क्या भाजपा अपनी सियासत का तरीका बदल रही?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा अब राजनीति का तरीका बदल रही है। संघ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संयुक्त रूप से आंदोलन और धरने की सियासत के बजाय सामाजिक सरोकारों के जरिये राजनीति करने का निर्णय लिया है।
सियासी सफर को लंबा चलाए रखने के लिए भगवा परिवार के रणनीतिकारों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के राजनीतिक रास्तों को अपना औजार बनाया है। भगवा परिवार ने तय किया है कि वह कार्यकर्ताओं की ताकत को सामाजिक सरोकार के विषयों के साथ जोड़कर सियासत करेगी।
गांधी के विषयों को आगे बढ़ाते हुए भगवा दल अब सिर पर मैला ढोने, स्वच्छता, गरीबी उन्मूलन, छूआछूत और समरसता सरीखे सामाजिक सरोकार के मुद्दों के सहारे राजनीति चमकाएगी।
इस प्रयास में संघ ने प्रतिनिधिसभा की बैठक में छूआछूत के खिलाफ आंदोलन और सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था, तो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ आंदोलन, नमामि गंगे, स्वच्छता अभियान सरीखे विषयों पर शीर्ष नेताओं की समिति बनाकर एक-एक संगठन मंत्री को इससे जोड़ा है।
संघ एवं भाजपा नेतृत्व ने मिलकर लिया फैसला
पार्टी अब जल्द ही सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा के खिलाफ आंदोलन शुरू करेगी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार अब भी देश में 24 हजार लोग सिर पर मैला ढोने के काम में लगे हैं।
वहीं नमामि गंगे पर बनी समिति की जल्द बैठक बुलाई जाएगी। मोदी सरकार के प्रयासों के अलावा भाजपा और संघ के कार्यकर्ता गंगा किनारे के गांवों में जाकर उन्हें स्वच्छता के मामले में जागृत करेंगे।
भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिंह राव ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भाजपा के देशभर में लाखों कार्यकर्ता और दस करोड़ के अधिक सदस्य हैं। हमें केवल राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जनता से जुड़े विकास के कार्यों में योगदान देना चाहिए।