खाड़ी देश से भारतीयों का दुख भरा पैगाम
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ओमान की राजधानी मस्कट में उत्तर प्रदेश के पांच पेशेवर मजदूर अजीबोगरीब संकट में फंसे हैं।
अमर उजाला की फोन पर हुई बातचीत में इन लोगों ने अरब और खाड़ी देशों में मजदूरों की दलाली, उनकी बदहाली और भीषण शोषण का भंडाफोड़ किया है।
मस्कट में फंसे इन लोगों ने फोन पर बताया कि इनकी तरह हजारों मजदूरों की असल कहानी भारत सरकार तक नहीं पहुंच पा रही है।
आजमगढ़ के रहने वाले शंकर राम ने अपनी दास्तान सुनाते हुए कहा कि वह अपने साथियों के साथ दलालों के मकड़जाल में बुरी तरह से फंस चुके हैं। उनकी सुनने वाला भी कोई नहीं है।
शंकर के मुताबिक वह अपने चार साथियों के साथ मस्कट के पास सुहार कस्बे में कैदियों की तरह जिंदगी बीता रहे हैं। उनके पासपोर्ट एक अरब नागरिक अहमद अलवर्दी ने जब्त कर लिया है।
वह प्रत्येक पासपोर्ट के लिए 250 रियाल की मांग कर रहा है। इनके पास न तो पैसा है और न ही नौकरी। खाने पीने के लिए भी वह अलवर्दी पर निर्भर हैं।
शंकर के साथी राम ज्ञान ने बताया कि वह लोग 23 जनवरी को मस्कट पहुंचे तो वैसी कोई कंपनी नहीं मिली, जिसमें नौकरी का झांसा देकर उन्हें समीर ने भेजा था। उनकी मुलाकात वहां के दलाल अलवर्दी से हुई।
उसके बाद से परदेस में हर दिन एक साल की तरह बीत रहा है। यहां तक कि परिवार से बात करने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं है। उनकी मुलाकात ऐसे कई मजदूरों से हुई जो परिवार के लिए पैसे जमा करने के मोह में जिल्लत की जिंदगी जी रहे हैं।
अमर उजाला ने अलवर्दी से भी फोन पर (नं- 00968-99343150) बातचीत की तो नई कहानी सामने आई। उसने बताया कि उन्होंने दिल्ली के एक दलाल समीर खान को मोटी रकम देकर इन मजदूरों को बुलवाया है।
अब यह यहां आकर काम नहीं कर पा रहे। इन्हें तभी छोड़ा जाएगा जब वह अपने पैसे की वसूली लेंगे।
इधर दिल्ली में समीर खान गायब है। उसके राजौरी गार्डन के ए-88, आईएमआर बिल्डिंग के ऑफिस के पते पर समीर का पता नहीं। उसका मोबाइल (नं- 9891918757, 9212067193) लगातार बंद है।
शंकर के मुताबिक समीर ने इन पांचों से भी 50-50 हजार रुपये अलग से लिए थे।