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भगवान के बाद 9 हजार किसानों पर अब सरकार का 'कहर'

Tue, 14 Apr 2015 11:05 PM IST
Updated Tue, 14 Apr 2015 11:05 PM IST
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insurance company rejected the farmers claim

ओलावृष्टि और बेमौसम बरसात की मार से तबाह किसानों को बीमा कंपनी ने 20 करोड़ रुपये का झटका दिया है। सहकारी समितियों की ओर से किसानों की फसल के बीमा की प्रीमियम धनराशि को बीमा कंपनी ने रिजेक्ट कर दिया है। इससे जिले के तबाह हुए किसानों को फसल के बीमा का एक धेला भी नहीं मिलेगा।

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जिले में करीब डेढ़ लाख से ज्यादा किसान सहकारी समितियों से जुडे़ हैं। फसल संबंधी ऋण का लेनदेन भी उनके द्वारा समितियों के माध्यम से ही किया जाता है। इस बार रबी की फसल के लिए जिले में सहकारी समितियों ने दिसंबर 2014 तक 9,427 किसानों को फसली बीमा के लिए सहमत किया।
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इन किसानों से 1693 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से बीमा राशि जुटा कर सहकारी बैंक ने 1.22 करोड़ रुपये की प्रीमियम धनराशि बीमा कंपनी को किसानों की लिस्ट के साथ भेज दी।
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फसल का हाल बिगड़ते देख बीमा कंपनी ने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों से जुटाई गई बीमा प्रीमियम राशि 1.22 करोड़ रुपये मार्च माह में लेने से ही इंकार कर दिया। इससे जिले के 9,427 किसान वर्तमान बर्बादी के दौर में फसली बीमा का लाभ पाने से वंचित हो गए हैं।

प्रति हेक्टेयर 28 हजार मिलते किसानों को

insurance company rejected the farmers claim

सहकारिता से जुड़े इन किसानों की फसल का बीमा हो जाता तो किसानों को प्रकृति की मार के बाद बड़ी राहत मिलती। 1.22 करोड़ रुपये की इस प्रीमियम धनराशि से कुल 7,147 हेक्टेयर कृषि भूमि का बीमा होना था। प्रशासन ने फसलों में शत प्रतिशत नुकसान का आकलन किया है। ऐसे में किसानों को प्रति हेक्टेयर 28 हजार रुपये बीमा धनराशि मिलती। जो करीब 20 करोड़ बनती है।

वहीं जिला सहकारी बैंक के सचिव भूपेन्द्र सिंह चौहान का कहना है कि बीमा कंपनी मनमानी कर रही है। सहकारी समितियों के माध्यम से सबसे अधिक फसली ऋण वितरण हो रहा है।

ये प्रक्रिया रबी की फसल के लिए 31 मार्च तक चली। ऐसे में बीमा प्रीमियम की राशि इसी तिथि तक किसानों से ली गई है, लेकिन बीमा कंपनी इन किसानों का बीमा करने से इंकार कर रही है।

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