100 किमी दूर से ही दुश्मन को उड़ा देगी बराक-8 मिसाइल
भारतीय नौसेना ने स्वदेशी और अत्याधुनिक विध्वंसक आईएनएस कोलकाता से लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने में सक्षम बराक-8 मिसाइल प्रणाली (नेक्स्ट जेनरेशन) का परीक्षण किया है। अरब सागर में हुआ परीक्षण पैमाने पर पूरी तरह सफल रहा।
यह मिसाइल प्रणाली बहुद्देश्यीय निगरानी और खतरे की आहट भांपने वाले रडार (एमएफ-स्टार) से लैस है तथा 100 किमी दूर से ही दुश्मन के वार को भांपकर पलक झपकते उसे स्वत: 70-90 किमी दूर हवा में ध्वस्त करने में सक्षम है।
नौसेना के प्रवक्ता के अनुसार अरब सागर में नौसैनिक अभ्यास के दौरान मंगलवार और बुधवार को तीव्र गति से आईएनएस कोलकाता को निशाना बनाकर दागे गए दो लक्ष्यों को मिसाइल प्रणाली ने न केवल समय पर पहचाना, बल्कि समय रहते करीब 80 किमी की ऊंचाई पर ही ध्वस्त कर दिया।
इस प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा इस्राइल की इस्राइल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने मिलकर विकसित किया है। इसे एल्टा सिस्टम, फ्रांस की राफेल और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने मिलकर तैयार किया है। इससे पहले 26 नवंबर 2014 को इस्राइली नौसेना के युद्धपोत से बराक -8 प्रणाली ने परीक्षण के दौरान ड्रोन को निशाना बनाया था।
क्या होगा लाभ
दुश्मन का कोई भी वार नौसेना के युद्धपोत, विध्वंसक, विमान वाहक पोत आदि को आसानी से निशाना नहीं बना सकेगा। बराक-8 के तैनाती स्थल से 70-80 किमी का पूरा वायुमंडल सुरक्षित रहेगा। इस मिसाइल प्रणाली में 680 मीटर प्रति सेकेंड (2 मैक) की गति से लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल, मानव रहित विमान (ड्रोन), एंटी शिप मिसाइल, हेलीकॉप्टर से होने वाले हमले को निशाना बनाने की क्षमता है।
कैसे काम करती है प्रणाली
बराक-8 प्रणाली का एमएफ स्टार रडार सिस्टम 360 डिग्री पर दुश्मन के वार की पहचान करता है और जैसे ही हमले की आहट मिलती है, मिसाइल के जरिए उसे स्वत: ध्वस्त कर देता है। यदि दुश्मन एक बार में खत्म नहीं होता तो फिर दूसरी और फिर तीसरी मिसाइल छोड़ी जाती है। इस प्रणाली में तैनाती स्थल से 90 किमी से करीब आधा किमी दूर तक दुश्मन के वार का पीछा करने की क्षमता है।
अभी कहां है तैनाती
आईएनएस कोलकाता देश में ही तैयार हुआ नौसेना का विध्वंसक है और उस पर 32 बराक-8 मिसाइल प्रणाली तैनात की गई है।
भारत और इस्राइल
2005 में बराक मिसाइल परियोजना को मंजूरी मिली थी। 2006 में सहमति पत्र पर दस्तखत हुए तथा नवंबर 2009 में भारत और इस्राइल ने 1.1 अरब डॉलर की बराक-8 मिसाइल प्रणाली (नेक्स जनरेशन) की आपूर्ति पर हस्ताक्षर किए थे।
10 नवंबर 2010 को बराक-8 का पहला परीक्षण हुआ। 2011 में ही इसे नौसेना के बेड़े में शामिल करने की योजना थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार कुछ तकनीकी खामियों के चलते इसमें विलंब हुआ।
''बराक-8 का सफल परीक्षण नौसेना के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह मिसाइल प्रणाली दुश्मनों के हमले से रक्षा के लिए है। बदल रहे रक्षा परिदृश्य में इस तरह की प्रणाली की काफी आवश्यकता है।''
-डॉ. वीके सारस्वत, पूर्व प्रमुख डीआरडीओ