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IPS का खुलासा, मोदी के राज में पुराना शगल रही जासूसी

Wed, 04 Dec 2013 02:36 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 04 Dec 2013 02:36 PM IST
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ips officer letter reveals new things, shocking tapping in gujarat

नरेंद्र मोदी के दाहिने हाथ माने जाने वाले अमित शाह के ऑर्डर पर गुजरात पुलिस के एक युवती की जासूसी से पहले भी राज्य में फोन टैपिंग आम बात रही है। यह खुलासा एक आईपीएस अफसर ने किया है।

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सीनियर आईपीएस अफसर रजनीश कुमार राय ने ऑन-रिकॉर्ड कहा था कि राज्य में बड़े पैमाने पर फोन टैपिंग होती थी और हालात इतने खराब थे कि पुलिस इंस्पेक्टर और पुलिस सब-इंस्पेक्टर तक ऐसा करते थे।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सूरत में पोस्टेड तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर (इंटेलीजेंस) रजनीश कुमार राय ने 21 अप्रैल, 2005 को लिखे पत्र में एडिश्ानल डायरेक्टर जनरल (इंटेलीजेंस) जे महापात्रा के राज्य के गृह विभाग को लिखी उस चिट्ठी का जिक्र किया, जिसमें छह मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों ने टेलीफोन इंटरसेप्ट का पूरा ब्योरा मांगा गया था।
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राय को राज्य पुलिस के लिए टेलीफोन इंटरसेप्शन से जुड़े कोड का मसौदा तैयार करने का काम दिया गया था। और उन्होंने गुजरात डीजीपी को प्रस्तावित कोड के साथ पत्र भी भेजा।

पत्र में सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय दूरसंचार विभाग की ओर से तय नियमों एवं दिशा-निर्देशों का जिक्र किया गया, जिनका गुजरात में उल्लंघन हो रहा था।

राय ने लिखा, "हालिया वक्त में सरकार की ओर से राजनीतिक लोगों के फोन की गैरकानूनी टैपिंग को लेकर विवाद खड़े हुए और आरोप भी लगाए गए। भविष्य में इस तरह के विवादों और आरोपों से बचने और टेलीफोन इंटरसेप्शन के अधिकारों का बेजा इस्तेमाल रोकने के लिए ब्योरेवार तरीके से इसके नियमों को लेकर संहिता तैयार करने की जरूरत है।"


1992 बैच के आईपीएस अधिकारी राय का तबादला उड़ीसा काडर से गुजरात में हुआ था। और अप्रैल 2007 में सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले में आईपीएस अधिकारी डी जी वंजारा, राजकुमार पंडियान और दिनेश एमएन को गिरफ्तार कर उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार को काफी गुस्से में ला दिया था।

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