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BHU: एक इंजेक्शन से 5 मरीजों की आंखों पर आफत

Mon, 01 Feb 2016 12:20 PM IST
Updated Mon, 01 Feb 2016 12:20 PM IST
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Injection creats eye sight risk 5 patients at BHU.

सर सुंदरलाल अस्पताल बीएचयू के नेत्र विभाग में संक्रमित इंजेक्शन लगाए जाने की वजह से पांच मरीजों की आंख की रोशनी खतरे में पड़ गई है।

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आंख के परदे में सूजन आने की शिकायत लेकर आए सात मरीजों को ये इंजेक्शन लगाया गया था, जिनमें से पांच मरीजों ने अपनी एक आंख की रोशनी चली जाने की समस्या घरवालों से बताई। रविवार को उनके परिवार वालों ने इंजेक्शन देने वाले बीएचयू चिकित्सक के खिलाफ लंका थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। इस बीच वाराणसी के जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
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उधर, चिकित्सक का कहना है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। दवा कंपनी द्वारा संक्रमित इंजेक्शन बेचा गया है। सभी के आंख की पूरी रोशनी वापस आ जाएगी। पूरे मामले की जांच के लिए सीएमओ ने एडिशनल सीएमओ के नेतृत्व में मेडिकल बोर्ड के गठन की घोषणा की है।
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बीते 28 जनवरी को बीएचयू अस्पताल के नेत्र विभाग में सात मरीजों को डॉ. ओपीएस मौर्या के परामर्श पर एवेस्टीन इंजेक्शन लगाया गया था। जिनकी आंखों के परदे (रेटिना) में सूजन की शिकायत होती है, उन्हें ये इंजेक्शन लगाया जाता है। इस इंजेक्शन की एक किट से दस मरीजों को सूई लगाई जाती है।

इंजेक्शन में पाया गया नुकसानदेह बैक्टीरिया

Injection creats eye sight risk 5 patients at BHU.

सात मरीजों के तीमारदारों ने मिलकर 23,500 रुपये में इंजेक्शन की एक किट बीएचयू परिसर के बाहर लंका स्थित दवा की एक दूकान से खरीदी। 28 जनवरी को इंजेक्शन लगवाने के बाद मरीज अपने-अपने घर चले गए थे।

मगर, 29 जनवरी को सात में से पांच मरीज अपनी एक आंख की रोशनी जाने की शिकायत लेकर फिर से डॉक्टर के पास पहुंचे। तब डॉ. ओपीएस मौर्या ने आईएमएस बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से इंजेक्शन की जांच कराई।

डॉ. मौर्या का कहना है कि जांच रिपोर्ट में इंजेक्शन में ग्राम निगेटिव बैसिलाई नामक खतरनाक बैक्टीरिया पाया गया। इससे आंख की रोशनी जाने की आशंका अधिक रहती है। इसी की वजह से मरीजों को दिक्कत हुई है।

इस पूरे मामले में उन्होंने इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी की गलती के चलते ही उसमें यह बैक्टीरिया विकसित हुआ है। हालांकि, उनका कहना है कि मरीजों की आंख पूरी तरह से ठीक हो जाएगी।

डॉक्टर के खिलाफ थाने में की रोशनी जाने की शिकायत

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उधर, मरीजों के परिवार वालों का आरोप है कि जब डॉक्टर से आंख की रोशनी जाने की शिकायत की गई तो वे हमें निजी अस्पताल में दिखाने की सलाह देने लगे। उन्होंने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत लेकर मरीज लंका थाने पहुंचे और डॉक्टर के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।

लंका थानाध्यक्ष संजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि शिकायत लेकर चार लोग मेरे पास आए थे। मामला डॉक्टर से संबंधित था इसलिए मैंने सीएमओ से बात की। सीएमओ की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उधर, सीएमओ डॉ. आरआर राय ने बताया कि एडिशनल सीएमओ के नेतृत्व में मेडिकल बोर्ड का गठन कर मामले की जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट के आधार जो भी दोषी होगा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

इन सात मरीजों को लगाया गया था इंजेक्शन
आत्माराम सिंह (मिर्जापुर), हरिहर सिंह (शिवपुर), लक्ष्मण शर्मा (जेपिस नगर), विनोद कुमार सिंह (पटिया), राम गहन प्रजापति, कमला सिंह और जगदीश।

इन पांच मरीजों ने की रोशनी जाने की शिकायत

आत्माराम सिंह, हरिहर सिंह, लक्ष्मण शर्मा, विनोद कुमार सिंह, कमला सिंह।

डॉक्टर ने कहा- ठीक हो जाएगी आंख

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अब कहां जाएंगे हम, कैसे कटेगा जीवन
लंका थाने पहुंचे आत्माराम सिंह, हरिहर सिंह, लक्ष्मण शर्मा और विनोद कुमार सिंह सहित अन्य का कहना था कि अब हमारा जीवन कैसे कटेगा। बिना आंख के हम भला क्या कर पाएंगे। हम सभी ने डॉक्टर की सलाह पर इंजेक्शन लगवाया था।

हमारा जीवन ही बरबाद हो गया। यह कहते हुए वे रोने लग रहे थे। यह देख थाने पर मौजूद लोग भी खासे चिंतित दिखे। सभी का कहना यही रहा कि गलती चाहे डॉक्टर की हो, चाहे दवा कंपनी की या फिर किसी और की, भुगतना तो मरीजों को ही पड़ रहा है।

मेडिकल काउंसिल से करेंगे दवा कंपनी की शिकायत
बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में मरीजों को संक्रमित इंजेक्शन लगाए जाने के मामले की शिकायत मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग से की जाएगी। आईएमए परिसर में रविवार की शाम दौरान डॉ. ओपीएस मौर्या ने पत्रकारों से ये बात कही। उन्होंने मरीजों के इलाज में लापरवाही के आरोप को निराधार बताया।

उन्होंने कहा कि बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी लैब में जांच के बाद इसका खुलासा हुआ कि इंजेक्शन में खतरनाक बैक्टीरिया थे। इस मामले में आईएमए पदाधिकारियों के साथ बातचीत कर सोमवार को लिखित शिकायत कर दवा कंपनी पर इस बैच के इंजेक्शन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही मरीजों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग करेंगे।

डॉ. मौर्या ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए अगर मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाता है तो उसमें बनारस से बाहर के चिकित्सकों को भी शामिल किया जाए, जिससे निष्पक्ष जांच हो सके। इस दौरान नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग टंडन, डॉ. अभिषेक चंद्रा भी मौजूद रहे।

...और मरीजों की भी जा चुकी है रोशनी

Injection creats eye sight risk 5 patients at BHU.

सर सुंदरलाल अस्पताल बीएचयू में इंजेक्शन लगाने के बाद आंख की रोशनी के जाने का ये मामला पहला नहीं है। इसके पहले दूसरे शहरों में भी एवेस्टीन इंजेक्शन लगाए जाने से मरीजों के आंख की रोशनी जा चुकी है।

पांच साल पहले कानपुर व गुजरात और अभी छह महीने पहले चित्रकूट में भी यही इंजेक्शन लगने के बाद मरीजों के आंख की रोशनी चली गई थी।

अब सवाल उठता है कि इस इंजेक्शन को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अब तक प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया जिसकी वजह से लोग दुनिया देखने से महरूम हो रहे हैं...?

चर्चा ये भी है कि जिस बैच के इंजेक्शन में ये संक्रमण पाया गया है उसे कंपनी दवा विक्रेताओं से वापस ले रही है।

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