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बेड़ियों से आजाद होने को तड़पती आधी आबादी

Thu, 15 Aug 2013 01:17 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 15 Aug 2013 01:17 AM IST
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indian women want freedom

मैं नारी हूं। आप मुझे आदि शक्ति, सरस्वती, लक्ष्मी और न जाने कितनी उपाधियों से नवाज सकते हैं। मैं एक मां हूं, बहन भी हूं, पत्नी हूं, सखी हूं। लेकिन आजादी के पंख फैलाने के लिए आज भी तरस रही हूं।

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भारत माता को तो आजादी के दीवानों ने 1947 में अंग्रेजों के चंगुल से छुड़ा लिया। लेकिन मैं तो अपने ही देश में पैदा हुए दानवों के पैरों तले आज भी पिस रही हूं। आज भी मेरे पांव में बेड़ियां हैं।
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आंख में आंसू हैं। लाचार हूं। कभी कोई दरिंदा मेरी आबरू तार-तार करता है, तो कोई तेजाब फेंक चेहरे के साथ सारे सपने ही जला डालता है।

गैरों की बात क्या करूं, मेरे तो अपने ही मेरे अपने दुश्मन बन बैठे हैं। न जाने कितनी ही आंखों को खुलने से पहले ही कोख में भी बंद कर दिया जाता है।

कड़वा सच यह है कि आजादी के 66 साल बाद भी मैं गुलाम हूं। तड़प रही हूं। लड़ रही हूं। जूझ रही हूं। खुद के अस्तित्व के लिए। बीते एक साल में हमने तरक्की के कई मुकाम हासिल किए। लेकिन साथ ही मेरे खिलाफ अपराध का ग्राफ भी बढ़ता चला गया।
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सिर्फ 2012 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 2 लाख 44 हजार 270 मामले दर्ज किए गए। इस आजाद देश में घर से निकलते डर लगता है। न जाने कितने ही गिद्ध जिस्म नोचने को आंखें गड़ाए बैठे हैं।

24,923 मां-बहनों की आबरू तो पिछले एक साल में ही तार-तार हो गई। लेकिन क्या घर की चारदीवारी मेरे लिए महफूज है। लगता तो नहीं है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े मेरे अपनों के सितम की कहानी बयां करते हैं। वर्ष 2012 में ही 1,06,527 मामलों में महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार बनी।

बस एक ही सपना है आंखों में। पंख फैलाए उन्मुक्त गगन में ऊंची उड़ान भरूं। जहां मुझे खौफ न हो खुद के लुट जाने का। धुंधली सी आशा की किरण दिखती तो है, लेकिन...।


फिर भी संघर्ष जारी है
भारत में आज 11 फीसदी महिलाएं सीईओ के पद पर काम कर रही हैं। जबकि अमेरिका व ब्रिटेन में यह आंकड़ा महज तीन फीसदी है। भारतीय कंपनियों के निदेशक मंडल में 30 फीसदी महिला निदेशक हैं, जो कि अमेरिका में यह आंकड़ा महज 16.34 है। इसके अलावा संसद से लेकर सड़क तक हर कदम पर महिलाएं आगे बढ़ने को प्रयासरत हैं।

कुछ और कड़वे सच
--महिलाओं के सबसे खतरनाक माने जाने वाले देश में भारत चौथे नंबर पर।
--यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में कम उम्र में लड़कियों की शादी के 40 फीसदी मामले भारत में।
--देश में हर 20 मिनट में रेप की घटना होती है।

साल 2012 में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामलेः-
मामले---संख्या
अपहरण---38,262
महिलाओं पर हमला---45,351
छेड़छाड़---42,968
घरेलू हिंसा---1,06,527
बलात्कार---24,923
दहेज हत्या---8,233

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