मोदी को थर्ड फ्रंट से लगा करंट, बोला हमला
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आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे के खिलाफ सारे हथियार आजमाने की तैयारी कर रही हैं, लेकिन इस बीच हर बार की तरह इस दफा भी चुनावों से ठीक पहले तीसरे मोर्चे ने सिर उठाना शुरू कर दिया है।
तीसरा मोर्चे के बैनर तले गैर-भाजपा और गैर-कांग्रेसी दल एकजुट होने की तैयारी कर रहे हैं। इस मोर्चे को लेकर बुधवार को एक अहम बैठक हुई। इस बैठक ने कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों को परेशान कर दिया।
परेशानी इस कदर कि अब तक अपने हमलों का रुख कांग्रेस और केवल कांग्रेस की तरफ रखने वाले भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी आज कोलकाता में चुनावी रैली कर रहे थे, तो उनके दिमाग में कांग्रेस के साथ-साथ तीसरा मोर्चा भी खूब था।
कांग्रेस से छिटका वोटर जाएगा कहां?
अगर यह सवाल खड़ा हुआ कि कांग्रेस पर आक्रामक रुख दिखाने वाले गुजरात के नरेंद्र मोदी क्या थर्ड फ्रंट को लेकर क्या घबरा गए हैं, तो इसकी वजह भी मौजूद हैं। कोलकाता में हुई जनचेतना रैली में उन्होंने सियासी मजबूरियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर नरम रुख बनाए रखा।
लेकिन चुनावों से पहले तीसरा मोर्चा बन रहा है और मोदी ने इस बात पर पर्याप्त गौर किया। शायद उनकी चिंता जायज भी हैं। यह लगभग साफ है कि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को काफी नुकसान हो सकता है और भाजपा फायदे में रहेगी। लेकिन यह भी साफ है कि कुछ राज्यों को छोड़कर भाजपा देश के दूसरे इलाकों में कोई खास मौजूदगी नहीं रखती।
ऐसे में वोटर जाएगा कहां? भाजपा और कांग्रेस से इतर जो दल हैं, वो काफी वक्त से एक साथ मिलकर चुनौती देने का मन बना रहे थे और बुधवार को जब मोदी भाषण दे रहे थे, ठीक उसी वक्त दिल्ली में तीसरा मोर्चा औपचारिक आकार ले रहा था। मोदी को इल्म है कि यह मोर्चा क्या जलवे दिखा सकता है।
मोदी ने किया थर्ड फ्रंट पर हमला
नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत बंगाली भाषा से की और गुरु रबींद्रनाथ टेगोर की 'आमार सोनार बांगला' अवधारणा का जिक्र कर मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की। हमले की शुरुआत कांग्रेस से की, लेकिन जल्द ही अपनी तोप का मुंह तीसरे मोर्चे की ओर घुमा दिया।
भाजपा के पीएम पद के दावेदार ने कहा, "वक्त आ गया है कि तीसरे मोर्चे के विचार को भारतीय राजनीति से हमेशा के लिए विदा कर दिया जाए।" उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में तीसरे मोर्चे से जुड़े दल सत्ता में रहे, वे पिछड़ते चले गए।
कोलकाता में ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित रैली में उन्होंने कहा, "वाम मोर्चे के नेताओं को देखने दीजिए कि हवा किस तरफ बह रही है। भाजपा आगामी लोकसभा चुनावों के बाद सरकार बनाने जा रही है।"
देश को तीसरे दर्जे का मुल्क बनाना चाहता है थर्ड फ्रंट
तीसरे मोर्चे के घटक दलों पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, "चुनावों से ठीक पहले ये सेकुलर की माला जपने लगते हैं। जबकि देख लीजिए कि जहां-जहां इनके दलों ने शासन संभाला है, वहां का क्या हाल हुआ।"
मोदी ने कहा, "तीसरा मोर्चा बनाने के पीछे जो विचार है, वो यह है कि इस देश को तीसरे दर्जे का मुल्क बनाया जाए। पूर्वी भारत के राज्य पिछड़े हैं, क्योंकि यहां तीसरे मोर्चे से जुड़े राजनीतिक दलों ने सत्ता संभाली है।"
गुजरात के सीएम ने कहा, "देश के पश्चिमी छोर पर जो राज्य हैं, वहां आपको विकास दिख जाएगा। लेकिन पूर्व में जहां-जहां ये दल रहे हैं, वहां कोई विकास नहीं हुआ। उन राज्यों को पिछड़ा बनाकर छोड़ दिया।"
मुस्लिमों के बहाने किया हमला
नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब कभी चुनाव आते हैं, तीसरे मोर्चे से जुड़े ये दल गरीब लोगों की बात करने लगते हैं और सेकुलरिज्म की चर्चा पर उतर आते हैं। लेकिन ऐसा सिर्फ चुनावी मौसम में होता है।
उन्होंने कहा, "इन दलों ने कभी इस बात की कोशिश नहीं की कि विकास का फायदा मुसलमानों तक पहुंचे। मुस्लिमों को उन्होंने हमेशा वोटर के रूप में देखा है, जिससे चुनाव में फायदा हो सके।"
मोदी ने दावा किया कि अल्पसंख्यकों की प्रति व्यक्ति आय सबसे ज्यादा गुजरात में है। उन्होंने कहा, "सरकार के लिए मजहब की सिर्फ एक किताब होनी चाहिए। और वो है संविधान है। उसे सिर्फ राष्ट्रवाद में यकीन करना चाहिए।"
कौन-कौन बना रहा तीसरा मोर्चा?
भाजपा के पीएम पद के दावेदार की चिंता जायज है, क्योंकि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे का गठन अब तय समझा जा रहा है। बुधवार को गैर- कांग्रेसी और गैर-भाजपाई 11 दलों ने औपचारिक तौर पर एक गुट बनाकर थर्ड फ्रंट के गठन की ओर संकेत किया।
केंद्र में जन समर्थक, गैर सांप्रदायिक और संघीय सरकार के एजेंडे के आधार पर थर्ड फ्रंट के गठन की कवायद तेज हो गई है। 11 दलों के संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में औपचारिक तौर पर एक नए गुट के गठन की घोषणा की गई। इसमें शामिल दलों में चार वामपंथी पार्टियां, समाजवादी पार्टी, जदयू, एआईडीएमके, एजीपी, झारखंड विकास मोर्चा, जद(एस) और बीजेडी शामिल हैं।
इन दलों की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, एआईडीएमके के नेता एम थंबीदुरई, सीपीएम के बसुदेब अचारिया, जदयू के केसी त्यागी, बीजेडी के जय पांडा, एजीपी के बिरेन बैश्य, सीपीआई के डी राजा, आरएसपी के मनोहर टिर्की, फारवर्ड ब्लॉक के बरुण मुखर्जी और सपा के रामगोपाल यादव मौजूद थे।