फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Indian Journalist tells full story of Paris terrorist attack

भारतीय पत्रकार की जुबानी पेरिस हमले की कहानी, पढ़ें पूरी दास्तां

Sun, 15 Nov 2015 09:42 AM IST
Updated Sun, 15 Nov 2015 09:42 AM IST
विज्ञापन
Indian Journalist tells full story of Paris terrorist attack

जिस शहर को खुशनुमा मिजाज के लिए जाना जाता हो, वहां पहली बार खौफ का मंजर दिखा। बेशक विश्व युद्ध में ऐसे दृश्यों की भरमार रही हो, लेकिन उसके बाद से पेरिस का जीवन शांत और उल्लास से भरा रहा। मगर शुक्रवार को सब उलट गया। एकाएक पेरिस की सड़कों पर चीख-पुकार मच गई। स्वचालित हथियारों से निकलती गोलियों की आवाज, छह स्थानों पर धमाके और देखते ही देखते कई जगहों पर बिखरी लाशों ने इस शहर की तस्वीर बदल कर रख दी। पेरिस कभी भी इतना डरावना नहीं लगा। अमूमन शुक्रवार शाम को खुशनुमा बनाने लोग घरों से निकलते हैं, मगर उनमें से कई लोग दहशतगर्दों का निशाना बन गए।

विज्ञापन


मेरे एक परिचित ने मुझे डिनर पर आमंत्रित किया था। यह दिन हमारे लिए किसी आम दिन की तरह ही था। तभी हमें पता चला कि जिस जगह हम लोग आए हुए हैं, वहां से बमुश्किल आधा किमी की दूरी पर रुडेल फाउंटेन, बालवार्ड बुमार्श और ला बेले इक्विप रेस्त्रां में भी गोलियां चली हैं। ये सभी उस बाटाक्लां कंसर्ट हॉल के आसपास हैं, जहां लोगों को बंधक बनाकर गोलियां चलाई गईं। ला बेले रेस्त्रां तो हमारे करीब ही था। हम अवाक थे। कुछ सूझ नहीं रहा था। इस बीच टेलीफोन पर भी खबर मिली कि स्टाड डे फ्रांस नेशनल स्टेडियम के बाहर धमाका हुआ है।
विज्ञापन


जर्मनी और फ्रांस का मैच देख रहे लोगों को स्टेडियम के पास धमाके ने विचलित कर दिया। कुछ देर बाद हमने साहस दिखाते हुए पास के एक रेस्त्रां में जाने की कोशिश की। हम हालात के बारे में जानना चाहते थे लेकिन पुलिस ने एक सीमा के बाद हमें आगे जाने की इजाजत नहीं दी। हमें इतना पता चला कि शहर में कुछ रेस्त्रां में अपनी टेबल पर बातों में मसरूफ लोगों पर भी गोलियां चलीं और वे पल भर में जमीन पर लुढ़क गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुलिस ने संभाले हालात

Indian Journalist tells full story of Paris terrorist attack

अखबारों की सुर्खियों में यही घटना है। एक अखबार का कहना है यह घटना इस्लाम विरोधी धारणा को मजबूत करेगी। पेरिस में सबने यही कहा कि दहशतगर्दों ने फ्रांस को ललकारा है। लोगों से बात करने पर अब लगता है कि यहां कंजरवेटिव भावनाएं बढ़ेंगी। पेरिस में फिलहाल स्कूल बंद हैं। छोटे स्थानीय मार्केट तो बंद हैं, लेकिन सुपर मार्केट से जरूरी चीजें ली जा सकती हैं।

स्वीमिंग पुल, लाइब्रेरी, हेल्थ क्लब सब फिलहाल बंद हैं। एफिल टावर के आसपास भी सन्नाटा है। हां रेस्त्रा में लोगों को कुछ देर पहले तक मुफ्त में खाना खिलाया जा रहा था। पानी की बोतलें भी बंट रही थीं। टैक्सी वाले भी अपनी तरफ से किराया नहीं मांग रहे हैं। वालेंटियर्स शिद्दत से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। पेरिस के इस दुख के समय हर कोई हाथ बंटा रहा है। लेकिन पेरिस को अपनी लय में आने में थोड़ा वक्त तो लगेगा।

पुलिस ने बड़ी तत्परता से हालात को काफी हद तक संभाल लिया। सुरक्षित तरीके से लोगों को घर पहुंचाने की व्यवस्था की। ऐसे ही एक सुरक्षित रास्ते से मैं भी घर पहुंची। हालांकि इसके लिए कुछ ज्यादा चलना पड़ा लेकिन रास्ते में चप्पे-चप्पे पर पुलिस और एंबुलेंस तैनात थी। इधर प्रशासन की तरफ से एलान हो रहा था कि घरों से बाहर न निकलें। इस अपील पर लोगों ने ध्यान दिया। आसपास की जो सड़कें व्यस्त रहती हैं, जहां चमकीली मोटरकारें सरपट भागती हैं, वहां दूर-दूर तक सन्नाटा पसरा था। मैं अपने घर की छत पर आई, तो मुझे पेरिस बदला हुआ दिखा। पत्रकार होने के नाते लोगों ने मुझसे बातें कीं। इस घटना पर कुछ जानना चाहा। उनके शब्द थर्राए हुए, लेकिन आक्रोश से भरे थे।






विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed