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पुलिस की खराब छवि से चिंतित हैं आईपीएस अफसर

Mon, 06 Jul 2015 11:32 AM IST
Updated Mon, 06 Jul 2015 11:32 AM IST
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IPS officers to fight for juniour policemen
देश के पुलिस महकमे को अपनी जनविरोधी इमेज कचोटने लगी है। इसके साथ ही करीब 80 फीसदी आईपीएस अधिकारी और निचले स्तर के कर्मी अपने राजनीतिक इस्तेमाल की परंपरा से आजिज आ चुके हैं।
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यही वजह है कि देश के आईपीएस अधिकारियों की पंजीकृत संस्था इंडियन पुलिस सर्विस एसोसिएशन (आईपीएसए) ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन दे कर मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की पेशकश की है।
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देश के सभी आईपीएस अधिकारी इस संस्था के सदस्य हैं। इस महकमे ने पिछले साल भर से भीतरी बदलाव की मुहिम छेड़ रखी है। आईपीएसए ने वेतन आयोग से भी सिफारिश की है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की तुलना में उनके साथ भेदभाव न किया जाए।
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साथ ही इंस्पेक्टर स्तर के नीचे के कर्मियों के काम के हालात और तनख्वाह से जुड़ी शिकायतों को भी जल्द से जल्द दूर करने के लिए उपाय निकालने को कहा गया है।

आईपीएसए लड़ेगा पुलिस कर्मियों की लड़ाई

IPS officers to fight for juniour policemen
आईपीएसए के सचिव वेंकट रामा शास्त्री ने ‘अमर उजाला’ से कहा कि सरकार को यह तय करना होगा कि उसे कैसी पुलिस चाहिए।

ज्यादातर आईपीएस अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा पुलिस का सिस्टम गलत काम करने वालों की मदद करता है। इसमें पुलिस वाले भी शामिल हैं जो राजनीतिक दबाव में झुक जाते हैं।

गृहमंत्री को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार के बाद पुलिस एकमात्र ऐसी संस्था है जिसका निजीकरण नहीं किया जा सकता। इसे सरकार के भीतर ही काम करना है। लेकिन पुलिस जनता के प्रति जवाबदेह होने के बजाए ताकतवर राजनीतिक लॉबी के दबाव में काम करती है।

लिहाजा पूरी व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत है। शास्त्री ने कहा कि  इंस्पेक्टर से नीचे स्तर के कर्मी पुलिस की रीढ़ हैं। लेकिन अराजपत्रित होने की वजह से वह अपनी संस्था नहीं बना सकते। इसलिए आईपीएसए ने उनकी लड़ाई भी लड़ने का फैसला किया है।
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