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पाक जेलों में टॉयलेट साफ कराते हैं भारतीय कैदियों से

Fri, 03 May 2013 01:50 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 03 May 2013 01:50 PM IST
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Indian prisoner has to clean toilet in pakistani jail

पाकिस्तान की जेलों में भारतीय कैदियों के साथ कैसा बर्ताव किया जाता है, यह जानकर कोई भी चौंक सकता है। पाकिस्तान की जेलों में टॉर्चर झेलकर लौटे गुजरात के मछुआरों ने वहां होने वाले खौफनाक ज्यादतियों का खुलासा किया है।

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उनका कहना है कि पाकिस्तानी जेलों में भारतीयों से टॉयलेट तक साफ करवाए जाते हैं और उनका पहले इस्तेमाल पाकिस्तानी कैदियों को करने दिया जाता है।

मछुआरे कांजी बड़िया का कहना है कि जेल की सफाई का काम भी भारतीय कैदियों के जिम्मे रहता है। अगर वहां किसी भारतीय कैदी को नहाने के लिए साबुन चाहिए होता है तो उसे अपने साथी पाकिस्तानी कैदियों के अंडरगार्मेंट्स तक साफ करने होते हैं।
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गुजरात के इन मछुआरों को समुद्री सीमा पर पाकिस्तान की मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसी पकड़ती रहती हैं, इन लोगों को वहां की जेलों में इस तरह के कई दुखद अनुभवों से गुजरना पड़ता है।
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पाकिस्तानी जेल से तीन साल पहले लौटे मछुआरे का कहना है कि वहां भारतीय कैदियों को सब्जी या दाल के बजाय पानी के साथ रोटी खाने के लिए दी जाती है और उनसे जेलों को साफ करवाया जता है।

यह टॉर्चर सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। पाकिस्तानी कैदियों और अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब होता है जिसे कभी-कभी बर्दाश्त करना मुश्किल होता है।

मछुआरे ने बताया 'निचले स्तर के अधिकारी हमें मुंह न खोलने के लिए धमकाते थे और एक बार जब कराची के लांधी जेल में कई कैदी भूख हड़ताल पर थे तो उनको नॉनवेज खाने पर मजबूर किया गया।

हमने जब अपनी बात जेल सुपरिंटेंडेंट से कही तो उन्होंने हमारे लिए वेज खाने का इंतजाम किया लेकिन उनके जेल से जाते ही मेरे प्राइवेट पार्ट्स पर बार-बार उन लोगों ने प्रहार किया।'

   
एक और मछुआरे रामजी बाबू पाकिस्तान में 11 महीने की जेल काटकर 2008 में लौटे जिन्होंने अपनी साथी कैदी को टॉर्चर के बाद मरते देखा था।

उन्होंने बताया कि जब मानवाधिकार कार्यकर्ता जेल में जांच करने आए तो उनको ऐसा कहने पर मजबूर किया गया कि वाशिंग मशीन ऑन करते समय वह इलेक्ट्रिक शॉक से मरा है। हमें कहा गया कि अगर हमने सच बोला तो हमारा भी हाल उसके जैसा ही किया जाएगा। उसने भी स्वीकार किया कि जेल की सफाई का पूरा काम भारतीयों को ही करना होता था।

जीवाभाई पिछले साल ही पाकिस्तान की जेल से लौटे हैं। उनका कहना है कि उनसे जेल के पास की सड़क भी साफ करवाई जाती थी।

पाकिस्तानी जेल से लौटे रमेश चावड़ा का कहना है कि उससे लगभग 16 घंटे का काम करवाया जाता था। देर रात तक पाकिस्तानी कैदी टीवी देखते रहते थे और हमें सोने तक नहीं देते थे और उसके बाद जब सुबह हम देर से उठते थे तो हमें पीटा जाता था।

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