क्या ताज के लिए संकट बना 'मोक्षधाम', रिपोर्ट का इंतजार
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आगरा के ताजगंज मोक्षधाम में उठने वाले धुएं से ताजमहल पर हो रहे असर का अध्ययन करने के लिए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विजय पंजवानी ने ताजमहल और मोक्षधाम का निरीक्षण किया।
विकास प्राधिकरण, नगर निगम और क्षेत्र बजाजा कमेटी से दस्तावेज जुटाए। ताज को नुकसान से बचाने के लिए मोक्षधाम को शिफ्ट किया जाए या ग्रीन क्रिमेशन सिस्टम लगाया जाए, इसकी रिपोर्ट कमेटी सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।
पर्यावरणविद् एमसी मेहता ने प्रदूषण की वजह से ताजमहल को हो रहे नुकसान का जिक्र करते हुए मोक्षधाम को यहां से शिफ्ट करने की सिफारिश वर्ष 1996 में की थी। तब से मामला लंबित है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को पत्र लिखा तो मामला फिर सुर्खियों में आया।
अध्ययन करने के लिए आई सुप्रीम कोर्ट की कमेटी
बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के स्टैंडिंग काउंसिल विजय पंजवानी ने मोक्षधाम का निरीक्षण किया। विद्युत शवदाह गृह पर उन्हें सन्नाटा मिला। मोक्षधाम पर क्षेत्र बजाजा कमेटी के कर्मचारियों ने बताया कि यहां प्रतिदिन औसतन 75-100 चिताएं जलाई जाती हैं और तकरीबन 100 टन लकड़ी की खपत होती है। फिर वह ताजमहल गए।
उन्होंने पुरातत्व विभाग के अफसरों से ताज पर होने वाले मडपैक के बारे में जानकारी की। इसके बाद बताया कि ताजमहल के पत्थर चमक खो रहे हैं। पत्थरों का रंग ग्रे होता जा रहा है। कहीं मडपैक की वजह से भी पत्थरों को नुकसान तो नहीं हो रहा है, इसका भी अध्ययन किया जाएगा।
शाम को उन्होंने एडीएम में नगर निगम, एडीए और प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठक की। मोक्षधाम और ताजमहल के आसपास के मानचित्र एकत्रित किए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आगरा प्रभारी वीके शुक्ला, एसीएम द्वितीय अरुण कुमार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दिनेश कुमार और नगर निगम के अभियंता एसपी मिश्रा साथ रहे।
मोक्षधाम और ताजमहल का किया दौरा
विद्युत शवदाह गृह की उपयोगिता बढ़ाओ
एडीए में हुई बैठक में विजय पंजवानी ने कहा कि विद्युत शवदाह गृह के प्रति जनता को जागरूक किया जाए। शिकायत मिली है कि वहां पर्याप्त विद्युत व्यवस्था नहीं है, लिहाजा इसकी पूर्ण व्यवस्था हो। विद्युत शवदाह गृह की उपयोगिता बढ़ेगी, तभी लकड़ी कम जलेगी और प्रदूषण भी कम होगा।
‘पैसा ले रहे हो तो व्यवस्थाएं लचर क्यों’
ताजमहल पर हरियाणा का युवक बेहोश हो गया। उसके आसपास भीड़ लगी रही। तकरीबन बीस मिनट तक डॉक्टर नहीं आए। इस पर अधिवक्ता विजय पंजवानी ने एसएसआई और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर नाराजगी जताई। कहा कि जब पैसा लिया जा रहा है तो व्यवस्थाएं लचर क्यों हैं।
ताज के फाउंटेन बिजली से चलाने पर नाराजगी व्यक्त की। कहा कि मुगलिया तरीके से फाउंटेन चलाएं या वैकल्पिक ऊर्जा का इस्तेमाल करें। विकलांगों को मुख्य गुंबद तक पहुंचाने के लिए रैंप की व्यवस्था न होने पर भी नाराज हुए। इसकी रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।