भारत-आस्ट्रेलिया परमाणु करार पर मुहर
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ऑस्ट्रेलिया की ओर से भारत को परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए यूरेनियम आपूर्ति की बाधा हमेशा के लिए समाप्त हो गई है। दोनों देशों ने इससे संबंधित परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
भारत दौरे पर आए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने भारत को दुनिया का जिम्मेदार देश बताते हुए इस समझौते पर खुशी जताई है।
परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करने के कारण ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2012 में भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करने से मना कर दिया था। इस समझौते के साथ ही भारत दुनिया का पहला परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया है।
इसके साथ दुनिया के तीसरे नंबर के यूरेनियम उत्पादक देश ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर न करने के बावजूद इस आशय का समझौता किया है। एबॉट ने भारत यात्रा पर रवाना होने से पूर्व ही इस आशय के समझौते के साफ संकेत दिए थे।
परमाणु शक्ति संपन्न देश पाकिस्तान, इस्राइल और उत्तर कोरिया द्वारा संधि पर हस्ताक्षर न करने के कारण इन देशों का ऑस्ट्रेलिया के साथ परमाणु करार नहीं हो पाया है। भारत और आस्ट्रेलिया द्विपक्षीय संबंधों में और मजबूती लाने, निवेश और व्यापार के नए रास्ते तलाशने पर भी राजी हुए हैं।
भारत में परमाणु संयंत्रों के सुरक्षा मानक संबंधी सवाल के जवाब में एबॉट ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया भारत को एक जिम्मेदार देश मानता है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि भारत सुरक्षा मानकों की बेहतरी के दिशा में लगातार आगे बढ़ता रहेगा।
नेहरू जैकेट के बदले मिली गीता
भारत में इस समय छोटे स्तर के 20 परमाणु ऊर्जा उत्पादन संयंत्र हैं। हालांकि करार हो जाने के बाद भी यूरेनियम की आपूर्ति शुरू होने में अभी वक्त लगेगा, मगर इस समझौते के आधार पर नए संयंत्र स्थापित करने की योजना शुरू की जा सकेगी।
भारत में इस समय विद्युत उत्पादन मुख्य तौर पर कोयले पर निर्भर है। इस करार के बाद विद्युत उत्पादन में कोयले में निर्भरता कम होगी।
नेहरू जैकेट के बदले मिली गीता
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एबॉट ने नरेंद्र मोदी को ऑस्ट्रेलियाई ऊन से बनी खूबसूरत नेहरू जैकेट भेंट की। मोदी ने एबॉट को रिटर्न गिफ्ट के रूप में गीता की प्रति भेंट की। मोदी ने हालिया जापान दौरे पर वहां के प्रधानमंत्री को भी गीता भेंट की थी।
चोरी हुई मूर्तियां भी लौटी भारत
एबॉट ने इस दौरान दक्षिण भारत के मंदिरों से चुराई गई नटराज और अर्द्घनारीश्वर की मूर्तियां भी वापस की। भारत अरसे से 1100 से 1200 ईसा पूर्व की इन मूर्तियों को वापस करने की अपील करता रहा है।
इनमें से कांसे की बनी नटराज की मूर्ति द नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने 50 लाख डॉलर में न्यूयार्क में प्राचीन मूर्तियों के डीलर सुभाष कपूर से खरीदी थी।
जबकि पत्थर की बनी अर्द्घनारीश्वर की मूर्ति को भी कपूर से ही खरीदने की बात कही जा रही है। एबॉट ने इन मूर्तियों को वापस करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के आपसी रिश्ते और मजबूत होंगे।