पठानकोट: जांच की आंच ला सकती है सियासी भूचाल
पठानकोट आतंकवादी हमले में ड्रग तस्करी और आतंकवादियों के गठजोड़ की जांच भी की जा रही है और अगर हमले के तार मादक पदार्थों की तस्करी की तरफ जुड़ते हैं तो जांच की आंच पंजाब की सियासत में भी भूचाल ला सकती है।
जांच एजेंसी एनआईए से जुड़े खुफिया सूत्रों के मुताबिक इस मामले की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है इसके तार मादक पदार्थों की तस्करी और सीमा पार के आतंकवादी गुटों के नेटवर्क की तरफ भी जा सकते हैं।
जांच एजेंसी को आशंका यह भी है कि कहीं ड्रग तस्करी के कवर में आतंकवादी तो नहीं भेजे गए। यह जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने बताया कि अगर जांच में इस शक की पुष्टि हो गई तो घेरे में राज्य के कुछ प्रभावशाली राजनेता भी आ सकते हैं जिनके नाम ड्रग तस्करी के सिलसिले में पहले भी लिए जाते रहे हैं।
आतंकियों को था आईएसआई का संरक्षण
खुफिया एजेंसियों को शक है कि कहीं इस पूरे मामले के ड्रग तस्करी के
नेटवर्क का इस्तेमाल तो नहीं किया गया है। क्योंकि पंजाब में सीमा पार
पाकिस्तान केरास्ते अफगानिस्तान से हेरोइन,कोकीन,अफीम जैसे नशीले पदार्थों
का काला कारोबार बेहद व्यापक है और आरोप है कि इसमें पंजाब पुलिस, प्रशासन
और राजनेताओं का एक हिस्सा भी लिप्त है।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक
हमले की जांच में इस आशंका को भी जांचा जा रहा है कि कहीं एसपी सलविंदर
सिंह और उनके दोस्त राजेश वर्मा व आतंकवादियों की गोली से मारे गए टैक्सी
चालक ड्रग तस्करों और आतंकवादियों केगठजोड़ की किसी चाल के शिकार तो नहीं
हो गए और अनजाने में उनका इस्तेमाल हो गया।
खुफिया एजेंसियों को अपने
सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि पठानकोट वायुसेना के आधार शिविर में
हमला करने आए आतंकवादियों के हैंडलर और सीमा पार बैठे ड्रग माफिया को
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण भी है और इस नेटवर्क का
इस्तेमाल भारत में ड्रग केसाथ हथियारों और आतंकवादियों को भेजने में भी
किया जाता है।
इस बार चालाकी से ड्रग तस्करों को फिदाइन आतंकवादियों से बदल
दिया गया, जिसकी जानकारी भारतीय सीमा में उन्हें प्रवेश कराने वालों को भी
नहीं थी और जब उन्हें पता चला तो खासी देर हो चुकी थी।