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भ्रष्टाचार में भारत को मिला 94 वां स्थान

Tue, 03 Dec 2013 03:34 PM IST
Updated Tue, 03 Dec 2013 03:34 PM IST
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International transparency new statistics

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने दुनिया भर के 177 देशों में भ्रष्टाचार की अवधारणा से जुड़ी इस साल की सूची जारी की है। यह सूची बताती है कि सत्ता का दुरुपयोग, गोपनीय सौदे और रिश्वतखोरी दुनिया भर के समाजों को बर्बाद कर रहे हैं।

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इस सूची में भारत 36 अंकों के साथ 94वें स्थान पर है। भारत को दूसरे साल भी यही स्कोर मिला है।

दक्षिण एशिया के बाक़ी देशों पर नज़र दौड़ाएं तो भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की स्थिति भारत के मुक़ाबले और बदतर हुई है, जो 28 अंक लेकर 127वें स्थान पर है।
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हालांकि अगर साल 2012 का स्कोर देखें तो पाकिस्तान में पिछले साल के मुक़ाबले भ्रष्टाचार एक अंक कम हुआ है।

सूची के मुताबिक 100 अंक वाले देश को लगभग भ्रष्टाचार मुक्त माना जाता है और ज़ीरो का मतलब है कि तक़रीबन भ्रष्ट। सूची में शामिल 177 देशों में से दो तिहाई अब भी 50 अंक से नीचे हैं।
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इस सूची में श्रीलंका भारत से बेहतर स्थिति में है, जिसे सूची में 37 अंक के साथ 91वां स्थान मिला है।

अफग़ानिस्तान 'सबसे भ्रष्ट'
नेपाल की स्थिति भी भारत से ख़राब है, जो 31 अंकों के साथ 116वें स्थान पर है। हालांकि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की सूची के मुताबिक पाकिस्तान के मुक़ाबले नेपाल में भ्रष्टाचार कम आंका गया है। भूटान को 63 स्कोर मिला है।

दक्षिण एशिया में अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति सबसे ख़राब बताई गई है जिसे ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की सूची में 8 अंक मिले हैं और वह सूची में 175वें स्थान पर है। पिछले साल भी अफ़ग़ानिस्तान की यही स्थिति थी।

चीन ने इस साल अपने यहां भ्रष्टाचार को रोकने के कड़े उपाय किए हैं और उसे 40 का स्कोर हासिल हुआ है। जबकि पिछले साल चीन को 39 अंक मिले थे।

बर्मा-नेपाल का स्कोर अच्छा

कहा, ''भ्रष्टाचार अवधारणा सूची 2013 दिखाती है कि सभी देशों में अभी भी सरकार के सभी स्तरों पर स्थानीय परमिट जारी करने से लेकर क़ानूनों के पालन और बनाने तक भ्रष्टाचार का ख़तरा मौजूद है।''

जिन देशों की स्थिति भ्रष्टाचार सूची में बेहतर हुई है उनमें बर्मा यानी म्यांमार, ब्रूनेई, लाओस, सेनेगल, नेपाल, एस्टोनिया, ग्रीस, लेसोथो और लाटविया शामिल हैं।

जबकि जिन देशों में भ्रष्टाचार ज़्यादा बढ़ा माना जा रहा है उनमें सीरिया, गैंबिया, गिनी-बिसाऊ, लीबिया, माली, स्पेन, इरीट्रिया, मॉरीशस, यमन, ऑस्ट्रेलिया और आइसलैंड जैसे देश शामिल हैं।

नतीजे
भ्रष्टाचार अवधारणा सूची 2013 में डेनमार्क और न्यूज़ीलैंड 91 अंकों के साथ सबसे कम भ्रष्टाचार वाले देश हैं। अफ़ग़ानिस्तान, उत्तर कोरिया और सोमालिया इस साल सबसे कम 8 अंक लेकर सबसे ज़्यादा भ्रष्टाचार वाले देश के तौर पर सामने आए हैं।

लाबेल का कहना है, ''सबसे अच्छा करने वाले देशों को देखकर साफ़ लगता है कि कैसे पारदर्शिता ज़िम्मेदारी लाती है और भ्रष्टाचार को ख़त्म कर सकती है। फिर भी अच्छा प्रदर्शन करने वाले देशों में राज्य का क़ब्ज़ा, अभियानों की वित्तीय मदद और बड़े सार्वजनिक ठेकों पर ध्यान न देने से बड़े भ्रष्टाचार का ख़तरा बना हुआ है।''

भ्रष्टाचार सूची सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर विशेषज्ञों की राय के आधार पर बनाई जाती है। विभिन्न देशों के स्कोर वहां की सूचनाओं और जनसेवा में जुड़े लोगों के व्यवहार पर नियंत्रण रखने वाले नियमों तक पहुंच से बनते बिगड़ते हैं, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र में जवाबदेही की कमी और सार्वजनिक संस्थानों में कार्यकुशलता की कमी इस स्कोर को प्रभावित करती है।

भ्रष्टाचार 'बड़ी चुनौती'

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र खासकर राजनीतिक दलों, पुलिस और न्यायिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

एजेंसी का कहना है कि सार्वजनिक संस्थानों को अपने काम, अपने अधिकारियों और अपने निर्णयों के बारे में ज़्यादा खुला होने की ज़रूरत है। भ्रष्टाचार की जांच पड़ताल और उस पर कार्रवाई भी काफ़ी कठिन काम है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है कि मौसम में बदलाव, आर्थिक संकट और भीषण ग़रीबी से निपटने के लिए भविष्य में उठाए गए क़दमों को बढ़ते भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ेगा।

जी-20 जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को हवाला के पैसे पर रोक लगानी होगी, कॉर्पोरेशन को ज़्यादा पारदर्शी बनाना होगा और चुराई गई पूंजी की वापसी सुनिश्चित करनी होगी।


लाबेल ने कहा, ''वक़्त आ गया है कि अब ऐसे लोगों को रोका जाए जो भ्रष्टाचार करके साफ़ बच निकलते हैं।

कानूनी कमज़ोरियां और सरकारों में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी दोनों घरेलू और सीमा पार भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं और इस वजह से भ्रष्टों के बच निकलने को रोकना होगा।''

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