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रेलवे को है अब फास्ट ट्रैक की जरूरत
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
Updated Tue, 19 Feb 2013 12:47 AM IST
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देश की लाइफ लाइन कही जाने वाली रेलवे की आर्थिक सेहत ठीक नहीं है। वह साल भर में जितना कमाती है, उसका 95 फीसदी व्यवस्था को चलाने में ही खर्च कर देती है।
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विकास एवं सुधार के लिए जरूरी खर्चों के लिए रेलवे को हमेशा केंद्र सरकार व अन्य संस्थानों के सामने हाथ फैलाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। रेलवे को अपनी इस हालत में सुधार के लिए योजनाओं को फास्ट ट्रैक पर लाना होगा। रेलवे को अपना चेहरा बदलना है तो उसे सामाजिक दायित्व उठाने की अपनी नीति में बदलाव करना होगा।
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इस समय प्रतिदिन ढाई करोड़ से भी ज्यादा लोग रेलवे से यात्रा करते हैं। इन पर रेलवे 70 फीसदी खर्च करके 30 फीसदी कमाता है। जबकि माल ढुलाई में रेलवे तीस फीसदी खर्च करके 70 फीसदी कमाई करता है। इस हालात को बदलना होगा। रेलवे की वर्तमान में माल ढुलाई में 29 फीसदी हिस्सेदारी है इसे भी बढ़ाने की जरूरत है। रेलवे को हालात बदलने के लिए नीतियों व प्राथमिकताओं को बदलना होगा। माल ढुलाई के लिए डेडीकेटेड कॉरिडोर तथा यात्री गाड़ियों को फास्ट ट्रैक पर लाना होगा।
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डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
आज से साठ साल पहले देश में माल ढुलाई का साठ फीसदी हिस्सा रेलवे के जिम्मे था लेकिन अब यह घटकर 29 फीसदी रह गया है। इसके लिए राजनैतिक हालात जिम्मेदार है। रेलवे की कमाई का दो तिहाई हिस्सा माल भाड़े से प्राप्त होता है। इसके बावजूद मालवाहक ट्रेनों की लगातार उपेक्षित किया जाता है। आज भी मालगाड़ियों की औसत स्पीड 25 से 30 किमी प्रति घंटा है। यात्री गाड़ियों को आगे निकालने के लिए अक्सर कई कई घंटे मालगाड़ियों को रास्ते में रोककर रखा जाता है।
अब रेलवे ने मालगाड़ियों के लिए डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया है। दो कॉरिडोर पर काम शुरू भी हो गया है। रेलवे चार अन्य कॉरिडोर निर्माण के लिए चिन्हित कर चुका है। देश के हर जरूरी हिस्से को ऐसे कॉरिडोर से जोड़ने के काम को अब फास्ट ट्रैक पर लाने की जरूरत है। इससे रेलवे की आमदनी में तेजी से वृद्धि होगी और वह रेलवे में सुधारों के लिए जरूरी धन किसी हद तक अपने संसाधनों से जुटाने में सक्षम हो सकेगा।
हाई स्पीड ट्रेन
दुनिया के तमाम देश बुलेट ट्रेन चला रहे हैं जिसकी रफ्तार 350 किमी प्रति घंटा है। भारत में ट्रेनों की गति बहुत धीमी है। राजधानी व शताब्दी जैसी ट्रेनों की अधिकतम गति सवा सौ किमी प्रति घंटा है। ट्रेनों की धीमी गति से ज्यादातर ट्रैक बहुत व्यस्त हैं। ट्रेनों की गति बढ़ाने के लिए वर्तमान रेल ट्रैक के सुदृढ़ीकरण की जरूरत है। इससे इन रूटों पर ज्यादा ट्रेन चलाना संभव होगा तथा यात्रियों के समय की भी बचत होगी।
इसके अलावा देश में हाई स्पीड ट्रेनों के लिए डेडीकेटेड ट्रैक बनाने की भी जरूरत है। रेलवे ने बुलेट ट्रेन के लिए देश में लगभग 12 रूट चिन्हित किए हैं। इनमें से सात रूटों को पीएमओ तथा योजना आयोग से हरी झंडी भी मिल चुकी है। इस काम के लिए आवश्यक धन की व्यवस्था के लिए रेलवे के साथ ही केंद्र सरकार को भी प्रयास करना होगा। विदेशी वित्तीय संस्थानों के सहयोग अथवा पीपीपी मॉडल के जरिये इन योजनाओं को फास्ट ट्रैक पर लाना होगा।
निर्माणाधीन फ्रेट कॉरिडोर
1-वेस्टर्न कॉरिडोर- मुंबई से दिल्ली, 1499 किमी
2-ईस्टर्न कॉरिडोर- लुधियाना से कोलकाता, 1839 किमी
प्रस्तावित फ्रेट कॉरीडोर
1-ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर- कोलकाता से मुंबई, 2001 किमी
2-नार्थ-साउथ कॉरिडोर- दिल्ली से चेन्नई, 2173 किमी
3-ईस्ट कॉरिडोर- खड़गपुर से विजयवाड़ा, 1100 किमी
4-सदर्न कॉरिडोर- चेन्नई से गोवा, 890 किमी