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महिलाओं का ‘अपमान’ मतलब यौन उत्पीड़न

Thu, 27 Nov 2014 03:43 PM IST
Updated Thu, 27 Nov 2014 03:43 PM IST
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Insult of a Woman would be Considered As Sexual Assault

महिलाओं के ‘अपमान’ को भी अब यौन उत्पीड़न माना जाएगा। सरकारी कर्मचारियों के लिए तैयार सेवा नियमों में किए गए संशोधन के मुताबिक अगर कार्यस्थल पर किसी महिला के साथ किए गए अपमान का असर उसकी सेहत पर पड़ता है, तो उसे यौन उत्पीड़न ही माना जाएगा।

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नए नियमों के मुताबिक किसी को तरजीह देने का वादा करना या नुकसान पहुंचाने वाला बर्ताव करना भी इसी श्रेणी के तहत अपराध माना जाएगा।

कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन के मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। महिलाओं के लिए कार्यस्थल को ज्यादा अनुकूल बनाने और यौन उत्पीड़न की परिभाषा को ज्यादा विस्तृत करने के उद्देश्य से 19 नवंबर को मंत्रालय ने सेवा नियमों को संशोधित किया था। जितेंद्र सिंह ने कहा, ‘किसी को तरजीह देने का वादा करना, नुकसान पहुंचाने वाला बर्ताव करना, धमकी देना या अपमानजनक व्यवहार, इस तरह के कारणों महिलाकर्मी का स्वास्थ्य या सुरक्षा प्रभावित होती है और इसे यौन उत्पीड़न ही माना जाएगा।’ इसके अलावा महिलाकर्मी के काम में हस्तक्षेप करना या डर पैदा करने वाले माहौल को भी यौन उत्पीड़न ही माना जाएगा।

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ज्यादा स्पष्ट हो सकेंगे अपराध

Insult of a Woman would be Considered As Sexual Assault

माना जा रहा है कि इन नए नियमों से यौन उत्पीड़न से संबंधित अपराध ज्यादा स्पष्ट हो सकेंगे।

केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 1964 के मुताबिक छूने की कोशिश करना, यौन संबंध बनाने की मांग करना, अश्लील चीजें दिखाना और किसी भी तरह से बोले या फिर बिना बोले यौन प्रकृति का गलत आचरण करना यौन उत्पीड़न माना जाएगा।

केंद्र सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय सहायता लेने वाला प्रत्येक विभाग, संगठन, उपक्रम, संस्थान, उद्यम, कार्यालय, शाखा या यूनिट पर नए नियम लागू होंगे।

पिछले साल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए विधेयक, 2010 को हरी झंडी दे दी थी। इसका उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाना है।

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