धवन के खुलासे बढ़ा सकते हैं मेनका की मुश्किलें
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आपातकाल के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी सचिव रहे आरके धवन ने बड़ा खुलासा किया है।
धवन ने दावा किया है कि आपातकाल को लेकर राजीव गांधी और सोनिया गांधी को कोई अफसोस नहीं था। हालांकि मेनका गांधी के बारे में धवन ने बताया कि इस बारे में वो सबकुछ जानती थी। उन्हें पता था कि आखिर संजय गांधी क्या कर रहे हैं?
धवन के मुताबिक मेनका को अपने पति संजय गांधी के हरकदम की जानकारी थी इसलिए वो इससे अनजान होने का दावा नहीं कर सकती हैं।
आरके धवन के इन खुलासों के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान मेनका गांधी हो सकता है क्योंकि वह भाजपा में हैं और भारतीय जनता पार्टी हमेशा से आपातकाल का विरोध करती रही है। भाजपा की ओर से दावा किया जाता रहा है कि आपातकाल के दौरान उनके नेताओं को जेल भी जाना पड़ा था।
टाइम्स ऑफ इंडिया छपी खबर के मुताबिक धवन ने अंग्रेजी समाचार चैनल इंडिया टुडे में दिए खास इंटरव्यू में ये खुलासे किए हैं।
आरके धवन ने बताया इमरजेंसी का 'सच'
आरके धवन ने अपने खुलासों में इंदिरा गांधी का बचाव करते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी को आपातकाल के दौरान की गई ज्यादतियों जैसे जबरन नसबंदी और तुर्कमान गेट गिराने जैसे मामलों की जानकारी नहीं थी।
धवन के मुताबिक इस सबके लिए संजय गांधी अकेले जिम्मेदार हैं। इतना ही नहीं इंदिरा गांधी को तो इसकी भी जानकारी नहीं थी कि संजय गांधी मारूती प्रोजेक्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण कर रहे थे।
धवन के दावों पर गौर करें तो ये सबकुछ संजय गांधी की योजना थी जिसमें उन्होंने भी साथ दिया और मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगा।
आरके धवन ने वाशिंगटन पोस्ट की उस स्टोरी को भी खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि संजय गांधी अपनी मां का आदर नहीं करते थे और उन्होंने इंदिरा गांधी को 6 थप्पड़ भी मारे थे। धवन के मुताबिक संजय अपनी मां की बेहद इज्जत करते थे।
'मेनका को आपातकाल की पूरी जानकारी थी'
70 साल के हो चुके धवन ने बताया कि 1975 में इंदिरा गांधी को आपातकाल लगाने का विचार पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री एसएस रे ने दिया था। उन्होंने ही इसका असल वास्तुकार कहा जा सकता है।
धवन के दावों पर गौर करें तो आपातकाल की योजना काफी पहले ही बना ली गई थी। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी के चुनाव को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद उनके राजनीतिक करियर को बचाने के लिए आपातकाल नहीं लगाया गया। बल्कि इस मामले में इंदिरा गांधी खुद भी इस्तीफा देना चाहती थी। इस मामले में इस्तीफा लिखा जा चुका था लेकिन उन्होंने उस पर हस्ताक्षर नहीं किया था। हालांकि बाद में उनके चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ही उन्हें सशर्त प्रवास दिया था।
धवन की मानें तो आपातकाल की वजह उस दौरान गुजरे तीन-चार साल की घटनाएं थी। उन्होंने रेलवे हड़ताल, एलएन मिश्रा की हत्या, विपक्ष द्वारा सरकार को अपाहिज करने की कोशिश, जयप्रकाश नारायण का बढ़ता कद और पुलिस के नियमों की अनदेखी जैसे मुद्दों को इमरजेंसी की वजह बताया।
आपातकाल पर धवन ने इंदिरा का किया बचाव
आरके धवन ने खुलासा करते हुए कहा कि आपातकाल लगाने के विरोध में पूरी कैबिनेट से केवल कैबिनेट मंत्री स्वर्ण सिंह ने आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि आखिर आपातकाल की जरूरत क्या है और क्यों पूरा कैबिनेट इसका समर्थन कर रही है? हालांकि ये बैठक महज 15 मिनट में खत्म हो गई।
धवन ने बताया कि कैबिनेट के बाद इंदिरा गांधी और एसएस रे इस फैसले को लेकर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद के पास गए और उनसे कहा कि हम आपातकाल लगाना चाहते हैं। इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति ने भी हस्ताक्षर कर दिए। उन्हें इस फैसले में कोई हिचकिचाहट नहीं थी। राष्ट्रपति ने एसएस रे से इस फैसले का खाका मांगा। आधी रात से पहले ही धवन खुद पूरी रिपोर्ट के साथ राष्ट्रपति भवन हस्ताक्षर के लिए पहुंचे।
टीवी इंटरव्यू में धवन ने किए कई अहम खुलासे
आरके धवन के मुताबिक इस मुद्दे पर पूरी योजना 20-21 जून को इसको लेकर तैयारी की गई। इसमें ये भी लिस्ट बनी की आखिर किस-किस की गिरफ्तारी की जाएगी।
इसके बाद राज्यों को मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया और उन्हें आरएसएस से जुड़े लोगों और विपक्ष के नेताओं की पूरी लिस्ट दी गई जिन्हें गिरफ्तार करना था। इसकी पूरी योजना दिल्ली में बना ली गई थी।
धवन ने आगे बताया कि 1977 में इंदिरा गांधी ने चुनाव का ऐलान उस समय किया जब उन्हें आईबी ने बताया था कि चुनाव में उन्हें 340 सीटें आ सकती हैं।
इस मुद्दे पर मुख्य सचिव पीएन धार ने रिपोर्ट भेजी जिस पर इंदिरा ने विश्वास कर लिया। हालांकि इंदिरा को चुनावों में मिली हार का कोई अफसोस नहीं था।