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अस्पताल में नवजात को कमोड में ठूंसा

Thu, 11 Sep 2014 09:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Thu, 11 Sep 2014 09:12 AM IST
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inhuman act with infant in bagpat hospital

यूपी में बागपत के जिला अस्पताल में बुधवार को नवजात बच्चे की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। पीड़ित महिला के पति का आरोप है डॉक्टरों की लापरवाही से उसकी पत्नी की डिलीवरी शौचालय में हो गई और अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए उसके नवजात बच्चे को शौचालय के कमोड में सरियों से ठूंसकर छुपाया गया।

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इस दौरान बसपा विधायक लोकेश दीक्षित समर्थकों के साथ सीएमएस की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। सीएमएस ने बताया गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई है। उधर, विधायक के रवैये के विरोध में डॉक्टर ओपीडी छोड़कर हड़ताल पर चले गए। सूचना मिलने पर डीएम धनलक्ष्मी के. ने एसडीएम को मामले की जांच के आदेश दिए। 
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गांव निवाड़ा निवासी शाहरुख ने बताया कि उसकी पत्नी खुश्बू को तेज बुखार था। उसके गर्भ में साढ़े सात माह का बच्चा था। वह उसे लेकर मंगलवार को देर शाम जिला अस्पताल पहुंचा। वहां के डॉक्टरों ने उसके इलाज में लापरवाही बरती। इससे उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। उसे दवा भी सही नहीं दी। वह रात 11 बजे पेशाब करने शौचालय गई। बाद में वह बेहोशी की हालत में लौटी। उसके गर्भ में बच्चा नहीं था। एक नर्स ने उससे सरिया मंगवाया। उसे नहीं मालूम था सरिये से उसके बच्चे को शौचालय के कमोड में ठूंसकर छुपाया जा रहा है।
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बच्चे की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा

inhuman act with infant in bagpat hospital

रातभर ढूंढने के बाद सुबह छह बजे उसे बताया कि उसकी पत्नी की डिलीवरी शौचालय में ही हो गई थी। शाहरुख ने कहा उसके बच्चे को सरिये से कमोड में ठूंसना क्रूरता की हद पार कर दी। यह सुनकर निवाड़ा से उसके साथ पहुंचे लोग भी भड़क गए और हंगामा कर दिया।

सूचना पर दोपहर करीब 11 बजे विधायक लोकेश दीक्षित अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और इस मामले में सीएमएस की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। इसका पता चलते ही सीएमएस ने डाक्टरों के साथ मीटिंग की। इसके बाद अस्पताल के चिकित्सकों ने हड़ताल कर दी। अस्पताल के स्टाफ ने मरीजों को निकालकर अस्पताल में ताला लगा दिया। एसडीएम और सीओ ने डॉक्टरों को बहुत समझाया, तब दो घंटे बाद हड़ताल खुली।

जांच के आदेश
मामले की सूचना मिलते ही डीएम ने एसडीएम राकेश कुमार को मामले की जांच सौंपी। सीओ एनपी सिंह ने कहा तहरीर दो, जो दोषी है, उस के खिलाफ कार्रवाई होगी। तब जाकर दोपहर दो बजे हंगामा रुका।

सीएमएस डॉ. बीएल कुशवाहा ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कोई गलती नहीं है। महिला की डिलीवरी नहीं, बल्कि शौचालय में गर्भपात हुआ। बच्चे की मौत गर्भ में ही हो गई थी।

महिला अस्पताल में फिर शर्मसार हुई मानवता

inhuman act with infant in bagpat hospital

ललितपुर में महिला अस्पताल के कर्मचारियों ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार किया है। प्रसव को आई गर्भवती महिला को नर्स ने डॉक्टर से मिलाए बगैर भगा दिया गया, जिसके चलते उसका रास्ते में ही प्रसव हो गया। नाराज परिजनों व मुहल्लेवासियों ने अस्पताल के बाहर नारेबाजी की। मौके पर पहुंची एसडीएम सदर ने न सिर्फ स्टाफ नर्स को फटकार लगाई, बल्कि डॉक्टर को भी आड़े हाथों लिया।

सिविल लाइंस अंतर्गत सदनशाह क्षेत्र निवासी आश्मा बानो पत्नी रसूल खां को मंगलवार की रात 10 बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे लेकर महिला अस्पताल पहुंचे, जहां मौजूद स्टाफ नर्स ने जांच कर प्रसव देर में होने की बात कहकर घर जाने की सलाह दी। रात एक बजे पीड़ा होने पर परिजन फिर उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। प्रसव कक्ष में मौजूद नर्स ने उसको फिर से भगा दिया। बुधवार सुबह चार बजे प्रसूता के परिजनों से तीसरी बार भी यही व्यवहार किया गया। मायूस होकर परिजन प्रसूता को घर ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसे प्रसव हो गया। अस्पताल कर्मियों की उपेक्षा से प्रसूता के परिजनों में आक्रोश फैल गया। मुहल्लेवासी भी मौके पर एकत्रित होने लगे। बाद में अस्पताल परिसर में जमकर नारेबाजी की। घटना की सूचना पाकर एसडीएम सदर पूनम निगम मौके पर पहुंच गईं।

इधर, हालात की भनक लगने पर कर्मियों ने प्रसूता के घर एंबुलेंस भेजकर उसे अस्पताल बुलवा लिया। इसके बाद एसडीएम सदर ने प्रसव कक्ष पहुंचकर जांच शुरू की। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. मुकेश चंद्र दुबे, उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. जे एस बख्शी एवं प्रभारी सीएमएस डा. राज नारायण भी वहां पहुंच गए। स्वास्थ्य अफसरों के समक्ष प्रसूता ने एसडीएम सदर को बताया कि उसे प्रसव के लिए तीन बार अस्पताल लाया गया, लेकिन स्टाफ नर्स ने डॉक्टर को दिखाना मुनासिब नहीं समझा और उसे उल्टे पांव लौटा दिया। इसके बाद एसडीएम सदर ने सीएमएस कक्ष में स्टाफ नर्स एवं डॉक्टर के  बयान लिए। डॉक्टर ने बताया कि वह 24 घंटे से ड्यूटी कर रही थी। उन्हें प्रसूता के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। एसडीएम सदर ने स्टाफ नर्स को कड़ी फटकार लगाई। एसडीएम ने पूरे मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपने की बात कही है।

20 दिन में सड़क पर प्रसव की दूसरी घटना
22 अगस्त को महिला अस्पताल के प्रसव क क्ष से सुरईघाट निवासी विक्षिप्त गर्भवती महिला को भगा दिया गया था। पीड़ा से कराहती महिला किसी तरह सदनशाह चौराहे तक पहुंच पाई थी कि यहां इमली के पेड़ के नीचे उसे प्रसव हो गया था। उस घटना को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ओ पी वर्मा ने एसडीएम सदर के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। उस मामले की अभी जांच चल रही है। बुधवार की सुबह इसकी पुनरावृति हो गई है।

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