सीबीआई के खुलासे पर नहीं है भरोसा!
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बदायूं रेप मामले में सीबीआई के ताजा खुलासे ने इस घटना को एक नया मोड़ दे दिया है। सीबीआई मानती है कि उन दोनों लड़कियों को मार के लटकाया नहीं गया था, बल्कि उन्होंने खुदकुशी की थी। यह ताजा खुलासा न तो ग्रामीणों के गले उतर रहा है और न ही उस पुलिस के जो सबसे पहले मौके पर पहुंची थी। यह खुलासा अहम गवाहों समेत, यूपी की एसआईटी टीम, इस मामले के आरोपी और उन डॉक्टरों के भी समझ से परे है जिन्होंने पीडि़ताओं का पोस्टमॉर्टम किया था। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या सीबीआई इस मामले में झूठ बोल रही है? इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने इस पूरे मामले पर गांव जाकर जायजा लिया।
सीबीआई के नए खुलासे के बाद जब संवाददाता मौके पर पहुंचा तो मुख्य आरोपी पप्पू यादव गंगा किनारे अपने तरबूज के खेत में था और उसके साथ उसका बड़ा भाई उर्वेश भी उसके साथ था जो कि इस घटना का दूसरा आरोपी है। लेकिन गांव में रहने वाले हर व्यक्ति यह बता रहा कि किस तरह से सीबीआई पीड़ित और आरोपी के परिजनों को लेकर इस रिपोर्ट में गलत थी, जबकि पीड़िता और आरोपी के परिजन एक दूसरे पर उंगली उठा रहे हैं।
सीबीआई ने जिस तरह से इस घटना को आत्महत्या बताकर कहानी को एक नया मोड़ दिया है उससे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। स्थानीय पुलिस का मानना है कि 28 मई के दिन हादसे के स्थान पर जो कुछ भी हुआ वो आत्महत्या का मामला नहीं हो सकता है। एसआईटी के एक सदस्य ने बताया कि उसने पीडि़ता और आरोपी के बीच ऐसी किसी रिकॉर्डिंग को नहीं सुना जो दोनों में से किसी एक पीड़िता के बीच गहरे संबंध होने का संकेत देती हो।
इस मामले में अहम गवाह ने भी खुद कहा है कि उसने अपना बयान बदला है कि लेकिन उसका दावा है कि उसके बयान में जो बदलाव हुआ वो मामूली था। वहीं इस मामले की जांच कर रहे डॉक्टरों ने भी कहा था कि उनके पास कुछ भी ऐसा स्पष्ट नहीं है जिससे किसी नतीजे पर पहुंचा जा सके।
आरोपी कांस्टेबल भी इस थ्योरी से हैरान
सीबीआई की इस नई थ्योरी पर सबसे मजेदार प्रतिक्रिया इस मामले के एक आरोपी कांस्टेबल छत्रपाल की तरफ से आई है। तीन महीने की सजा काट चुका छत्रपाल फिलहाल जेल से बाहर है। वो अपनी नौकरी खो चुका है और वो सीबीआई की रिपोर्ट की राह तक रहा था। लेकिन उसे खुद सीबीआई के इस नए खुलासे पर विश्वास नहीं हो रहा है।
छत्रपाल ने बताया, "ईमानदारी से कहूं तो आत्महत्या का मामला मुझे कुछ समझ नहीं आया। पीड़ित लड़कियों और आरोपी के परिजनों ने जो कुछ बताया, उससे नहीं लगता कि ये एक आत्महत्या का मामला है। हम उस देर रात तक उसी आम के पेड़ के आस पास थे जहां पर अगले दिन दोनों लड़कियां झूलती हुई मिलीं।
इन सब के बावजूद छत्रपाल को उम्मीद है कि सीबीआई कोई अच्छी खबर लेकर आएगी। उसने बरेली में डीआईजी से निवेदन किया है कि उसे नौकरी में बहाली दी जाए। उसने कहा, "अपना करियर और साख बनाने में सालों लग जाते हैं, मेरी भी पीड़िता के उम्र की लड़कियां हैं, मुझे उम्मीद है कि सीबीआई किसी नतीजे पर पहुंचेगी। नतीजा चाहे जो भी हो यह हमारे लिए अच्छी खबर लाएगा।"
सीबीआई के दावों को गलत बता रहे ग्रामीण
