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सागर में उतरा INS विक्रांत, जानिए, क्या है खूबियां

Mon, 12 Aug 2013 07:53 PM IST
कोच्चि/एजेंसी
कोच्चि/एजेंसी Updated Mon, 12 Aug 2013 07:53 PM IST
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indigenous aircraft carrier ins vikrant launched

स्वदेशी तकनीक से तैयार पहले विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का जलावतरण कर सोमवार को भारत युद्धपोत का डिजाइन एवं निर्माण करने की क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया।

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रक्षामंत्री ए के एंटनी की पत्नी एलिजाबेथ ने कोच्चि गोदी में 37,500 टन के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के जलावतरण की रस्म को पूरा कराया। युद्धपोत का डिजाइन नौसेना डिजाइन निदेशालय द्वारा तैयार किया गया है।
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एंटनी ने इस मौके को देश का ऐतिहासिक दिन करार देते हुए कहा कि, यह समूचे राष्ट्र के लिए बेहद गर्व का पल है, इसके जरिए हमने युद्धपोत डिजाइन एवं विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की है। अभी सिर्फ गिने-चुने देशों के पास इस तरह के विमानवाहक पोतों के डिजाइन एवं विनिर्माण की क्षमता है।
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रक्षामंत्री ने कहा कि यह देश में युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में लंबे सफर की ओर एक अहम कदम है। इस आकार के पोत के डिजाइन एवं निर्माण की क्षमता अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और फ्रांस के पास ही है।

आईएनएस विक्रांत को जलावतरण की प्रक्रिया के बाद आउटफिटिंग और अधिरचना के निर्माण के लिए फिर से गोदी पर ले जाया जाएगा। नौसेना के मुताबिक वर्ष 2016 से विक्रांत के गहन समुद्री परीक्षण शुरू हो जाएंगे। इसके बाद 2018 तक इसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है।

aircraft carrier
विक्रांत का विराट स्वरूप
24 मेगावाट ऊर्जा पैदा करने वाले चार गैस टर्बाइन
10 हजार वर्ग मीटर का डेक
260 मीटर लंबा, 62 मीटर चौड़ा, 50 फीट ऊंचा और 38 हजार टन वजनी
56 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार
7000 नॉटिकल मील की दूरी तय कर सकता है
16000 टन खास तरह के वेपन ग्रेड स्टील से निर्मित
1600 नौसैनिकों की क्षमता
30 लड़ाकू विमान या हेलिकॉप्टर ले जाने में सक्षम
45 मिनट में दो रनवे की बदौलत तीस लड़ाकू विमान कर सकते हैं टेक-ऑफ
- दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए अर्ली अलार्मिंग सिस्टम
- क्लोज इन विपन सिस्टम, वर्टिकल लांच सिस्टम, हाई सेंसटिव रडार सिस्टम
-मिग-29 के, एलएफए  कामोव -31 और सी किंग हेलीकॉप्टरों के अलावा हल्के लड़ाकू विमानों से लैस होगा
-सतह से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की एलआर सैम मिसाइलें भी होंगी तैनात

इतिहास दोहराएगा विक्रांत

आईएनएस विक्रांत का नाम देश के पहले युद्धपोत विक्रांत के नाम पर ही रखा गया है। वर्ष 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध में बेहद अहम भूमिका निभाने वाले विक्रांत को वर्ष 1997 में नौ सेना से विदाई दे दी गई थी।

फिलहाल भारतीय नौसेना के पास आईएनएस विराट युद्धपोत है। वर्ष 2018-19 में विक्रांत के नौ सेना शामिल होने के बाद इसे रिटायर कर दिया जाएगा।

इसके साथ ही रूस से खरीदे गए दूसरे विमान वाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य के भी इस वर्ष के अंत तक नौसेना को मिलने की उम्मीद है।

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