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आतंकी हमले के बाद भारत की रणनीति पर संकट

Tue, 28 Jul 2015 12:33 PM IST
Updated Tue, 28 Jul 2015 12:33 PM IST
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Indian strategy Crisis on the After the terrorist attack

पंजाब के गुरदासपुर में सीमापार से हुए फिदायीन हमले ने नरेंद्र मोदी सरकार को सकते में डाल दिया है। पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के जम्मू-कश्मीर की दहलीज लांघकर पंजाब में आने की इस घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है।

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साफ संकेत हैं कि जम्मू-कश्मीर से सटे पंजाब में आतंकवाद के खतरे को भांपते हुए सुरक्षा रणनीति में व्यापक बदलाव किया जा सकता है।

आतंकवाद ग्रस्त जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर से इतर मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए इस पहले आतंकी हमले ने सरकार की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। इससे पाकिस्तान के साथ वार्ता की रणनीति पर संकट और गहराने के आसार बन गए हैं।
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गुरदासपुर में फिदायीन के पाकिस्तानी होने की शुरुआती सूचना मिलते ही संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वरिष्ठ कैबिनेट सहयोगियों के साथ इस पर चर्चा की।
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सरकार के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि इसमें कोई शक नहीं कि इस हमले के बाद उसके समक्ष सियासी रास्ते में दोधारी तलवार पर चलने की स्थिति पैदा हो गई है।

एक ओर एनडीए सरकार के आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की सख्त छवि को उसे कायम रखना है तो दूसरी ओर कूटनीतिक रास्ते पर चलते हुए पाकिस्तान के साथ वार्ता का रास्ता खुले रखने की मजबूरी।

आतंकी हमले ने बढ़ाई सरकार की चिंता

Indian strategy Crisis on the After the terrorist attack

सरकार के इस सूत्र का साफ कहना था कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की मिली भगत के बिना ऐसे फिदायीन हमले को अंजाम देना आसान नहीं है।

ऐसे में रूस के ऊफा में नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ में भारत-पाक के बीच वार्ता को आगे बढ़ाने की बनी सहमति पर खतरे के बादल मंडराने से इनकार नहीं किया जा सकता।

खासतौर पर यह देखते हुए कि विपक्षी दल जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही घुसपैठ और सीजफायर के उल्लंघन को लेकर सरकार पर पाक के साथ नरमी बरतने का आरोप लगा रहे हैं।

गुरदासपुर हमले को सरकार इस लिहाज से भी गंभीर मान रही है कि पाक परस्त आतंकवादियों ने इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे जम्मू-कश्मीर की सीमा से बाहर आतंक फैलाने में अब भी सक्षम हैं। सरकार बेशक गुरदासपुर हमले में खालिस्तानी तत्वों के सीधे तार जुड़े होने की संभावना नहीं देख रही है।

मगर विदेशों में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स सरीखे कुछ संगठनों को आईएसआई जिस तरह साधती रहती है उसको देखते हुए सरकार को लगता है कि अब भारी सतर्कता बरतने की जरूरत होगी, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में लगातार सघन मुस्तैदी को देखते हुए सीमा पार से आतंकी पंजाब के सटे इलाकों को सॉफ्ट टारगेट बना सकते हैं।

ऐसे में पंजाब में आतंकवाद से लड़ने की सुरक्षा रणनीति को नई चुनौतियों के अनुरूप बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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