तत्काल टिकट के नियमों में रेलवे ने किया अहम बदलाव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलवे ने कहा है कि तत्काल टिकट बुक करना अब आसान हो जाएगा।अब तक टिकट खिड़की से तत्काल टिकट बुक करवाने वालों को अपने पहचान पत्र की फोटोकॉपी देनी पड़ती थी।
इंटरनेट से टिकट बुक करवाने पर पहचान पत्र के बारे में बताना होता था और उस पहचानपत्र का नंबर भी देना होता था।साथ ही यात्रा के समय यही पहचान पत्र अपने साथ रखना अनिवार्य होता था।
लेकिन अब बुकिंग के समय पहचान पत्र दिखाने या उसके बारे में बताने की जरूरत खत्म कर दी गई है।अब किसी भी एक यात्री के लिए कोई भी एक मान्य पहचान पत्र यात्रा में साथ रखना ही काफ़ी होगा। ये नियम 1 सितंबर से लागू होंगे।
आसान हुआ तत्काल टिकट बुक कराना
रेलवे ने कहा है कि तत्काल टिकट बुक करना अब आसान हो जाएगा।अब तक टिकट खिड़की से तत्काल टिकट बुक करवाने वालों को अपने पहचान पत्र की फोटोकॉपी देनी पड़ती थी।
इंटरनेट से टिकट बुक करवाने पर पहचान पत्र के बारे में बताना होता था और उस पहचानपत्र का नंबर भी देना होता था।साथ ही यात्रा के समय यही पहचान पत्र अपने साथ रखना अनिवार्य होता था।
लेकिन अब बुकिंग के समय पहचान पत्र दिखाने या उसके बारे में बताने की जरूरत खत्म कर दी गई है।अब किसी भी एक यात्री के लिए कोई भी एक मान्य पहचान पत्र यात्रा में साथ रखना ही काफ़ी होगा। ये नियम 1 सितंबर से लागू होंगे।
बदलाव की वजह
रेलवे ने नियम में बदलाव की वजह भी बताई है। रेलवे का कहना है कि ये संभव है कि कोई व्यक्ति अपने बुज़ुर्ग माता-पिता या बच्चों के लिए टिकट बुक कर रहा हो जो किसी अन्य शहर में रह रहे हों और उनके पहचानपत्र की फ़ोटोकॉपी उपलब्ध न हो।
इसके अलावा इंटरनेट पर पहचानपत्र का नंबर देने से ट्रांजेक्शन का समय बढ़ता है जबकि एजेंट स्क्रिप्टिंग सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं और गलत फायदा उठाते हैं।
पहचानपत्र का नंबर गलत भरे जाने पर बगैर टिकट माने जाने का भी ख़तरा होता है। हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कहा है कि इस क़दम से दलालों को बढ़ावा मिलेगा।
बदलाव की वजह
रेलवे ने नियम में बदलाव की वजह भी बताई है। रेलवे का कहना है कि ये संभव है कि कोई व्यक्ति अपने बुज़ुर्ग माता-पिता या बच्चों के लिए टिकट बुक कर रहा हो जो किसी अन्य शहर में रह रहे हों और उनके पहचानपत्र की फ़ोटोकॉपी उपलब्ध न हो।
इसके अलावा इंटरनेट पर पहचानपत्र का नंबर देने से ट्रांजेक्शन का समय बढ़ता है जबकि एजेंट स्क्रिप्टिंग सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं और गलत फायदा उठाते हैं।
पहचानपत्र का नंबर गलत भरे जाने पर बगैर टिकट माने जाने का भी ख़तरा होता है। हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कहा है कि इस क़दम से दलालों को बढ़ावा मिलेगा।