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पढ़िए, 'फिर से नीतीशे' बनने के पीछे की असल कहानी

Tue, 10 Nov 2015 11:42 PM IST
Updated Tue, 10 Nov 2015 11:42 PM IST
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interview rajsekhar writer of Phir se nitishe

बिहार चुनावों की जीत के बाद लालू और नीतीश का गठजोड़ जितनी चर्चा में हैं, उतनी ही तारीफ जदयू के चुनावी गीत 'फिर से नीतीशे' की हो रही है। राजशेखर का ये गीत जदयू के लिए तुरुप का इक्का साबित हुआ और भाजपा के 'एक बार बीजेपी' को बेअसर कर गया।

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राजशेखर 'तनु वेड्स मनु' फिल्म के गीत लिख चुके हैं और कई और परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। बिहार के परिणाम आने के बाद उनके गीत को जीत के हीरो के रूप में देखा जा रहा है। फोन पर उन्होंने 'फिर से नीतीशे' गीत पर अमर उजाला से लंबी बात की।
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स्वाभाविक सा सवाल था कि नीतीश कुमार पर गीत लिखने को वे कैसे राजी हो गए? जवाब में उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार ने बिहार में काम किया था और उस हक से वो चुनावों में जाना चाहते थे। मुझे नकारात्मक गीत नहीं लिखना था और बड़बोला भी नहीं होना था।"
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वे बताते हैं कि नीतीश के चुनाव प्रचार का प्रबंधन संभाल रहे प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने जून में उनसे संपर्क किया था और इसके बाद उन्होंने और स्नेहा खानवलकर ने गाने पर एक साथ काम करना शुरू किया। दोनों ने मुंबई से पटना आकर नीतीश कुमार से मुलाकात भी की।

स्नेहा खानवलकर अनुराग कश्यप की फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के गीतों को संगीत से सजाने के बाद चर्चा में आई थीं।

(तस्वीर में नीतीश कुमार के साथ राजशेखर और स्नेहा खानवलकर)

नीतीश को क्यों बनाया 'नीतीशे'?

interview rajsekhar writer of Phir se nitishe

'‌फिर से नीतीशे' गीत का 'नीतीशे' जदयू के पोस्टरों पर छाया रहा और मीडिया में भी। नीतीश को 'नीतीशे' बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? इस सवाल के जवाब में राजशेखर ने कहा, "बिहार में पुख्ता तरीके से कोई बात बोलते हैं तो जोर लगाने के लिए 'ए' की मात्रा लगा देते हैं। मैं भी बिहार से हूं और मुझे पता था कि बोली किस तरह से लोगों को अपील करेगी।"

राजशेखर मधेपुरा के रहने वाले हैं। पहली मुलाकात में नीतीश ने यह नहीं पूछा था कि वे कौन हैं, कहां के रहने वाले हैं। राजशेखर बताते हैं, "जब नीतीश कुमार को ये गीत सुनाया तो उन्होंने मुस्कुराकर पूछा - आप भी बिहारे से हैं क्या?"

चुनावी गीतों में एक विचारधारा होती है, उस विचारधारा के साथ सामंजस्य किस तरह से बिठाया, इस सवाल पर राजशेखर ने कहा, "फिर से नीतीशे मैंने सहज होकर लिख दिया, मेरे भीतर कोई द्वंद्व नहीं था, न कोई हितों का टकराव।"

राजशेखर बताते हैं कि जब भी वे गांव जाते हैं तो लड़कियों को साइकिल पर स्कूल जाते हुए देखते हैं। उनका कहना है, "उन्हें देखकर मैं अक्सर कहता हूं ‌कि अपने बस्तों में और अपने करियर पर रखकर वो जो ले जा रही हैं, उसी से नया बिहार बनेगा।"

वे कहते हैं, "मैं भी नीतीश के व‌िचारों का सम‌र्थकों हूं। मैंने बिहार को बनते देखा है और जो देखा है वो लिखा।"

गीत में आम बिहारी के मुद्दों की झलक

interview rajsekhar writer of Phir se nitishe

राजशेखर के गीत में बिहार के ग्रामीण परिवेश की झलक थी, और भूमि बचाने का सवाल। तो "भूमि का सपूते, भूमि को बचाएगा, अपना एक-एक वादा उ तो निभाएगा" जैसी पंक्तियां कैसे जहन में आईं?

राजशेखर ने बताया, "जून में ये गीत मैं लिख रहा था और उस समय भूमि अधिग्रहण बिल का विरोध में चल रहा था। मैं एक किसान का बेटा हूं और मुझे पता है कि जमीन की बात केवल किसान ही समझ सकता है। भूमि का सपूते भूमि को बचाएगा, ये लिखकर भूमि अधिग्रहण बिल के उसी विरोध की ओर इशारा किया था।" 'फिर से नीतीशे'‌ में बिहार के सामाजिक ढांचे की ओर भी इशारा था और उसे बचाने की बात कही गई।

राजशेखर कहते हैं कि ‌बिहार में चुनावों के दरमियान एक भी अप्रिय घटना नहीं हुई। बिहार ने पूरे देश को सहिष्‍णुता का संदेश दिया। उनका कहना है कि बात करके, रचनात्मक बहस करके आगे बढ़ा जा सकता है।

प्रशांत को कैसा लगा ये गीत

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'फिर से नीतीशे' 15 से 20 दिनों में तैयार हो गया था।

प्रशांत ने सबसे पहले ये गीत अपने आसपास के लोगों को ही सुनाया। राजशेखर याद करते हैं कि जिसने इसे सुना वो सुनकर झूमने लगे। तब उन्होंने किसी को बताया भी नहीं था कि ये गीत क्यों लिखा गया है। लेकिन इस प्रतिक्रिया के बाद इसे जून में हुई स्वा‌भिमान रैली में चुनावी गीत की तरह पेश कर दिया गया।

'फिर से नीतीशे' के बाद क्या किसी और दल ने उनसे संपर्क किया था? इस सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि उन्हें कुछ दूसरी पार्टियों के नेताओं ने कॉल किया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

उनका तर्क है, "ऐसा करना नैतिक रूप से सही नहीं होता है। अपनी पूरी ऊर्जा लगाककर एक पार्टी के ल‌िए गीत लिखा चुका हूं और फिर उसी के विरोध में लिखूं ये माकूल नहीं है। फिल्मों में हीरो के लिए भी गीत लिखा जाता है और विलेन के लिए भी, लेकिन राजनीतिक गीतों में ये नैतिक नहीं है।"

सुनिए गीत-


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