पाकिस्तानी बेटी के लिए भारतीय बने 'मसीहा', जानिए कैसे?
पाकिस्तान की एक बच्ची और उसकी मां के लिए कुछ भारतीयों ने मसीहा की भूमिका अदा की। कुछ भारतीयों ने मिलकर 15 साल की कराची में रहने वाली सबा तारीक अहमद के इलाज के लिए करीब 13 लाख रुपए तक जमा किए।
इस बच्ची को विल्सन्स नाम की एक घातक बीमारी है, जिसके इलाज के लिए ये मां-बेटी पिछले 49 दिनों से भारत में थे। इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर में कॉपर की मात्रा जानलेवा स्तर तक बढ़ जाती है।
सबा का इलाज मुंबई के जसलोक अस्पताल में हो रहा था। अस्पताल के सीईओ डॉ. तपन गेनचंदानी ने कहा कि सबा और उसकी मां नाजिया ने सोमवार दोपहर के बाद कराची के लिए फ्लाइट ली है।
दो बार की मदद
सबा की ये कहनी सिर्फ इसलिए खास नहीं है कि भारतीयों ने सबा के इलाज के लिए पैसे इकट्ठा किए, बल्कि इसलिए और अधिक खास है कि इन्होंने अप्रैल से अक्टूबर के दौरान उसके इलाज के लिए दो बार पैसे इकट्ठा किए।
पहली बार अप्रैल-मई के दौरान एक एनजीओ ब्लूबेल्स कम्युनिटी ने मुंबई के लोगों से सबा के इलाज के लिए 7 लाख रुपए इकट्ठा किए।
इसके बाद स्वतंत्रता दिवस पर ऑनलाइन पैसे जमा करने की एक मुहिम शुरू की गई। इसके जरिए तीन महीने के इलाज के लिए पैसे जमा किए।