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अब मोदी की पीएम दावेदारी को अमेरिका में मिला समर्थन
एजेंसी/नई दिल्ली, वाशिंगटन
Updated Sat, 28 Sep 2013 12:05 AM IST
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अमेरिका गुजरात दंगों के बाद भले नरेंद्र मोदी को वीजा देने से इंकार करता रहा हो पर उसके दो शीर्ष स्कॉलरों का मानना है कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बने तो वाशिंगटन-नई दिल्ली के रिश्ते और मजबूत होंगे।
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इन अमेरिकी स्कॉलरों का मानना है कि मोदी के पीएम बनने पर दोनों देशों के संबंधों में कोई बुनियादी बदलाव शायद ही आए।
कार्नेगी इंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एश्ले टेलिस ने पत्रकारों से कहा, ‘मेरा मानना है कि मोदी के पीएम बनने पर दोनों देशों के रिश्तों में शायद ही कोई बुनियादी बदलाव आए, बल्कि इसमें और मजबूती आ सकती है।’
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भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार में प्रमुख भूमिका निभाने वाले टेलिस ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में काफी बदलाव आया था।
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उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो वह इस परंपरा को कायम रखेगी क्योंकि अमेरिका को लेकर भाजपा का नजरिया प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह ही अनुकूल है।
उन्होंने कहा कि कई मायनों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को वर्ष 1998 और 2004 में शुरू हुए सुधारों का लाभ मिला है।
कार्नेगी के ही दूसरे स्कॉलर मिलन वैष्णव का कहना है कि अमेरिका भले ही मोदी को वीजा न देने की अपनी नीति पर चल रहा हो, लेकिन यदि वह प्रधानमंत्री बन गए तो समीकरण बदल जाएंगे।