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महंगाई के सामने बेबस दिखी मोदी सरकार

Mon, 01 Sep 2014 03:11 PM IST
Updated Mon, 01 Sep 2014 03:11 PM IST
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inflation is a big challange for modi government
अबकी बार महंगाई पर वार का नारा देकर सत्ता में आई मोदी सरकार पहले दिन से महंगाई के मोर्चे पर जूझ रही है। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में मूल्य स्थिरता कोष और नेशनल एग्री मार्केट जैसी पहल के बूते महंगाई रोकने का दम भरा था।
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लेकिन पिछले तीन महीने से महंगाई की मार बदस्तूर जारी है। फर्क इतना है कि इस बार प्याज नहीं टमाटर 80 रुपये किलो बिक रहा है। खाने-पीने की चीजों की महंगाई बेलगाम होती जा रही है।
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राहत सिर्फ इतनी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने से पेट्रोल करीब तीन रुपये सस्ता हुआ है। लेकिन महंगाई की समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय मोदी सरकार इस जिम्मेदारी को राज्यों के कंधों पर डाल रही है।
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मोदी सरकार के 100 दिन खट्टे मीठे अनुभवों वाले रहे। पीएम ने आते ही कड़े फैंसले लिए और भविष्य की कार्ययोजना भी जाहिर की। सरकार की कुछ चुनौतियां अभी जस की तस हैं कुछ ऐसे फैंसले बाकी हैं जिन पर सभी की निगाहें टिंकी हैं।

फैंसले जिन पर रहेगी नजर
-नेशनल एग्री मार्केट व फूड ग्रिड की स्थापना
-भारतीय खाद्य निगम का विभाजन
-कीमत स्थिरता कोष
-मंडी कानूनों में सुधार
-प्राकृतिक गैस की नई कीमतें


100 दिनों का कमाल नहीं है जीडीपी के अच्छे दिन

inflation is a big challange for modi government

बीते तिमाही में देश के विकास की रफ्तार में 5.7 फीसदी का इजाफा हुआ है। जो बीते 9 तिमाही यानी लगभग ढ़ाई साल में सबसे अधिक विकास का आंकड़ा है।

इस आंकड़े के आते ही केंद्र सरकार के मं‌त्रियों में इसका श्रेय लेने की होड़ मच गई जबकि हकीकत यह है कि 5.7 फीसदी का यह आंकड़ा अप्रैल 2014 से जून 2014 के बीच का है।

मोदी सरकार 26 मई को सत्ता में आई और सत्ता के महज एक माह के भीतर विकास ने अगर यह रफ्तार भरी है तो इसे चमत्कार माना जाना चाहिए लेकिन हकीकत कुछ और है।

14 फीसदी बढ़ा रेल किराया

मोदी सरकार ने रेल बजट से पहले ही रेल यात्री किराया 14 फीसदी और मालभाडा 6.5 फीसदी बढ़ाकर सबको चौंका दिया था। रेलवे की दशा सुधारने के नाम पर हुई यह वृद्धि यूपीए के समय से प्रस्तावित थी।

लेकिन मोदी सरकार के इस कदम से न सिर्फ आम जनता पर बोझ बढ़ा बल्कि माल ढुलाई भी महंगी हुई।

सूखे ने बढ़ाया महंगाई का खतरा

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कमजोर मानसून मोदी सरकार की पहली अग्निपरीक्षा बन सकता है। पिछले छह महीने में खेती पर ओलावृष्टि, सूखे और कई जगह बाढ़ की मार पड़ने से धान, दलहन और तिलहन के उत्पादन को झटका लग सकता है।

बेअसर मंडी सुधार
महंगाई पर काबू पाने के लिए मोदी सरकार भी जमाखोरों और बिचौलियों पर कड़ी कार्रवाई की बात करती रही। फल-सब्जियों को मंडी कानून की जकड़ से मुक्त करने के तमाम दावे किए।

आलू और प्याज पर स्टॉक सीमा लागाने की छूट भी दी गई। लेकिन इन कोशिशों का दारोमदार राज्यों के ऊपर है। आलू और प्याज के निर्यात पर समय रहते अंकुश लगाकर सरकार ने समझदारी जरूर दिखाई, लेकिन किसान और उपभोक्ता के बीच कीमतों के बढ़ते अंतर को पाटने की ठोस पहल का इंतजार जारी है।

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