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जस्टिस गांगुली की बढ़ी मुश्किलें, इंटर्न दर्ज कराएगी FIR!
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 25 Dec 2013 11:28 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली के एक लॉ इंटर्न की ओर से लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार करने के अगले ही पीड़िता ने जस्टिस गांगुली की कड़ी आलोचना करते हुए उनकी पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के संकेत दिए हैं।
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इंटर्न ने मंगलवार को अपने ब्लॉग 'लीगली इंडिया' पर यह संकेत देते हुए लिखा कि जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं और मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं, वे पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं। वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि मुद्दा उलझाया जा सके और वे जांच और जवाबदेही से बच निकलें।
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जस्टिस गांगुली ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया था।
'छवि धूमिल करने की कोशिश'
उन्होंने अपने खिलाफ गठित सुप्रीम कोर्ट की समिति पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा था, मुझे लगता है कि यह मेरी छवि धूमिल करने की स्पष्ट कोशिश है।
पूर्व न्यायाधीश की इस चिट्ठी के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का संकेत देते हुए इंटर्न ने ब्लॉग में लिखा है कि घटना के बाद जब वह कोलकाता में अपने कॉलेज लौटी तो उसने अलग-अलग समय पर अपने कुछ फैकल्टी से बातचीत की।
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उसने ब्लॉग पर लिखा, चूंकि घटना इंटर्नशिप के दौरान हुई थी और विश्वविद्यालय की इंटर्नशिप के दौरान महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ कोई नीति नहीं है तो मुझे संकेत दिया गया कि कोई भी कार्रवाई निष्प्रभावी होगी।
मुझे यह भी सूचित किया गया कि मेरे पास केवल एक ही रास्ता है कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाए जो मैं करना नहीं चाहती थी।
बहरहाल, मैं महसूस कर रही थी कि युवा विधि छात्रों को सतर्क करना जरूरी है इसलिए मैंने ब्लॉग पोस्ट के जरिए ऐसा करने का रास्ता चुना।
इंटर्न ने कहा है कि जस्टिस गांगुली के खिलाफ आरोपों की जांच करने वाली तीन जजों की समिति के समक्ष गवाही के दौरान उसने स्थिति की गंभीरता देखते हुए कार्यवाही की गोपनीयता और इस मामले में शामिल हर किसी की निजता सुनिश्चित करने की अपील की थी।
उसने लिखा है, मैंने तीन सदस्यीय जजों की समिति की नीयत और क्षेत्राधिकार पर किसी भी समय सवाल नहीं उठाया और पूरा भरोसा था कि वे मेरे बयानों की सचाई को मानेंगे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति ने जांच के बाद कहा था कि पीड़िता का लिखित और मौखिक बयान प्रथम दृष्टया खुलासा करता है कि पिछले साल 24 दिसंबर को होटल के कमरे में न्यायाधीश ने उसके साथ ‘यौन प्रकृति का अस्वागतयोग्य व्यवहार’ किया था।
ब्लॉग पर इंटर्न
जो भी यह दावा कर रहा है कि मेरे बयान गलत हैं, वह न केवल मेरी बेइज्जती कर रहा है बल्कि सुप्रीम कोर्ट का भी अपमान कर रहा है।
मैं अपील करती हूं कि इस बात का संज्ञान लिया जाए कि यह मेरे विवेकाधीन है कि मैं उचित समय पर उचित कार्यवाही आगे बढ़ा सकती हूं।
मैं कहना चाहती हूं कि मेरी स्वायत्तता का पूरी तरह सम्मान किया जाए। मैं कहना चाहूंगी कि मैंने पूरे मामले में, इस स्थिति की गंभीरता ध्यान में रखते हुए, बेहद जिम्मेदारी के साथ काम किया है। 18 नवंबर को समिति के सामने पेश होने और बयान देने के बाद मैंने समिति को अपने हस्ताक्षर के साथ एक लिखित बयान भी सौंपा था।
29 नवंबर को मैंने अतिरक्त महाधिवक्ता इंदिरा जयसिंह को एक हलफनामा भेजकर उसमें यौन शोषण की घटना से जुड़ी जानकारियां दीं और उनसे उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया। हलफनामे में वहीं चीजें थीं जो मैंने समिति के सामने दिए बयान में कहीं।
समिति की रिपोर्ट के हिस्से सार्वजनिक करने के बाद भी कई प्रतिष्ठित नागरिक और कानूनविदों ने समिति के निष्कर्षों का उपहास करना और मुझे बदनाम करना जारी रखा। इस कारण मैंने अपनी और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा की रक्षा के लिए अपने बयान के ब्यौरे स्पष्ट करना जरूरी समझा।
यह था पीड़िता का हलफनामा
गांगुली ने मुझे क्रिसमस की पूर्व संध्या पर एक रिपोर्ट पूरी करने के लिए अपने होटल के कमरे में बुलाया था। उन्होंने मुझसे कहा कि रिपोर्ट अगले दिन जमा करनी है और मैं होटल में हीं रुककर पूरी रात काम करूं। मैंने इनकार करते हुए कहा कि मुझे काम जल्द पूरा करना है और अपने पीजी हॉस्टल लौटना है।
कुछ देर बाद न्यायाधीश ने रेड वाइन की बोतल निकाली और वाइन पीते हुए कहा कि चूंकि तुम दिनभर काम करके थक गई होगी, तुम मेरे बेड रूम में चली जाओ और आराम कर लो।
उन्होंने यह भी कहा- तुम बहुत सुंदर हो। मैं तुरंत अपनी जगह से उठी और जब तक कुछ कहती उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर कहा कि तुम्हें पता है कि नहीं कि मैं तुम्हारे प्रति आकर्षित हूं?....लेकिन मैं तुम्हें पसंद करता हूं, मैं तुमसे प्यार करता हूं। जब मैंने वहां से हटने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा हाथ चूमते हुआ फिर कहा कि वह मुझसे प्यार करते हैं।