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'भाजपा को शायद फिल्मी सितारों की जरूरत है, मुझे नहीं'

Thu, 27 Mar 2014 07:37 AM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई Updated Thu, 27 Mar 2014 07:37 AM IST
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interview with priya dutt

मुंबई उत्तर-मध्य के लोग आज भी सुनील दत्त को याद करते हैं। और उनकी बेटी प्रिया दत्त में पिता की छवि देखते हैं। प्रिया की पिछले दो लोकसभा चुनावों में मिली जीत लोगों का उनके प्रति विश्वास दिखाती है। प्रिया फिर से चुनाव मैदान में हैं। पेश है प्रिया दत्त से रवि बुले की विशेष बातचीत-

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-सांसद के रूप में आपकी हैट्रिक पर नजरें हैं। क्या खुद को अब वरिष्ठ राजनेता मानती हैं?
बिल्कुल नहीं। मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है। हां, जब मैं राजनीति में आई थी तो मुझे कुछ नहीं पता था। पिताजी (सुनील दत्त) जरूर राजनीति में थे लेकिन हमारा राजनीति से सीधा संबंध नहीं था। मुझे खुद को राजनेता के रूप में विकसित करना पड़ा। पहले मुझे लगता था कि राजनेता के पास जादू की छड़ी होती है। लेकिन राजनीति तलवार की धार पर चलने जैसी होती है। इसे समझने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप लगातार लोगों के बीच रहें। उनकी मुश्किलें समझें और हल करें।

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सोशल मीडिया ने आज राजनीति को कितना मुश्किल बनाया है?

interview with priya dutt
सोशल मीडिया से लोगों के पास तेजी के जानकारियां पहुंचती हैं लेकिन कई बार वे गलत भी होती हैं। ऐसे में गलत राय बनते देर नहीं लगती। इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव हुए हैं। व्यक्तिगत रूप से मैं पब्लिसिटी पर विशेष ध्यान नहीं देती। अगर आप काम करते हैं तो लोग आपका खयाल रखते हैं। आप काम नहीं करेंगे लोगों से नहीं जुड़ेंगे तो चुनाव में कितना ही पैसा खर्च कर लें, नहीं जीतेंगे।

भ्रष्टाचार यूपीए-2 का बड़ा सिरदर्द रहा है। क्या कहेंगी?
सोचिए कि हमारी सरकार अगर भ्रष्ट थी या भ्रष्टाचार के मुद्दे से डरी हुई थी तो आरटीआई क्यों लाती? व्यवस्था में पारदर्शिता का इससे बड़ा कदम पहले किसी ने नहीं उठाया। कैग भी हमारे ही समय में आया।

लेकिन इसी सरकार के दौरान महंगाई ने लोगों को रुला दिया।

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यह सबसे बड़ा मुद्दा है। लेकिन जैसे जैसे जीवन स्तर बढ़ता है, इच्छाएं बढ़ती हैं तो महंगाई बढ़ती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार भी एक कारण है। लोगों के सहयोग के बिना महंगाई पर काबू संभव नहीं है। जब कहा गया कि कुछ समय के लिए सोना ना खरीदें, विदेशी सामान खरीदना बंद करें, तो लोग नाराज हो गए।

परंतु आपकी पार्टी के नेताओं ने पांच रुपये और बारह रुपये में भरपेट भोजन मिलने की बातें भी कही। रसोई गैस सिलेंडर की सब्सिडी खत्म कर दी गई।
ऐसे बयान पूरी तरह गलत हैं, क्योंकि सच्चाई मुझे पता है। रसोई गैस मामले में भी मैं और मेरे जैसे नेता जानते हैं कि लोगों पर कितना बोझ बढ़ा। हमारी सरकार के बावजूद हमने फैसले का विरोध किया और सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या बढ़वाई।

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प्रमोद महाजन की बेटी पूनम इस बार आपके विरुद्ध चुनाव लड़ रही हैं। कैसे देखती हैं उन्हें?

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हमेशा ही आपके सामने कोई प्रतिद्वंद्वी होता है। मैं कभी यह नहीं देखती कि मेरे विरुद्ध कौन है। मैं सिर्फ अपने काम पर फोकस करती हूं। बाकी जनता को फैसला करना है।

क्या आप पहले से पूनम महाजन को जानती हैं?
मैं तीन-चार बार उनसे मिली हूं। हम लोग अच्छे से मिले। लेकिन वह व्यक्तिगत मुलाकातें और संबंध हैं, जिनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।

भाजपा कई फिल्मी सितारों को मैदान में उतार रही है। फिल्मी दुनिया के लोग आपके भी परिचित हैं...!
भाजपा को शायद इन सितारों की जरूरत है। जबकि मैं कभी किसी फिल्मी सितारे से नहीं कहती कि मेरे लिए प्रचार करे। न ही मेरे पिता ने कभी ऐसा किया।

राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल हैं। कांग्रेस ने उन्हें आगे रखने के बावजूद पीएम उम्मीदवार नहीं बनाया, क्यों?

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राहुल गांधी को उम्मीदवार घोषित करने का सवाल ही नहीं है क्योंकि कांग्रेस में कभी यह परंपरा नहीं रही। राहुल पार्टी उपाध्यक्ष हैं और नेतृत्व कर रहे हैं। उनके पास पार्टी और देश के लिए विजन है। उन्होंने यूथ कांग्रेस से शुरुआत की। वह संगठन के व्यक्ति हैं और जमीन स्तर से संगठन को बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

संजय दत्त की पैरोल पर काफी विवाद रहा कि प्रभावशाली परिवार से होने का उन्हें फायदा मिला!
यह बिल्कुल गलत है। हमें महीने में केवल एक बार उनसे मिलने दिया जाता है। लोग कहते हैं कि उन्हें जेल में सारी सुविधाएं मिल रही हैं। कोई जाकर देखे कि वह कैसे रह रहे हैं।

सिर्फ संजय ही नहीं, जेल में बंद बाकी लोगों का हाल भी देखिए। हम जेलों में सुधार की बात करते हैं, जबकि हालात भयानक हैं।

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