फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   indian victim in yemen attack

'मौत से बचने के लिए सिलेंडर पर घंटों तैरते रहे भारतीय'

Sat, 12 Sep 2015 04:27 PM IST
Updated Sat, 12 Sep 2015 04:27 PM IST
विज्ञापन
indian victim in yemen attack

यमन के तट के पास समुद्र में एक गैस सिलेंडर पर वे चार घंटे तक तैरते रहे। जीने की आस छोड़ चुके भारतीय नागरिक किसी तरह जिंदा बच गए। यह आपबीती है उन भारतीयों की, जिन पर यमन के पास हमला किया गया था।

विज्ञापन


अस्पताल के बिस्तर पर घायल पड़े अकमल अली हारून जुनेजा ने टेलीफोन पर पूरी घटना सुनाई और खुद के जीवित बचे होने को महज इत्तेफाक करार दिया।

जुनेजा 21 लोगों की टोली में शामिल थे जो दो नावों पर सवार होकर यमन जा रहे थे। इन नावों पर हुए हवाई हमले में छह भारतीय मारे गए जबकि 14 जान बचाने में सफल रहे। एक भारतीय लापता है।

विज्ञापन

'नाव पर हमला'

indian victim in yemen attack

गुजरात के मांडवी तलाया कस्बे के रहने वाले जुनेजा ने कहा, "मैं मजदूरी करने के लिए दुबई गया था। कंपनी का नाम याद नहीं, पर जिस कंपनी ने नौकरी दी थी, उसने हम लोगों को यमन जाने को कहा।" उनका मानना था कि यमन और आसपास के इलाके में जो लड़ाई चल रही है, उससे उनका कोई वास्ता नहीं।

वह कहते हैं, "हमने सोचा, यह उनकी आपसी लड़ाई है, हमसे कोई मतलब नहीं। वे भला हम पर हमला क्यों करेंगे?" पर भारतीयों का यह सोचना गलत साबित हुआ।

ग्यारह भारतीय मजदूरों को लेकर ज्यों ही एक नाव बंदरगाह से निकली, उस पर हथगोला फेंका गया। नाव के कप्तान ने उन्हें तुरंत पानी में कूदने की सलाह दी। दूसरा कोई चारा भी नहीं था।

'गैस सिलेंडर पर चार घंटे'

indian victim in yemen attack

जुनेजा कहते हैं, "इसके बाद अगले चार घंटे तक हम एक गैस सिलेंडर को किसी तरह पकड़े रहे और बमुश्किल तैरते रहे। हमने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी पर होश आने पर हमने अपने आप को अस्पताल के बिस्तर पर पाया।"

स्थानीय मछुआरों की नज़र इन लोगों पर पड़ी और उन्होंने पानी में तैर रहे इन भारतीयों को बचाया। पर सभी लोगों की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं थी। चार लोग पानी में डूब कर मर गए।

भारत सरकार का एक नुमाइंदा उनसे अस्पताल में मिला और उनका हालचाल पूछा। लेकिन इसके अलावा और कोई सहायता उन्हें अब तक नहीं मिली है।

जुनेजा गुजारिश करते हैं, "किसी तरह हम लोगों को भारत पंहुचाने का इंतजाम करिए। हम जल्द से जल्द अपने देश लौटना चाहते हैं।" फ‌िलहाल, जुनेजा के साथ दूसरे छह लोग अस्पताल में हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed