भारतीय मूल के प्रोफेसर मंजुल भार्गव को गणित का 'नोबेल'
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भारतीय मूल के दो प्रोफेसरों को गणित के क्षेत्र में प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इनमें से एक मंजुल भार्गव को फील्ड्स मेडल से नवाजा गया है।
इसे गणित के नोबेल पुरस्कार के तौर पर जाना जाता है। वहीं, सुभाष खोट को रॉल्फ नेवानलिन्ना पुरस्कार मिला है। दोनों को यह पुरस्कार सियोल में आयोजित ‘इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ मैथमेटिक्स 2014’ में इंटरनेशनल मैथमैटिकल यूनियन द्वारा प्रदान किया गया।
कनाडा में जन्मे भार्गव अमेरिका में पले बढ़े हैं
भार्गव प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर हैं। वह उन चार विजेताओं में शामिल हैं, जिन्हें फील्ड्स मेडल से नवाजा गया है। भार्गव को ज्यामिती संख्या में अहम नई पद्धति विकसित करने के लिए पुरस्कृत किया गया। 1947 में कनाडा में जन्मे भार्गव अमेरिका में पले बढ़े हैं।
उन्होंने भारत में भी काफी समय बिताया है। वहीं, सुभाष खोट न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के कौरेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइंसेज में कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर हैं। उन्हें ‘यूनिक गेम्स’ की जटिलता को समझने के प्रयासों और इसके अध्ययन में अहम योगदान देने के लिए सम्मानित किया गया।
मरियम बनीं फील्ड्स मेडल जीतने वालीं पहली महिला
ईरानी मूल की प्रोफेसर मरियम मिर्जाखानी फील्ड्स मेडल जीतने वालीं पहली महिला गणितज्ञ बन गई हैं। कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर मिर्जाखानी को ज्यामिती में किए गए उनके शोध के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा सम्मान है। अगर इससे युवा महिला वैज्ञानिकों और गणितज्ञों को प्रेरणा मिलती है तो मुझे बेहद खुशी होगी। मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले वर्षों में कई महिलाएं ऐसे पुरस्कार जीतेंगी।