में बोलते हुए देश में चार रेल यूनिवर्सिटी खोले जाने की बात कही है। अगर इन यूनिवर्सिटी को खोले जाने पर आज से भी काम शुरू हो जाता है तो इसे अमलीजामा पहनाते पहनाते काफी साल बीत जाएंगे। तब तक केंद्र में किसकी सरकार होगी यह भी कोई नहीं जानता।

इन यूनिवर्सिटियों में कौन पढ़ेगा और कैसे पढ़ेगा यह तो बात की बात है अहम बात यह है कि जब रेलवे के पास पैसा नहीं है तो इन यूनिवर्सिटियों के लिए पैसा कहां से आएगा। क्या फिर उसके लिए भी एफडीआई की अनुमति दी जाएगी और दी जाएगी तो कितने फीसदी। फिर उसे भी निजीकरण माना जाएगा या नहीं। यह अहम सवाल है।

मोदी ने यहां पर रेलवे में अपार संभावनाओं की भी बात की है। उन्होंने कहा कि रेलवे में रोजगार की संभावनाएं असीमित है और नए रोजगारों का सृजन किया जाएगा। जबकि हकीकत यह है कि रेलवे में अभी भी हजारों की संख्या में बैकलॉग भर्तियां इंतजार कर रही हैं। ऐसे में जब पहले से ही लंबित भर्तियों को पूरा नहीं किया जा पा रहा है तो नए रोजगार सृजन का तो सवाल ही नहीं उठता है।

मोदी के निजीकरण न लाने का क्या है मर्म

Is Narendra Modi telling a lie on Privatisation

मोदी ने जिस अंदाज में रेलवे के निजीकरण की अफवाहों को खारिज किया है उसमे भी एक मर्म छिपा हुआ है। कुछ जानकारों का कहना है निजीकरण का तात्पर्य मालिकाना हक से होता है। 49 फीसदी एफडीआई की मंजूरी को निजीकरण के बजाए उदारीकरण की संज्ञा दी जा सकती है।

जानकार बतलाते हैं कि निजीकरण का सीधा सीधा मतलब मालिकाना हक निजी हाथों में चले जाना होता है। ताजा नियमों के तहत ऐसा नहीं हो रहा है, इसीलिए मोदी कह रहे हैं कि रेलवे का निजीकरण नहीं होगा।

रेलवे में जिस मद में एफडीआई को मंजूर मिली है वो बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने के लिए बनाई जाने वाली विशेष कम्पनियों के लिए है। ऐसी कम्पनियां सुविधाएं विकसित कर हट जाएंगी। इसके लिए एक निश्चित रकम का भुगतान होगा। रेलवे के निजीकरण का मतलब परिचालन व्यवस्था पूरी तरह से निजी हाथों में सौपना है, जैसा हो नहीं रहा है।

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