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इशरत जहां: आईबी में राजेंद्र के लिए नहीं है सहानुभूति

Mon, 08 Jul 2013 12:56 AM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
नई दिल्ली/गुंजन कुमार Updated Mon, 08 Jul 2013 12:56 AM IST
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intelligence bureau has not sympathy for rajendra kumar

खुफिया एजेंसी आईबी के निदेशक आसिफ इब्राहिम संस्था की गरिमा के नाम पर भले अपने संयुक्त निदेशक राजेंद्र कुमार का बचाव कर रहे हों। मगर कुमार के लिए महकमे में कोई सहानुभूति नहीं है।

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राजेंद्र कुमार सिर्फ इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर में ही संदिग्ध नहीं बल्कि सादिक जमाल फर्जी एनकाउंटर और अक्षरधाम हमले की जांच के हेरफेर में भी गहरे तौर पर संलिप्त हैं।
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इशरत जहां मामले की दूसरी चार्जशीट में राजेंद्र को आरोपी बनाने की तैयारी में जुटी सीबीआई सादिक जमाल मामले की जांच भी कर रही है।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि 13 जनवरी 2003 को अहमदाबाद में हुए सादिक एनकाउंटर के लिए राजेंद्र कुमार ने ही खुफिया जानकारी इकट्ठा की थी। इस पर आईबी के भीतर ही तगड़ा विरोध था।
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इस सवाल के साथ जब अमर उजाला ने आईबी के संबंधित अधिकारी से बात की तो कुछ नई बातें सामने आईं।

अधिकारी के मुताबिक सादिक जमाल के बारे में राजेंद्र कुमार का इंटेलीजेंस इनपुट सही नहीं था। राजेंद्र ने भावनगर निवासी सादिक जमाल को मुंबई से उठवाया था। इसमें मुंबई पुलिस का एक चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट शामिल था।

अधिकारी ने बताया कि राजेंद्र की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक सादिक को भी इशरत जहां और उसके साथियों की तरह मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का साजिशकर्ता बताया गया था। जबकि वह मुंबई में छोटी-मोटी सट्टेबाजी में लिप्त था।

अधिकारी ने बताया कि राजेंद्र कुमार के इस मनमाने रुख की वजह से आईबी का बड़ा तबका उन्हें पसंद नहीं करता। राजेंद्र के पुराने ट्रैक रिकार्ड से खुद आईबी प्रमुख आसिफ इब्राहिम और गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारी भी अनभिज्ञ नहीं हैं।

खुफिया एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इतना ही नहीं राजेंद्र ने 24 सितंबर 2002 में हुए गांधीनगर अक्षरधाम हमले की जांच में भी बड़ी गलती की है। इस मामले के छह दोषियों में सिर्फ शान मियां उर्फ चांद खान ही इस हमले की साजिश का असल सूत्रधार है।

बाकी पांच को पुराने अहमदाबाद से उठाया गया था। हालांकि उस दौरान लागू पोटा के तहत इस सभी पर मुकदमा चला और चांद मियां सहित तीन को फांसी की सजा सुनाई गई। बाकी तीन को क्रमश: उम्रकैद, दस और पांच साल की सजा सुनाई गई।

गौरतलब है कि अक्षरधाम हमले में दो पाकिस्तानी थे, जो वहीं सुरक्षा बलों की मुठभेड़ में मारे गए।

इन पाकिस्तानियों को मदद करने वाला चांद खान बरेली का रहने वाला है, जिसे जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग से आईबी की ऑपरेशन विभाग की टीम ने गिरफ्तार कर गुजरात पुलिस को सौंपा था। बाकी की गिरफ्तारी राजेंद्र कुमार की देखरेख में अहमदाबाद से ही की गई थी।

सादिक के भाई ने कोर्ट में लगाई गुहार
सादिक जमाल के भाई शाबिर जमाल ने गुजरात की अदालत में अर्जी दी है कि सादिक फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई आईबी अधिकारी राजेंद्र कुमार, गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के रोल की जांच करे। अदालत 6 अगस्त को इस पर सुनवाई करने वाली है।


इसी तरह इस मामले के आरोपी गुजरात पुलिस के डिप्टी एसपी तरुण बरोट ने भी अदालत से लिखित गुजारिश की है कि सादिक के आतंकी होने के बारे में राजेंद्र कुमार के इंटेलिजेंस इनपुट और उनके रोल की गहन जांच की जाए क्योंकि उन्हीं ने सादिक को आतंकी बता कर उन्हें सौंपा था। बरोट की इस अर्जी पर अदालत इसी महीने की 17 तारीख को फैसला सुनाएगी।

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