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ट्विटर से फासीवादियों का इलाज करूंगा: लालू

Thu, 16 Jan 2014 07:50 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Thu, 16 Jan 2014 07:50 PM IST
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interview with lalu on twitter account

बदलाव को स्वीकार करने की घोषणा करते हुए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद आखिरकार ट्विटर एकाउंट पर आ ही गए।

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ट्विटर पर आने के बाद उनकी राजनीतिक रणनीति में क्या-क्या बदलाव आए हैं? ट्विटर पर उनका अंदाज़ क्या होगा? वह कहना क्या, करना क्या चाहते हैं?

बीबीसी के साथ हुई बातचीत में लालू प्रसाद अपने ख़ास अंदाज में ही नज़र आए। पढ़िए उनसे हुई बातचीत के चुनिंदा अंश।

ट्विटर पर एकाउंट क्यों खोला?


क्योंकि बहुत कम्युनिकेशन गैप हो गया है। देश के दुनिया के हालात पर, मुद्दे पर हम क्या बोल रहे हैं, नहीं बोल रहे हैं; यूथ, हमारे जानने वाले, देश-दुनिया के लोग यह जानना चाहते थे।

क्या लालू प्रसाद यादव का मज़ाकिया अंदाज़ ट्विटर पर भी कायम रहेगा?

मज़ाकिया लहज़े में मैं बहुत से लोगों का इलाज करता हूँ। जो लोग सोचते हैं कि मज़ाकिया है, ऐसे लोगों का- जिनको न अक्ल से, शक्ल से, न देश से मतलब है- ऐसे लोगों का मैं ट्रीटमेंट करता हूं। अब फिर वही दवाई हम करेंगे, अब हम फ़्री हैं।
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लालू जी आपको जनता से सीधे संवाद के लिए जाने जाते हैं फिर यह ट्विटर, फ़ेसबुक के चक्करों में किस तरह पड़ गए?

दरअसल देश की करीब 60 फ़ीसदी आबादी युवाओं की है, जो आईटी में हैं, विश्व में है फिर गांव में भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और फ़ोन, इंटरनेट का युवा इस्तेमाल कर रहे हैं। तो ऐसे लोगों को, नौजवानों को कुछ पार्टियां, कुछ सांप्रदायिक-फ़ासीवादी ताकतें दिग्भ्रमित कर रही हैं, गलत दिशा में ले जा रही हैं। ऐसे लोगों तक हम अपने विचारों को पहुंचाएंगे।
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क्या आपका इशारा नरेंद्र मोदी की तरफ़ है?

नरेंद्र मोदी सांप्रदायिक और फ़ासीवादी ताकतों के प्रतीक हैं। वो देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की ख़ूबसूरती को गद्दी के लिए नष्ट करना चाहते हैं। ऐसी ताकतें देश के नौजवानों को सही दिशा न देकर दूसरे ढंग से इस्तेमाल करना चाहती हैं।

ट्विटर पर नौजवानों से कहेंगे क्या?

मैं यह कहना चाहता हूं कि पूरा देश, देश का पूरा भविष्य नौजवानों पर निर्भर करता है। आपकी आबादी 60 फ़ीसदी है। देश में ग़रीबी है, गुर्बत है, बेरोज़गारी है लेकिन इस पर चर्चा नहीं हो रही है। नौजवानों को दूसरे ढंग से उलझाया जा रहा है। किस तरह हमारी अर्थव्यवस्था बढ़े, फले-फूले इस पर बात को बहस न करके सांप्रदायिक और फ़ासीवादी ताकतें देश की दिशा को ग़लत दिशा में मोड़ रही हैं।

इसे लेकर हमारी बेचैनी है। हमारे बेटे तेजस्वी और नए लड़कों ने सलाह दी कि पापा आप फ़ेसबुक, ट्विटर पर आओ। दिल्ली में भी हमारे पत्रकार साथियों ने कहा कि आप कहां होते हैं, क्या बोलते हैं पता नहीं चलता। इसलिए एकाउंट खोला है हमारे बच्चों ने।

ग़रीबों के एक वर्ग को लगता है कि लालू जी हमारी भाषा में बोलते हैं, इसके लिए वो आपको बहुत पसंद करते हैं, लेकिन अब अंग्रेज़ी में ट्वीट करेंगे तो उसे कौन पसंद करेगा?

देखिए अंग्रेज़ी भी एक तबका और वर्ग है। बहुत से बच्चे भी अंग्रेज़ी जानते हैं। और लोगों से सीधे बात करने का सवाल है तो वह तो उनके दरवाज़े पर जाकर हमें करना है।

ट्विटर पर फ़ेसबुक पर जो भारी जमात है, जिसे गुमराह किया जा रहा है उनके बीच मैं अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना चाहता हूं, अपना दस्तख़त करना चाहता हूं। ताकि कोई पूछे तो मैं उसको इसका इलाज बता सकूं, हल बता सकूं।


अब जैसे दिल्ली में विदेशी महिला से कथित बलात्कार हुआ और वहां के मुख्यमंत्री बोल रहे हैं कि पुलिस हमारी सुन नहीं रही है- तो आप काहे के लिए हैं जब पुलिस आपकी सुन नहीं रही है।

आप सबको चोर बोल रहे हैं, आप सब लोगों को बोल रहे को कि स्टिंग कीजिए। तो यह लोगों को ग़लत दिशा में ले जाया जा रहा है।

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