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'लालू की अगुवाई में बिहार में विनाश की धारा'

Mon, 05 Oct 2015 12:53 PM IST
Updated Mon, 05 Oct 2015 12:53 PM IST
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interview of bihar bjp chairperson mangal pandey

बिहार में चुनावी सरगर्मी जोरों पर है। भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पटना में ही डेरा डाले हुए हैं। अनेक केंद्रीय मंत्री भी चुनाव की कमान संभाल रहे हैं। इस चुनावी सरगर्मीं के बीच प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय से विनोद अग्निहोत्री की बातचीत।

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बिहार में पहली बार भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुनाव लड़ रही है। आपको कामयाबी की कितनी उम्मीद है?

बिहार में चुनाव दो धाराओं के बीच हो रहा है। एक धारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार के विकास की धारा है। जबकि दूसरी लालू प्रसाद यादव की अगुआई में विनाश की धारा है। यह चुनाव विकास और विनाश के बीच है और बिहार की जनता ने दोनों को अनुभव कर लिया है।
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नरेंद्र मोदी की सरकार के डेढ़ साल की विकास की धारा और लालू नीतीश के 25 साल केशासन की विनाश की धारा दोनों का अनुभव बिहार की जनता केसामने है। इसलिए जनता ने मन बना लिया है कि वह मोदी जी की विकास की धारा के साथ जाएगी।
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यानी आप को एनडीए की जीत का पूरा भरोसा है?

भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की जीत की इबारत लिखी जा चुकी है। लड़ाई अब इस बात की है सरकार बनाने वाली सबसे बड़ी पार्टी भाजपा और उसके गठबंधन को कितनी ज्यादा से ज्यादा सीटें मिलें और दूसरी तरफ महागठबंधन के नेता भी समझ चुके हैं कि मजबूत विपक्ष बनने के लिए कितनी ज्यादा से ज्यादा सीटें वो निकाल सकें।

ऐसा नहीं है!

interview of bihar bjp chairperson mangal pandey

पटना में हमें भाजपा के हर होर्डिंग पर सिर्फ नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ही तस्वीर है। बिहार भाजपा के किसी भी नेता की तस्वीर क्यों नहीं है?


नहीं ऐसी बात नहीं है। आपने शायद सारे होडिंग्स नहीं देखे हैं। जहां तक मोदी जी और अमित जी के फोटो की बात है, वह भाजपा केशीर्ष नेता हैं। एक सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं और दूसरे संगठन के प्रधान हैं। उनके चेहरे तो ज्यादा दिखेंगे ही। हमारे चुनाव प्रचार में न सिर्फ बिहार भाजपा के नेता बल्कि एनडीए के दूसरे नेताओं की भी तस्वीरे हैं।

नीतीश कुमार ने बिहार के स्वाभिमान को चुनावी मुद्दा बना दिया है। भाजपा इसका कैसे जवाब दे रही है?

नीतीश कुमार ने बिहार के स्वाभिमान को जितना चोट पहुंचाई है उतनी किसी भी दूसरे नेता ने नहीं पहुंचाई। नीतीश कु्मार की वजह से बिहार की जनता अपने को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

एक के बाद एक धोखा और विश्वासघात नीतीश कुमार ने किया। चाहे वह अपने सहयोगी दल भाजपा केसाथ हो या अपनी पार्टी के नेताओं केसाथ या बिहार की जनता केसाथ। जिसने धोखे और विश्वासघात का रिकार्ड बनाया हो वह सम्मान और स्वाभिमान की बात कैसे कर सकता है।

सिर्फ विकास है मुद्दा

interview of bihar bjp chairperson mangal pandey
चुनाव में क्या जातिवाद और हिंदुत्व भी मुद्दा है?


बिहार चुनाव में न जातिवाद कोई मुद्दा है और न ही हिंदुत्व। चुनाव में एक मात्र मुद्दा विकास है।

भाजपा ने परिवर्तन यानी बदलाव को चुनावी मुद्दा बनाया है। इसके क्या मायने हैं?

बार बार यह पूछा जाता है कि हम क्या परिवर्तन करेंगे। हम परिवर्तन करके बिहार के गरीबों को दवा उपलब्ध  कराएंगे। नौजवानों का पलायन रोकेंगे। किसानों को फसल का उचित दाम देकर उन्हें आत्महत्या नहीं करने देंगे।

हर क्षेत्र में बिजली पहुंचाएंगे। किसानों और उद्योगों को अलग अलग बिजली देंगे। नौजवानों को उच्च शिक्षा का प्रबंध करेंगे। गावों तक सड़कें पहुंचाएंगे। हर छोटी बस्ती को सड़कों से जोड़ेंगे।

यह परिवर्तन स्वाभाविक

interview of bihar bjp chairperson mangal pandey

नीतीश कुमार जब तक भाजपा केसाथ थे वह सुशासन पुरुष थे। भाजपा से अलग होते ही खलनायक हो गए। ऐसा क्यों?

यह परिवर्तन स्वाभाविक है। जहां भाजपा रहेगी वहां सुशासन और विकास दिखाई देगा। लेकिन जहां लालू प्रसाद का साथ होगा वहां तस्वीर बदल जाएगी।

अचानक जब नीतीश कुमार ने लालू यादव का हाथ थामा और कांग्रेस केसाथ जोड़ लिया तो उनकी छवि और तस्वीर दोनों बदल गई। लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस केसाथ जुड़कर सुशासन विकास और कानून केराज की बात नहीं की जा सकती है।

अगर भाजपा को अपने परिवर्तन और विकास केनारे और नरेंद्र मोदी की छवि का इतना ही भरोसा है तो गिरिराज सिंह ने भाजपा की सरकार बनने पर किसी सवर्ण के मुख्यमंत्री न बनने की बात कहकर क्या पिछड़ों को खुश करने की कोशिश क्यों की?

अपने विचार कोई भी दे सकता है। लेकिन भाजपा का संसदीय बोर्ड ही तय करता है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा और इस बार भी संसदीय बोर्ड ही फैसला करेगा।

क्या मोहन भागवत केआरक्षण की समीक्षा वाले बयान से भाजपा और एनडीए को नुकसान हो सकता है?

भाजपा बार बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि पार्टी वर्तमान आरक्षण व्यवस्था मं कोई बदलाव नहीं चाहती है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जी भी स्पष्ट कर चुके हैं कि आरक्षण की जो व्यवस्था चल रही है वही जारी रहनी चाहिए।

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