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स्पेलिंग मुकाबले में 'भारतीयों' ने 8वीं बार मारी बाजी

Fri, 29 May 2015 02:05 PM IST
Updated Fri, 29 May 2015 02:05 PM IST
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Indian origin student win Spelling competition in America.

अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली स्पेलिंग प्रतियोगिता में एक बार फिर से भारतीय मूल के छात्रों ने जीत हासिल की है।

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कैंसस राज्य की वान्या शिवशंकर और मिसूरी से आए गोकुल वेंकटचलम को मुकाबले का संयुक्त विजेता घोषित किया गया।

वान्या शिवशंकर पांचवी बार इस प्रतियोगिता में उतरी थीं और ये दूसरी बार था जब वो फाइनल में पहुंची थीं। उनकी बहन काव्या शिवशंकर 2009 की विजेता रह चुकी हैं। वान्या पियानो भी काफी अच्छा बजाती हैं।

सपने का सच होना

Indian origin student win Spelling competition in America.

जीत के बाद उनका कहना था, ''ये एक सपने के सच होने जैसा है। मैं बहुत दिनों से इसके इंतजार में थी।''

वहीं गोकुल वेंकटचलम भी चार बार इस प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं। पिछले साल वो तीसरे स्थान पर रहे थे। गोकुल बास्केटबॉल के अच्छे खिलाड़ी हैं।

जीत के बाद उनका कहना था, ''कामयाबी आखिरकार मिल ही गई। बेहद खुश हूं।''

लगातार आठवीं बार और पिछले पंद्रह सालों में 11 बार भारतीय मूल के छात्र-छात्राओं ने ये प्रतियोगिता जीती है।

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हजारों डॉलर का इनाम

Indian origin student win Spelling competition in America.

इनाम के तौर पर उन्हें 35 हजार डॉलर नगद यानि करीब 23 लाख रूपए मिलेंगे और कई सारे अन्य पुरस्कार भी दिए जाएंगे। स्पेलिंग बी के नाम से दुनिया भर में मशहूर इस प्रतियोगिता को लाखों लोग देखते हैं और लाखों छात्र इसमें हिस्सा लेते हैं।

फाइनल में पहुंचने वाले दस छात्रों में से सात भारतीय मूल के थे। पहले से ही उम्मीद की जा रही थी कि इस बार भी जीत उन्हीं में से किसी के हाथ लगेगी। सेमीफाइनल में पहुंचे 49 छात्रों में से 25 भारतीय मूल के थे।

भारतीय मूल के छात्रों की इस लगातार जीत पर सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों में कुछ कड़वाहट भरे बयान भी सामने आए हैं। एक ने लिखा, ''काश किसी साल कोई अमरीकी बच्चा भी जीत सकता।''

दूसरे ने लिखा है, ''ऐसा कैसे हो रहा है कि हर साल भारतीय बच्चे अमेरिकी स्पेलिंग बी में दबदबा बनाए रख रहे हैं।'' एक और ने लिखा, ''स्पेलिंग बी में सिर्फ अमेरिकी बच्चों को होना चाहिए।''

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कड़ी मेहनत

Indian origin student win Spelling competition in America.

ये अलग बात है कि ये बच्चे भारतीय मूल के अमेरिकी नागिरक हैं और कड़ी मेहनत की बदौलत इस मुकाम तक पहुंचते हैं।

भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका के तमाम शहरों में इसके लिए कोचिंग की भी व्यवस्था कर रखी है। इनमें से कई हैं जो निजी प्रशिक्षकों की भी मदद लेते हैं।

इसका आयोजन करने वाली संस्था के निदेशक पेज किंबल ने इस तरह के बयानों पर अफसोस जताते हुए कहा,''ये प्रतियोगिता प्रतिभा का सच्चा स्वरूप है। हम हर बच्चे का साथ देत हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो कहां से आया है।''

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