बीमा बिल को कैबिनेट की मंजूरी, राज्यसभा में होगा पेश
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केंद्रीय कैबिनेट ने बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने संबंधी बीमा संशोधन विधेयक को बुधवार रात अपनी मंजूरी दे दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में विधेयक में राज्यसभा की प्रवर समिति द्वारा दिए गए सुझावों को शामिल कर लिया गया। इससे पहले प्रवर समिति की रिपोर्ट बुधवार को ही राज्यसभा में पेश की गई। अगले सप्ताह राज्यसभा विधेयक पर विचार कर सकती है।
प्रवर समिति की रिपोर्ट में बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी विदेशी निवेश की सिफारिश की गई है। केंद्र के लिए राहत की बात यह है कि इस रिपोर्ट में कांग्रेस ने भी विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने पर सहमति जताई है। वहीं टीएमसी, माकपा, सपा और जदयू के सदस्यों ने रिपोर्ट के साथ अपनी असहमति लगाई है।
अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा की जनवरी में भारत यात्रा से पहले सरकार विधेयक को पारित कराने की कोशिश में है। इसलिए वह जल्द ही विधेयक को संसद की मंजूरी के लिए पेश करेगी। राज्यसभा की प्रवर समिति के 15 में से चार सदस्यों ने इसका विरोध किया।
रिपोर्ट राज्यसभा में पेश
माकपा के पी राजीव, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन, सपा के रामगोपाल यादव और जदयू के केसी त्यागी ने असहमति पत्र पेश किया है। कांग्रेस ने हालांकि कहा है कि संसद में पारित होने वाले बिल का अंतिम स्वरूप देखने के बाद ही समर्थन देने के मुद्दे पर फैसला करने की बात कही है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बीमा विधेयक यूपीए सरकार का एजेंडा था, जिसे भाजपा ने सफल नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि सेलेक्ट कमेटी रिपोर्ट से पार्टी ने इसलिए सहमति जताई है, क्योंकि वह बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश के पक्ष में है।
बीमा विधेयक की मंजूरी के लिए सरकार के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में वह अल्पमत है। राज्यसभा में कांग्रेस के पास पर्याप्त बहुमत है। ऊपरी सदन में कांग्रेस के 69 और भाजपा के 45 सदस्य हैं। कांग्रेस के साथ के बाद उसे सदन में बिल को पास कराने में कोई कठिनाई नहीं आएगी।