दुष्कर्म आरोपियों को नहीं, पीड़ितों को सीख देता है भारतीय मीडिया
दुष्कर्म पीड़िताओं की तकलीफ उस भयावह कृत्य का शिकार बनने के दौरान ही खत्म नहीं होती, बल्कि इसे हमारा समाज और मीडिया समय-समय पर जिंदा करता रहता है।
भारतीय मीडिया जब दुष्कर्म के मामलों की खबर चलाता है, तो इसमें अपराध को अंजाम देने वाले को दोषी ठहराने की बजाय पीड़िता को नसीहत देने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।
उस पर हमारे राजनेता अपने विवादित बयानों से पीड़िताओं को ही दुष्कर्म का दोषी बताना शुरू कर देते हैं।
बंगलूरू मामले में लड़की पर ही मढ़ा गया दोष
तीन अक्टूबर की रात बंगलूरू में एक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इसको लेकर दूसरे दिन अखबारों में छपी खबरों में पीड़िता पर ही दोष मढ़ा गया।
देश के कुछ बड़े अंग्रेजी अखबारों में लड़की के साथ दुष्कर्म होने के लिए उसे ही दोषी बनाते हुए कहा गया कि उसने अपने मित्र की सलाह नहीं मानी। एक अखबार ने छापा कि महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। ऐसे ही अन्य कई मामलों में दोषियों को कोसने की बजाय पीड़ित की गलतियों को ही ढूंढा गया।
इसके अलावा हमारे राजनीतिज्ञ लड़कियों को छोटे कपड़ने न पहनने, अकेले न घूमने जैसे सुझाव देते रहते हैं और इस तरह एक बार दुष्कर्म का शिकार होने पर भी समाज का नजरिया पीड़ितों की तकलीफ घटाने की बजाय बढ़ाने का ही काम करता है।