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वीके सिंह को विरोधियों की चुनौती, साबित करो किसने दिए पैसे

Mon, 16 Nov 2015 04:25 PM IST
Updated Mon, 16 Nov 2015 04:25 PM IST
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Intolerance Debate Created By Those Being 'Paid Money' says VK Singh

केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा है कि भारत में असहिष्णुता की बहस अतिकल्पनाशील लोगों ने अनावश्यक रूप से खड़ी की, जिन्हें ढेर सारा पैसा दिया गया था। उन्होंने कहा कि ये बिहार चुनाव को मद्देनजर रखकर जानबूझकर उठाया गया राजनीतिक कदम था।

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लॉस एजेंल्स में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'असहिष्णुता पर भारत में कोई बहस ही नहीं है।' वीके सिंह क्षेत्रीय प्रवासी भारतीय दिवस में भाग लेने अमेरिका गए हैं। उस कार्यक्रम में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को जाना था, हालांकि पेरिस हमले के बाद वे दुबई से ही वापस लौट आईं।
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भारत में असहिष्णुता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ब्रिटिश दौरे में भी सवाल किया गया था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में पूछे गए सवाल में मोदी ने कहा कि था कि भारत बुद्घ और गांधी देश, यहां असहिष्णुता स्वीकार नहीं की जाएगी।
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वहीं अब वीके सिंह का यह बयान सामने आने के बाद विरोधियों ने उन पर हमला बोल दिया है। पुरस्कार लौटाने वाले प्रसिद्ध लेखक अशोक वाजपेयी ने सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि वो अपने आरोप सिद्ध करें।

वहीं यूपी के मंत्री आजम खां ने इसे गिरी हुई और स्तरहीन भाषा करार देते हुए उनके बहाने पीएम पर ही हमला बोल दिया। कहा- जब पीएम ही ऐसे बयानों का इस्तेमाल कर बेटियों की फिक्सिंग कराने लगे तो उनके मंत्री कैसे पीछे रह सकते हैं।

अखलाक की मौत के बाद शुरु हुई थी बहस

Intolerance Debate Created By Those Being 'Paid Money' says VK Singh

वीके सिंह ने कहा, 'भारतीय मीडिया कैसे काम करता, इस पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता।' उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में चुनाव हो रहे थे, एकाएक हमने पाया कि ऐस आलेखों की बाढ़ आ गई, जिसमें कहा गया कि भारत में चर्चों पर हमले हो रहे हैं। ईसाई समुदाय को अलग-थलग किया जा रहा है।

वीके स‌िंह ने कहा कि जिस दिन चुनाव खत्म हो गए, सारा विवाद खत्म हो गया। अस‌हिष्‍णुता पर हो रही बहस में भी ऐसा ही है, जिस दिन बिहार चुनाव खत्‍म हुआ, उस दिन से सब बंद है।

उल्लेखनीय है कि सितंबर में दिल्ली के नजदीक बिसाड़ा गांव में गोमांस रखने के शक में एक मुस्लिम अखलाक की हत्या किए जाने के बाद देश भर में अस‌‌हिष्‍णुता पर बहस शुरु हो गई ‌थी। उस वाकये के कुछ पहले कर्नाटक में तर्कवादी एमएम कलबुर्गी की हत्या हो गई ‌थी। लेखकों, फिल्मकारों और उद्योगपतियों ने असहिष्‍णुता के मसले पर मोदी सरकार के रवैये की आलोचना की थी।

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