अन्य ग्रामीण वीरपाल ने बताया कि वो खुद आत्महत्या की थ्योरी से हैरान है। उन्होंने बताया कि अगर यहां पर रात में कोई टहनी भी गिरे तो जोर से आवाज आती है। ऐसा कैसे हो सकता है कि लड़कियां फंदे पर झूल जाएं और शोर की वजह से हम सबकी नींद न टूटे। वीरपाल, विजय सिंह और राम सरन समेत तमाम ग्रामीण इस बात से साफ इनकार कर रहे हैं कि पीड़िता के परिजनों ने सीबीआई को ऐसे किसी मोबाइल फोन की रिकॉर्डिंग सौंपी है जिसके बिनाह पर सीबीआई ने यह नई थ्योरी गढ़ी है।
हालांकि उन्होंने बताया कि वहां पर एक वीडियो रिकॉर्डिंग हुई थी जिसे सीबीआई ने धनतेरस के दिन लोगों को दिखाया था। पीडि़ता के पिता की माने तो यह एक पुराने स्ट्रीट प्ले की क्लिपिंग थी जिसमें दो लड़कों के बीच के विवाद को दिखाया गया था। उन्होंने बताया कि यह एक पुराना नाटक था जिसमें एक पहलवान आत्महत्या कर लेता है, लेकिन पीड़िता के पिता ने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि इसे इस मामले की जांच से क्यों जोड़ा जा रहा है।
यूपी पुलिस द्वारा गठित एसआईटी के एक सदस्य ने बताया कि वो सीबीआई द्वारा रिकॉर्ड किे गए सभी बयानों से पूरी तरह वाकिफ है। उसने बताया कि जब हमने एसआईटी का गठन किया था हमें यह अहसास हुआ था कि यह मामला राजनीतिक रंग ले लेगा। उसने बताया कि जब एसआईटी ने इस मामले से पर्दाफाश करने की शुरूआत की और प्रमुख गवाहों और परिजनों के बयान दर्ज करने की शुरुआत की तब राज्य के डीजीपी ए एल बैनर्जी ने जून में हमें सलाह दी थी कि इस मामले में परिवार की भूमिका की भी जांच की जाए।
अधिकारी ने बताया कि जिस आम के पेड़ पर दोनों पीड़िताओं की लाश लटकती हुई मिली वो जमीन से करीब 8-10 फीट ऊपर है और जिस तरह से दोनों की लाश लटकती मिली उसे आत्महत्या का मामला नहीं बताया जा सकता है। उसने बताया कि पेड़ के आस पास दोनों की चप्पलें बड़े ही करीने से सजीं थी और आत्महत्या के लिए वहां ऐसा कुछ भी सामान नहीं था जिससे वो अपना फंदा डाल सकें और खुदकुशी कर सकें। दोनों नाबालिग लड़कियां जिस तरह से फंदे पर झूल रहीं थी उसे आत्महत्या नहीं कहा जा सकता है।
अहम सवाल खड़े कर रहा नया खुलासा
इस मामले के आरोपियों का भाई भी सीबीआई के इस नए खुलासे से हैरान है। आरोपी के भाई अवधेश यादव ने बताया कि उसे मुश्किल से विश्वास हो रहा है कि उन लड़कियों ने आत्महत्या की है। उसने कहा कि उसे विश्वास नहीं हो रहा है कि उन दोनों लड़कियों की आत्महत्या के पीछे मेरे भाई हैं। अवधेश ने बताया कि इस घटना के बाद हमारे परिवार की साख कम हुई है। उसने कहा कि उसे न्याय तभी मिलेगा जब मामले के असली आरोपी पकड़े जाएंगे। अवधेश ने कहा कि हमारे भाइयों से ज्यादा वो लड़कियां गलत थीं और इस पूरे मामले में उनके परिवार की भी निश्चित तौर पर कोई भूमिका है।
अवधेश के पिता वीरपाल ने सीबीआई की इस नई थ्योरी पर सवाल उठाए हैं। पप्पू ने हमें और पुलिस को बताया था कि नो लड़की से प्यार करता था और वो भी उससे प्यार करती थी। उसने कहा कि अगर उसे आत्महत्या करनी थी तो वो कम से कम मुझे इस बारे में एक बार जरूर बताती। वहीं सीबीआई का नया खुलासा कई अहम सवाल खड़े करता जा रहा है।
पीड़िताओं का पोस्टमॉर्टम करने वाले तीन डॉक्टरों में से एक ने कहा कि उसके मुताबिक उनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िताओं की मौत दम घुटने से हुई थी। डॉक्टर ने यह भी बताया है कि जांच में लड़कियों के साथ रेप होने की भी पुष्टि हुई है।
पीड़िता के भाइयों ने कहा है कि सीबीआई का नया खुलासा बेवकूफाना है। पीड़िता के परिजनों ने कहा है कि सीबीआई ने लड़कियों की आत्महत्या का जो खुलासा किया है उसके खिलाफ वो उच्च अदालत में जाएंगे।